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कोरोना की कड़वाहट मिठाई के धंधे में, 2 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित

प्रदेश की 50 हजार से ज्यादा मिठाई दुकानों में लगा ताला। पढ़िए पूरी खबर-

फैंकनी पड़ी लाखों की मिठाई, 34 दिनों से मिठाई की दुकानों के शटर बंद
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मिठाई की दुकान (प्रतीकात्मक फोटो)

रायपुर। कोरोना के कहर के चलते प्रदेश की 50 हजार से ज्यादा मिठाई दुकानों में भी ताला लग गया है। इन्हें रोज करोड़ों का फटका लग रहा है। इन दुकानों में काम करने वाले तीन लाख से ज्यादा कामकारों का रोजगार भी खतरे में है। दुकानें खुलने के बाद ही इनको काम मिलेगा, तब इनका जीवनयापन भगवान भरोसे है। बताया जा रहा है कि बड़ी मिठाई दुकानों का धंधा ज्यादा प्रभावित हुआ है। कई दुकानों में रोज दो लाख तक का गल्ला होता था। अब तक लॉकडाउन में दो हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हो चुका है।

लॉकडाउन के चलते 47 दिनों से मिठाई दुकानों के शटर बंद हैं। शहर से लेकर गांवों तक मिठाई दुकानों में बड़ा कारोबार होता है। छोटी मिठाई दुकानों में तो मिठाई के साथ चाय नाश्ते का भी धंधा चलता है, लेकिन सारा का सारा धंधा बंद हो गया है। कहीं कोई काम नहीं चल रहा है। इन दुकानों में दो लेकर दर्जनों कामगार मेहनत करते हैं। ये सब भी खाली हो गए हैं। इनके सामने घर चलाने का संकट पैदा हो गया है। दुकानदार इनको जितनी हो सके, मदद तो कर रहे हैं, लेकिन हर दुकानदार की इतनी हैसियत नहीं है कि वह अपने कामगारों की लगातार मदद कर सके।

25 हजार से दो लाख तक रोज का धंधा

मिठाई की दुकानों में शहरों की बात करें तो यहां पर छोटी से लेकर बड़ी दुकानों में 25 हजार से लेकर दो लाख तक का गल्ला होता है। राजधानी रायपुर में ही 50 ऐसी नामी दुकानें हैं, जहां पर रोज एक लाख से ज्यादा का गल्ला होता है। इसी तरह से प्रदेश के और कई बड़े शहरों बिलासपुर, भिलाई, कोरबा, राजनांदगांव, रायगढ़, अंबिकापुर और जगदलपुर में भी कई नामी दुकानें हैं, जहां पर रोज का धंधा एक लाख से ज्यादा का हो जाता है। जहां तक शहरों की छोटी दुकानों का सवाल है तो उनका भी धंधा रोज 20-25 हजार तक हो ही जाता है। शहर के मोहल्लों की दुकानों में ही रोज का पांच-दस हजार तक कारोबार होता है। ग्रामीण क्षेत्र में वहां की आबादी के हिसाब से धंधा होता है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक गांव की मिठाई दुकानों में भी रोज पांच हजार का धंधा हो जाता है।

उबरने में लगेंगे छह माह

मिठाई दुकानों के संचालक कहते हैं, कोरोना को लेकर जिस तरह के हालात दिख रहे हैं, उससे लगता नहीं है कि लॉकडाउन के बाद धंधा पहले की तरह आसानी से चलेगा। पहले ही तरह धंधे को रफ्तार पकड़ने में छह माह लग जाएंगे। दीपावली के आसपास ही धंधा अच्छा होने की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन वो भी तब, जब कोरोना का कहर तब तक थम जाए। अगर कहर इसी तरह से जारी रहा तो दीपावली इस बार फीकी होने वाली है।

राजधानी में 50 बड़ी दुकानें

मिठाई दुकान चलाने वालों की मानें राजधानी रायपुर में पांच सौ से ज्यादा दुकानें हैं। इनमें बड़ी दुकानें 50 के करीब हैं। बाकी छोटी दुकानें हैं। प्रदेश में 20 हजार गांव हैं, हर गांव में एक दुकान होती ही है। गांवों से लेकर शहरों तक दुकानों की संख्या देखें तो एक अनुमान के मुताबिक 50 हजार से ज्यादा दुकानें प्रदेश में हैं। एक दुकान का औसत एक दिन का धंधा दस हजार माना जाए तो एक दिन का हिसाब करोड़ों में जाता है।

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