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तंत्र-मंत्र के लिए ऐसी क्रूरता कि नाल के लिए उखाड़ दिए घोड़ी के खुर और छोड़ दिया मरने के लिए

सभ्य समाज में जादू, टोना, तंत्र-मंत्र और काला जादू का कोई स्थान नहीं है। आधुनिक युग में इंसान भले ही चांद पर पहुंच चुका हैं लेकिन दकियानूसी वर्ग के लोग अब भी मध्ययुगीन काल में जी रहे हैं।

तंत्र-मंत्र के लिए ऐसी क्रूरता कि नाल के लिए उखाड़ दिए घोड़ी के खुर और छोड़ दिया मरने के लिए

सभ्य समाज में जादू, टोना, तंत्र-मंत्र और काला जादू का कोई स्थान नहीं है। आधुनिक युग में इंसान भले ही चांद पर पहुंच चुका हैं लेकिन दकियानूसी वर्ग के लोग अब भी मध्ययुगीन काल में जी रहे हैं। ऐसे वर्ग के लोग इंसानों के साथ.साथ पशुओं से भी क्रूरता की सारी हदें पार करने से नहीं हिचकते। दकियानूसी वर्ग के लोग ऐसी क्रूरता की घटना को अंजाम देते हैं कि इंसान तो क्या, हैवान की रूह कांप जाए। ऐसी ही एक घटना सामने आई हैए जिसमें तंत्र.मंत्र करने नाल प्राप्ति के लिए दो वर्ष की घोड़ी के तीन पैरों के खुर ही उखाड़कर खुले मैदान में मरने के लिए छोड़ दिया।

डीडीनगर थाना क्षेत्र में सरोना चौक में मेनका गांधी की संस्था पीपुल्स फॉर एनिमल की कार्यकर्ता कस्तूरी बलाल और उसकी टीम दर्द से तड़प रही एक घोड़ी को रेस्क्यू कर बैरनबाजार स्थित पशु चिकित्सालय लेकर आए। घोड़ी के दो सामने तथा एक पीछे के पैर का खुर उखड़ा हुआ था, साथ ही घोड़ी के पैर से खून बह रहा था। खुर उखड़े होने की वजह से घोड़ी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। घोड़ी का इलाज कर रहे पशु चिकित्सक डॉ. संजय जैन के मुताबिक घोड़ी के खुर किसी बीमारी की वजह से नहीं उखड़ा हैए उसके खुर को किसी ने बड़ी बेरहमी के साथ उखाड़ दिया है। इस वजह से वह दर्द से तड़प रही है और उसके पैर से लगातार खून बह रहा है।

घोड़ी की आंखों से आंसू थम नहीं रहे

हैवानों की हैवानियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जालिमों ने कितनी बेदर्द से घोड़ी के पैरों के खुर को नोचकर निकाला होगा कि दर्द के मारे घोड़ी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। असहनीय पीड़ा के मारे घोड़ी ने खाना.पीना छोड़ दिया है। अस्पताल में भी ड्रेसिंग के दौरान घोड़ी दर्द से तड़प रही थी। डॉक्टर ने घोड़ी के पैरों के जख्म साफ कर ड्रेसिंग करने के बाद घोड़ी को दर्द निवारक इंजेक्शन लगायाए उसके दो घंटे बाद ही घोड़ी की हालत सामान्य हो पाई।

खुर उखाड़ने के बाद अज्ञात लोगों ने फेंका

सरोना चौक के खाली मैदान में आते.जाते लोगों ने घोड़ी को लहूलुहान दर्द से तड़पते देख इसकी सूचना कस्तूरी तथा उसकी टीम को दी। आसपास के लोगों ने बताया कि घोड़ी को मैदान में किसने छोड़ा, इस बात की जानकारी उन्हें नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक शुक्रवार तड़के अज्ञात लोगों द्वारा घोड़ी को घायल अवस्था में वहां लाकर छोड़ा गया है।

नए खुर आने में लगेगा एक माह

पशु चिकित्सक के मुताबिक घोड़ी की हालत पहले से बेहतर है। वह अपने पैरों पर फिर से खड़ी हो सकती है। पैरों के घाव भरने तथा नए खुर आने में एक माह का समय लग सकता है। कस्तूरी बलाल ने बताया है कि घोड़ी की देखरेख तथा नियमित ड्रेसिंग करने वे उसे अपने चंद्रखुरी स्थित रेस्क्यू सेंटर लेकर जाएंगी। वहां घोड़ी के लिए अलग से शेल्टर बनाया जाएगा। घोड़ी के लिए शेल्टर बनाने वन्यजीव तथा पशुप्रेमियों ने मदद करने का आश्वासन दिया है।

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