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कोरोना की मार : छत्तीसगढ़ के बजट में 30 फीसदी की कटौती, सरकारी खजाना खाली

राजस्व देने वाले विभागों की गतिविधियां डेढ़ माह से ठप। पढ़िए पूरी खबर-

कोरोना की मार : छत्तीसगढ़ के बजट में 30 फीसदी की कटौती, सरकारी खजाना खाली
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रायपुर। कोरोना का संक्रमण और उससे उपजा लॉकडाउन और लॉकडाउन के बाद व्यापार, कारोबार, रोजगार और सरकार को मिलने वाले राजस्व में कमी का असर ये हुआ है कि छत्तीसगढ़ के बजट में एक तिहाई यानी 30 प्रतिशत की कटौती करने की मजबूरी सरकार के सामने आ गई है। सरकार का मानना है कि वर्ष 2019 से जारी सामान्य आर्थिक मंदी तथा कोविड 19 से उत्पन्न परिस्थितियों से राज्य के राजस्व पर वर्ष 2020-21 में गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ा है। यही नहीं, वर्ष के आगामी समय में भी संसाधनों की कमी रहना संभावित है।

विभागों के खर्च में एक तिहाई कटौती

राजस्व में कमी साफ तौर पर सामने आने के बाद सरकार के वित्त विभाग ने 11 मई को जारी निर्देश में वर्ष 2020-21 के खर्चों में एक तिहाई कटौती करने तथा योजना एवं कार्यों में प्राथमिकता निर्धारित कर कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है। इसके तहत अलग-अलग चरणों में विभागों के भारसाधक सचिवों से चर्चा की जाएगी। इसके लिए भी एक विस्तृत कार्यक्रम बनाया गया है। भारसाधक सचिवों से कहा गया है कि वे अपने विभागीय मंत्रियों से चर्चा करने के बाद खर्चों की प्राथमिकता तय करें और चर्चा में शामिल हों।

पहले चरण में इन विभागों की होगी चर्चा

वित्त विभाग ने खर्चों में कटौती के लिए जो कार्यक्रम बनाया है, उसके मुताबिक 15 मई से 2 जून तक अलग-अलग विभागों की बात की जाएगी। पहले चरण में जिन विभागों की चर्चा होनी है, उनमें ये विभाग शामिल हैं- वित्त विभाग, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उर्जा, कृषि, लोक निर्माण, गृह विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, नगरीय प्रशासन, जलसंसाधन, आदिम जाति कल्याण, महिला एवं बाल विकास, वन विभाग, राजस्व विभाग, लोकस्वास्थ्य एवं यांत्रिकी, समाज कल्याण, उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग।

ये है राजस्व में कटौती का लेखा-जोखा

राज्य सरकार को पिछले वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार से 42 हजार करोड़ तथा राज्य को अपने संसाधनों से करीब 30 हजार करोड़ सहित कुल करीब 72 हजार करोड़ रुपए मिले थे। अप्रैल से शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष 2020-21 में अप्रैल से लेकर मई में 17 तारीख तक लॉकडाउन की वजह से राजस्व में भारी कमी का सामना करना पड़ा है। लॉकडाउन के कारण प्रदेश की आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप रही हैं। आने वाले जून से लेकर जुलाई में क्या स्थिति होगी, ये भी अभी साफ नहीं है। सरकार के अपने संसाधनों से जितना राजस्व मिलता है, उसके मिलने की उम्मीद बहुत कम है। सरकार राज्य के बजट में पहली तिमाही में 25 प्रतिशत व्यय की अनुमति देती है, लेकिन सरकार के पास अगर 10-15 प्रतिशत से कम राजस्व आता है, तो जाहिर है, 25 प्रतिशत व्यय की अनुमति किसी हाल में नहीं दी जा सकती, न ही व्यय करने के लिए 25 प्रतिशत राशि कोई सरकार दे सकती है।

जिनसे मिलता है राजस्व, वही गतिविधियां बंद

राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाले विभागों में सेल्स टैक्स, एक्साइज (आबकारी) खनिज, बिजली, राजस्व, स्टांप पंजीयन, जलसंसाधान, वन आदि विभाग हैं। अप्रैल से लेकर मई के आधे महीने तक लॉकडाउन ने इन सारे विभागों की गतिविधियों को ठप रखा है। अभी हाल में ही आबकारी या पंजीयन विभाग में काम शुरू हुआ है, लेकिन इससे मिलने वाला राजस्व सामान्य के मुकाबले अत्यंत सीमित है। वित्त विभाग का अनुमान है कि पिछले डेढ़ माह में ही राजस्व में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आई है। यही नहीं, लॉकडाउन के बीच सरकार ने लोगों की सहायता के लिए जो योजनाएं चलाई हैं, उस पर भी राजस्व का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो गया है। जाहिर है, अब कटौती तो करनी ही पड़ेगी, लेकिन वित्त विभाग के जानकारों का मानना है कि अगर जुलाई से लेकर आगे के महीनों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गईं, तो वित्तीय वर्ष के अंत यानी अगले साल अप्रैल तक हालात सामान्य हो जाएंगे।

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