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शराब डिलीवरी ब्वॉय की सप्लाई को लेकर विवाद, गैरकानूनी होने का आरोप

डिलीवरी ब्वॉय का काम करने के लिए उन्हीं संस्थाओं को काम दिया है, जो पहले ही मैनपावर सप्लाई का करती हैं काम। पढ़िए पूरी खबर-

शराब डिलीवरी ब्वॉय की सप्लाई को लेकर विवाद, गैरकानूनी होने का आरोप
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रायपुर। प्रदेश में ऑनलाइन शराब की बिक्री के लिए डिलीवरी ब्वॉय की नियुक्ति के मामले को लेकर विवाद सामने आ रहा है। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) ने प्रदेश के करीब सभी जिलों में डिलीवरी ब्वॉय का काम करने के लिए उन्हीं संस्थाओं को काम दिया है, जो पहले ही मैनपावर सप्लाई का काम करती हैं। दूसरी ओर इस मामले में आपत्ति करने वालों का कहना है कि यह काम देने के लिए टेंडर बुलाया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। मार्केटिंग कंपनी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि शासन के निर्देश पर काम दिया गया है, इसमें किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है।

रायपुर जिले में डिलीवरी ब्वॉय का काम करने के लिए सुमीत फैसलिटिज को काम दिया गया है। स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन ने इस संबंध में पत्र जारी किया है। कार्पोरेशन के महाप्रबंधक द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सुमित फैसलिटिज को रायपुर जिले में देशी-विदेशी मदिरा की होम डिलीवरी के लिए चयनित किया गया है। पत्र में कुछ शर्तों का भी उल्लेख है।

ये हैं शर्तें

डिलीवरी ब्वॉय, कर्मचारी छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना चाहिए। यथासंभव रायपुर के आसपास का हो। डिलीवरी ब्वॉय पूर्व ठेकेदारों, सीएसएमसीएल द्वारा संचालित राज्य के किसी भी जिले से ब्लैक लिस्टेड नहीं होना चाहिए। उसका आबकारी अपराध या अन्य अपराध का रिकार्ड न हो। इस संबंध में पुलिस द्वारा चरित्र सत्यापन का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। डिलीवरी ब्वॉय संक्रामक बीमारी से ग्रसित न हो। इस बाबत शासकीय सिविल सर्जन का प्रमाणपत्र पेश किया जाना होगा।

टेंडर न बुलाना गैरकानूनी : देवजी

पूर्व भाजपा विधायक देवजी भाई पटेल का कहना है कि डिलीवरी ब्वॉय की नियुक्ति के लिए टेंडर न बुलाया जाना पूरी तरह गैरकानूनी तथा असंवैधानिक है। श्री पटेल ने कहा है कि अब सरकार को ये भी साफ करना चाहिए कि जो लोग डिलीवरी ब्वॉय का काम कर रहे हैं, उन्हें वेतन, मेहनताना या मानदेय किस प्रकार दिया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा है कि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा था कि हम प्लेसमेंट एजेंसियों से काम नहीं लेंगे। इसकी जगह छत्तीसगढ़ के लोगों को ही नियमित नियुक्तियां दी जाएंगी, लेकिन सरकार में आने का बाद घोषणा भूल गए। ऐसा लगता है कि सरकार पूरी तरह से शराब माफिया के साथ मिलकर काम कर रही है।

नियुक्ति को लेकर विवाद, इनकार भी

सीएसएसीएल ने डिलीवरी ब्वॉय का काम देने के लिए कोई टेंडर नहीं निकाला है। नियुक्ति पर आपत्ति करने वालों का ये कहना है कि बिना टेंडर काम दिया गया है। इस आपत्ति को लेकर पूरे मामले में विवाद खड़ा हो गया है, लेकिन कार्पोरेशन से जुड़े अधिकारी दावा कर रहे हैं कि किसी प्रकार का विवाद नहीं है, शासकीय आदेश से नियुक्ति की गई है। आबकारी विभाग के विशेष सचिव एपी त्रिपाठी का कहना है कि नियुक्तियां शासन के आदेश के अनुसार की गई हैं। जो संस्थाएं आबकारी विभाग के लिए मैनपावर सप्लाई का काम कर रही हैं, उन्हें ही यह काम दिया गया है। वह भी रेट ऑफर के आधार पर। श्री त्रिपाठी ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा है कि सबकुछ शासन के निर्देशानुसार ही किया गया है।

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