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दिल्ली में छत्तीसगढ़ के सीएम, कई दावेदारों ने भी डाला डेरा, नए विधायकों को नहीं मिलेगा मौका

छत्तीसगढ़ में मंत्री पद के दावेदार इतनी अधिक संख्या में हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद उलझ गए हैं। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि पहली बार चुनाव जीतकर आने वाले विधायकों को मंत्री बनने का अवसर फिलहाल नहीं मिलेगा।

दिल्ली में छत्तीसगढ़ के सीएम, कई दावेदारों ने भी डाला डेरा, नए विधायकों को नहीं मिलेगा मौका
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छत्तीसगढ़ में मंत्री पद के दावेदार इतनी अधिक संख्या में हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद उलझ गए हैं। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि पहली बार चुनाव जीतकर आने वाले विधायकों को मंत्री बनने का अवसर फिलहाल नहीं मिलेगा।

यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे। इस बीच दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री ने आला नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे तथा अहमद पटेल से भी मुलाकात की है।

इसके साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार शाम अपने नवनियुक्त सलाहकारों की टीम के साथ दिल्ली रवाना हुए थे। जाने से पहले उन्होंने कहा था कि जब दिल्ली से वापस आएंगे तो उनके हाथों में मंत्रियों की सूची होगी, लेकिन शुक्रवार शाम तक मिली जानकारी के अनुसार मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

अभी ये भी साफ नहीं है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हुई है या नहीं। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष की सहमति के बाद ही मंत्रियों के नाम तय होंगे। 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री के साथ टीएस सिंहदेव,व ताम्रध्वज साहू ने भी शपथ ली थी। राज्य में 90 विधानसभा सदस्यों के हिसाब से मुख्यमंत्री समेत 13 मंत्रियों का कोटा तय है।
अब सरकार को मंत्री परिषद में 10 मंत्रियों की नियुक्ति करना है, लेकिन छत्तीसगढ़ में 90 में से 68 सीटों पर कांग्रेस के विधायक जीतकर आए हैं। इनमें से कई विधायक बरसों के अनुभवी होने के साथ वरिष्ठ भी हैं। कई विधायक 4 से लेकर 8 बार तक विधानसभा में जीतकर पहुंचे हैं। कुछ वरिष्ठ अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार में तथा कुछ छत्तीसगढ़ की पहली कांग्रेस सरकार में मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं।
इनके अलावा कुछ युवा विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और भाजपा सरकार के बड़े-बड़े मंत्रियों को करारी शिकस्त दी है। ये लोग भी उम्मीद में हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी दिक्कत चयन को लेकर आ रही है। चयन के आधार में क्षेत्रीय व जातीय संतुलन से लेकर सभी वर्गों का समावेश करना भी शामिल है।

ये हैं संभावित दावेदार
छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतकर आने वाले नेताओं में भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू के अलावा मुख्यमंत्री के दावेदार रहे नेता डॉ. चरणदास महंत भी हैं। उनके बारे में माना जा रहा है कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
इधर मंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में वरिष्ठ नेता रामपुकार सिंह, रविंद्र चौबे, धनेंद्र साहू, सत्यनारायण शर्मा, मोहम्मद अकबर, डॉ. शिव डहरिया, अमितेष शुक्ल, अमरजीत भगत, खेलसाय सिंह, प्रेमसाय सिंह, मनोज मंडावी, अरूण वोरा, रूद्र गुरू, उमेश पटेल, अनिला भेंडिया, जय सिंह अग्रवाल आदि के नाम शामिल हैं।

यहां हो सकती है गुंजाइश
मंत्री पद के दावेदारों को पद नहीं दिए जाने की स्थिति में अन्य पदों से नवाज कर समायोजन किया जा सकता है। इनमें मंत्री पद के समकक्ष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद हो सकता है। भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार बताए जाते हैं। इसी तरह विधानसभा में उपाध्यक्ष पद पर किसी वरिष्ठ को जगह मिल सकती है।
इनके अलावा फिर निगम, मंडल, प्राधिकरण में स्थान दिया जा सकेगा। नई सरकार युवा विधायकों को सरकार की गतिविधियों में शामिल करने के लिए संसदीय सचिव बना सकती है, लेकिन इसके लिए भी पूर्ववर्ती सरकार ने जो तरीका अपनाया था, उससे अलग राह निकालनी होगी। कांग्रेस भाजपा राज में नियुक्त संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा चुकी है।
तमिलनाडु का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। बताया गया है कि इस सिलसिले में तमिलनाडु का उदाहरण दिया जा रहा है। वहां मंत्रियों की संख्या 38 है। हालांकि वहां सीटों की संख्या भी छत्तीसगढ़ से दोगुनी से अधिक है। कांग्रेस की दलील है कि तमिलनाडु से बड़ा भू-भाग छत्तीसगढ़ में है, इसलिए यहां संख्या अधिक होनी चाहिए। इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री का क्या रूख होगा, ये आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल कांग्रेस इस बात में उलझी है कि किसे मंत्री बनाएं किसे नहीं।

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