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33 साल पहले 50-50 का फार्मूला अपना चुकी कांग्रेस

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद के दो दावेदारों को ढाई-ढाई साल बांटने की चर्चा के बीच ये बात उठी कि कांग्रेस ने क्या कभी इस तरह का कोई फार्मूला अपनाया है।

33 साल पहले 50-50 का फार्मूला अपना चुकी कांग्रेस

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद के दो दावेदारों को ढाई-ढाई साल बांटने की चर्चा के बीच ये बात उठी कि कांग्रेस ने क्या कभी इस तरह का कोई फार्मूला अपनाया है। कांग्रेसी राजनीति के जानकारों ने इतिहास के पन्ने पलटे, तो ये बात सामने आई कि अब से 33 साल पहले रायपुर नगर निगम में आजमाया गया था। निगम में मेयर पद के लिए दो नेताओं ने काम किया था।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार इस फार्मूले की पहल 1984-85 में बड़े दिलचस्प अंदाज में हुई थी। उस दौर में रायपुर नगर निगम में पं. रविशंकर शुक्ल की एक प्रतिमा स्थापित की गई थी। इस प्रतिमा के लोकार्पण के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह व अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह रायपुर आए थे।
दोनों नेताओं ने यहां आकर रायपुर का जायजा लिया। उस समय रायपुर में बनी सड़कों को देखकर काफी खुश हुए। यही नहीं, इन नेताओं ने अपने भाषण में भी रायपुर की सड़कों की खुलकर तारीफ की। रायपुर में उस समय सड़कें बनाने का काम रिकांडो कंपनी ने किया था।

बहरहाल, सड़कों पर जब बात हुई, तो कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जो सधी हुई राजनीति के माहिर खिलाड़ी थे, उन्होंने भी एक दांव खेल दिया। उन्होंने रायपुर नगर निगम की निर्वाचित सभा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाने की घोषणा कर दी। इस दौर में रायपुर के मेयर तरुण चटर्जी थे, उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था।
एक साल का एक्सटेंशन मिलने के बाद तत्कालीन नेता विद्याचरण शुक्ल ने फिर एक दांव चला, उन्होंने तरुण चटर्जी से कहा कि उन्होंने तो अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है, बाकी एक साल का कार्यकाल उन्होंने अपने एक अन्य समर्थक संतोष अग्रवाल को देने के लिए कहा, लेकिन तरुण इसके लिए आसानी से तैयार नहीं हो रहे थे।
तब ये फार्मूला निकाला गया कि एक साल के कार्यकाल को तरुण और संतोष अग्रवाल में 6-6 माह के लिए बांट दिया जाए। फार्मूले के तहत कांग्रेस में पहली बार फिफ्टी-फिफ्टी का बंटवारा हुआ था। अब यही स्थिति छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के लिए ढाई-ढाई साल का कार्यकाल बांटने पर विचार किया जा रहा है।
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