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कोरोना : नाले में दफनाई गई लाश, दहशत ऐसी कि न कंधा मिला न ज़मीन

माता- पिता भी बेटे का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए। कहा- 'हमसे ज्यादा बदनसीब कोई नहीं होगा।' पढ़िए पूरी खबर-

कोरोना : नाले में दफनाई गई लाश, दहशत ऐसी कि न कंधा मिला न ज़मीन
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दंतेवाड़ा। (COVID-19) के संक्रमण का खौफ़ लोगों के ज़ेहन में इस कदर हावी हो गया है कि एक युवक की मौत के बाद परिवार का कोई सदस्य कंधा देने तक नहीं आया। इसके अलावा मृतक को गांव की ही मिट्टी में दफनाने के लिए जगह नहीं मिली।

यह मामला दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 65 किमी दूर नक्सल इलाके कटेकल्याण ब्लॉक का गांव गुड़से का है। आंध्रप्रदेश में मिर्ची तोड़ने गए 22 साल के युवक लखमा की वहीं मौत हो गई थी। कोरोना का भय इतना रहा कि ग्रामीणों ने शव को आंध्रप्रदेश में ही अंतिम संस्कार करने को कह दिया। हालांकि जिस जगह वह काम कर रहा था वहां के मालिक ने शव को गुड़से भेज दिया। यहां लाने के बाद गांव में ही शव दफनाने के लिए जगह तक नहीं दी गई।

मरघट नहीं मिला तो शव को नाले में दफना दिया गया। गांव वाले भड़क न जाए इसलिए आंध्रप्रदेश से शव लेकर आने वाले दो लोगों ने ही की। ग्रामीण बताते हैं कि मरघट नहीं मिलने पर आनन-फानन में एक महुए पेड़ के नीचे दफना दिया गया था। लेकिन जिस ग्रामीण का पेड़ था वह भड़क गया, उसके बाद दफनाए गये शव को फिर से निकलवाना पड़ा। आखिरकार उसे गांव में बहने वाले नाले के अंदर गड्ढा खोदकर दफनाना पड़ा।

मृतक के बड़े भाई कुम्मा मड़कामी ने बताया कि- 'लखमा 6 महीने से आंध्र प्रदेश में काम कर रहा था। गांव में दफनाने की जगह भी नहीं मिली। ऐसे माहौल में माता- पिता भी बेटे का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए। हमसे ज्यादा बदनसीब कोई नहीं होगा।'

इस मामले में कटेकल्याण बीएमओ डॉ. एडी बारा ने बताया कि- 'टीम जांच के लिए गई थी। उसे सर्दी, खासी जैसे लक्षण नहीं होना बताया गया। मौत की वजह कोरोना नहीं है, लेकिन गुड़से गांव हमारी निगरानी में है।

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