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सीएम भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री के रूप में प्रस्तुत किया राज्य का दूसरा बजट, पढ़िये बजट की खास बातें...

किसानों के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना: 5100 करोड़ रूपए का प्रावधान: किसानों को मिलेगी समर्थन मूल्य के अंतर की राशि

सीएम भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री के रूप में प्रस्तुत किया राज्य का दूसरा बजट, पढ़िये बजट की खास बातें...

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट प्रस्तुत किया। बघेल ने कहा कि यह संजीवनी बजट है। प्रदेश की अर्थ व्यवस्था के लिए, गांवों और किसानों के लिए, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक और आम जनता से लेकर हर वर्ग के लिए यह बजट संजीवनी बजट साबित होगा। बजट में विगत वर्ष के प्रावधानों को जारी रखा गया है और नये प्रावधान भी किए गए हैं। बजट मुख्य रूप से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़-स्वस्थ एवं सुपोषित नई युवा पीढ़ी के निर्माण की भावना के साथ सुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी एवं विस्तार तथा युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक एवं उत्पादक रूप में उपयोग कर उनकों राज्य के सशक्त संसाधन के रूप में विकसित करने पर केन्द्रित है। बजट में कोई भी नया कर प्रावधान नही किया गया है।

बजट की पूरी बातें...

1. माननीय अध्यक्ष महोदय, आज मैं सदन के समक्ष अपनी सरकार के दूसरे बजट का भाषण निम्न पंक्तियों के साथ शुरू करता हूँ:-

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्।।

2. आधुनिकता तथा परम्परा का साम्य हमारे विकास का बुनियादी दर्शन है। यही कारण है कि हमारे विकास के मॉडल मंे यदि हम राज्य के नदी-नालों, धरती-जंगल और तीज-त्यौहारों को शामिल करते हैं तो दूसरी ओर किसानों के खातों को अपडेट करने के लिये जियो-रिफरेंशिंग जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हैं।

3. हमारा विकास का मॉडल समावेशी भी है। विकास की योजनाओं का लाभ समाज के सबसे कमजोर लोगों तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। इसीलिये हम कर्ज से दबे किसानों और गरीबी के कारण कुपोषित महिलाओं और बच्चों के विकास की योजनाएं बनाते हैं।

4. चिन्ता का विषय है कि राज्य बनने के 19 वर्षाें के बाद भी हमारी महिलाओं और बच्चों के कुपोषण की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी स्लम में रहने वाले परिवारों को हमने कुपोषण और बीमारियों से प्रतिदिन लड़ते देखा है। इसीलिये कुपोषण को दूर करने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति सभी को जागरूक करने के लिये सुपोषण अभियान शुरू किया गया है।

5. प्राथमिक बीमारियों की जांच एवं उपचार के लिये अब हमारी स्वास्थ्य टीम के सदस्य साप्ताहिक हाट बाजारों एवं शहरी स्लम क्षेत्रों में स्वतः पहुंच कर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं और जरूरत के अनुसार परामर्श एवं उपचार किया जा रहा है। जब जनता का दर्द शासन अनुभव करने लगता है और जनता की जरूरत पर प्रशासन उसके पास पहुंचने लगता है तो समस्याओं का निदान आसान हो जाता है।

6. हमारी मंशा केवल कुपोषण एवं बीमारियों को कम करने तक सीमित नहीं है। हम तो इसकी जड़ में जाकर इसके मुख्य कारण गरीबी को भी कम करना चाहते हैं। इसके लिये अब तक 17 लाख 24 हजार किसानों का कृषि ऋण माफ किया जा चुका हैं। ऋण माफी से धान पंजीयन में किसानों की संख्या बढ़ी है। 2019-20 में अब तक 82 लाख 81 हजार मैट्रिक टन धान की रिकार्ड खरीदी हो चुकी है।

7. ग्राम सुराजी योजना के अंतर्गत नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी विकास के कार्याें मंे भी ग्रामीणों का बढ़-चढ़कर सहयोग प्राप्त हो रहा है। नरवा संरक्षण के कार्याें से भू-जल के स्तर में सुधार हो रहा है। गौठानों में पशुओं को चारा और स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा मिल रही है। घुरूवा के प्रोत्साहन से बायोगैस संयंत्र एवं जैविक खाद निर्माण के लिये लोग स्वतः सामने आ रहे हैं। बाड़ियों के पुनर्जीवन से ग्रामीणों की आय और पोषण में वृद्धि हुई है।

8. राज्य में गन्ने के रस से इथेनॉल बनाकर उसे शासकीय पेट्रोलियम कम्पनियों को विक्रय करने के लिये हमने सार्थक कदम उठाए हैं। इसी प्रकार धान से इथेनॉल निर्माण हेतु केन्द्र शासन से अनुमति प्राप्त करने के लिये निरंतर प्रयास जारी है। इन योजनाओं से किसानों को धान एवं गन्ने का अधिक मूल्य मिलेगा, युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा, उद्योग-व्यापार में वृद्धि होगी तथा पेट्रोलियम आयात पर राष्ट्र के विदेशी धन की भी बचत होगी।

9. गरीबी में कमी लाने के लिये स्थानीय आवश्यकता के आधार पर जिलेवार कार्ययोजना बनाने का काम शुरू किया गया है। अति पिछड़ा जिला दंतेवाड़ा में गरीबी के प्रतिशत को राष्ट्रीय गरीबी औसत 22 प्रतिशत के बराबर लाने की मुहिम शुरू हो चुकी है। इसके लिये जिले में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करने के साथ-साथ राज्य बजट से भी रूपये 20 करोड़ दिया जायेगा।

10. हमारा मानना है कि शासन-प्रशासन के प्रयास एवं जनता की सहभागिता से गरीबी के स्तर में प्रभावी कमी आएगी। सुपोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी शीघ्र ही हमारा राज्य राष्ट्रीय स्तर के मानव विकास सूचकांको के समकक्ष होगा।

आर्थिक स्थिति

11. अध्यक्ष महोदय, अब मैं राज्य की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा सदन के सामने प्रस्तुत करता हूँ। राज्य के विगत वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार स्थिर दर पर वर्ष 2018-19 में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद मंें 6.08 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान किया गया था किन्तु अद्यतन प्रस्तुत त्वरित अनुमान के अनुसार 7.06 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है। मंदी के राष्ट्रीय आंकडों के बीच यह वृद्धि राज्य के लिये एक सुखद संकेत है।

12. वर्ष 2019-20 में स्थिर भाव पर राज्य में कृषि क्षेत्र में 3.31 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र में 4.94 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है। इस प्रकार कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में राज्य की अनुमानित वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर पर इन क्षेत्रों में अनुमानित वृद्धि दर क्रमशः 2.8 एवं 2.5 प्रतिशत की तुलना में अधिक है।

13. प्रचलित भाव पर राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2018-19 में 3 लाख 04 हजार करोड़ से बढ़कर वर्ष 2019-20 में 3 लाख 29 हजार करोड़ होना अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.26 प्रतिशत अधिक है।

14. विगत वर्ष अनुमानित प्रति व्यक्ति आय 96 हजार 887 की तुलना में वर्ष 2019-20 में प्रति व्यक्ति आय 98 हजार 281 रूपये का अनुमान है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 6.35 प्रतिशत अधिक है।

15. वर्ष 2019-20 के केन्द्रीय बजट में राज्य के लिये अनुमानित केन्द्रीय करों में कमी आयी है। आगामी वर्ष में केन्द्र से प्राप्त होने वाली जीएसटी क्षतिपूर्ति में भी कमी संभावित है। इससे राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है किन्तु संतोष का विषय यह है कि राज्य सरकार की नीतियों एवं प्रयासों से राज्य के स्वयं के संसाधन 11 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।

गढ़बो नवा छत्तीसगढ़: नयी पीढ़ी का निर्माण

16. अध्यक्ष महोदय, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि यह बजट स्वस्थ और सुपोषित नयी युवा पीढ़ी के निर्माण को समर्पित है। नयी युवा पीढ़ी पर केन्द्रित इस बजट के कुछ महत्पूर्ण प्रावधानों की जानकारी देना

चाहता हूँ:-

16.1 राज्य के सभी परिवारों को सार्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सम्मिलित किया जा चुका है।

16.2 राज्य में 65 लाख 22 हजार राशन कार्डधारी हैं तथा लाभान्वित जनसंख्या 2 करोड़ 43 लाख है। इन राशन कार्डाें पर चावल प्रदाय के लिये 3 हजार 410 करोड़ का प्रावधान है।

16.3 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य इलाकों में प्रति परिवार 2 किलो चना वितरण के लिए 171 करोड़ का प्रावधान है। बस्तर संभाग में प्रति परिवार 2 किलो गुड़ वितरण के लिए 50 करोड़ का प्रावधान है।

16.4 कोण्डागांव में आयरन एवं विटामिन युक्त फोर्टिफाईड चावल वितरण की पायलट परियोजना शुरू करने के लिये 5 करोड़ 80 लाख का नवीन मद में प्रावधान है।

16.5 02 अक्टूबर 2019 से राज्य में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण एवं एनीमिया की पहचान एवं निदान का कार्य किया जा रहा है। चिन्हित हितग्राहियों के लिये गरम भोजन एवं अतिरिक्त पोषण आहार की व्यवस्था की जाती है। अबतक लगभग 4 लाख हितग्राही अभियान से लाभान्वित हो चुके हैं।

16.6 मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के प्रति हितग्राहियों की रूचि एवं सफलता को देखते हुए कुपोषण एवं एनीमिया को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके लिए 60 करोड़ का नवीन मद में प्रावधान है।

16.7 आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिये ऊंचाई, लंबाई एवं भार मापक यंत्रों की व्यवस्था की जाकर पोषण के स्तर में सुधार की सतत निगरानी की जायेगी। इसके लिए नवीन मद में 25 करोड़ का प्रावधान है।

16.8 विशेष पोषण आहार योजना में 766 करोड़, महतारी जतन योजना में 31 करोड़ का प्रावधान है।

16.9 महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में 2 अक्टूबर 2019 को राज्य में स्वास्थ्य की दो बड़ी योजनाओं के साथ कुल 5 स्वास्थ्य योजनाओं का शुभारंभ किया गया।

16.10 डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना में प्राथमिकता एवं अंत्योदय राशन कार्डधारी परिवारों को 5 लाख रूपये एवं सामान्य राशन कार्ड वाले परिवारों को 50 हजार तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी जायेगी। योजना में लगभग 65 लाख परिवारों को इलाज की पात्रता होगी। इसके लिए 550 करोड़ का प्रावधान है।

16.11 मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार पर 20 लाख तक के व्यय हेतु 50 करोड़ का प्रावधान है।

16.12 मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के हाट बाजार में आने वाले लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार की सुविधा देने के लिये 13 करोड़ का प्रावधान है। 5 माह की अल्प अवधि में ही 11 लाख से भी अधिक मरीजों को लाभ प्राप्त हो चुका है।

16.13 मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत 13 नगर निगमों के स्लम एरिया में निवासरत परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, जांच उपचार एवं दवाईयां उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। योजना के अंतर्गत अब तक 3 हजार 500 से भी अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाकर लगभग 17 लाख लोगों का इलाज किया जा चुका है।

16.14 हमारी सरकार द्वारा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत घर-घर जाकर अब तक 13 लाख 92 हजार लोगों के रक्त सैंपल की जांच की गई है। उल्लेखनीय यह है कि इसमें लक्षण रहित मलेरिया प्रभावित व्यक्तियों की भी पहचान की जाकर उपचार किया जा रहा है।

16.15 मलेरिया संक्रमण से रक्त की कमी हो जाती है जिससे एनीमिया की स्थिति निर्मित होती है। अतः मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान मलेरिया से मुक्ति के साथ-साथ एनीमिया, कुपोषण, शिशु एवं मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने में भी कारगर सिद्ध होगा।

16.16 राज्य सिकलसेल संस्थान में उच्च स्तरीय प्रयोगशाला एवं सभी जिला अस्पतालों में सिकलसेल यूनिट की स्थापना की जायेगी। इससे चिरायु योजना अंतर्गत स्कूलों में चिन्हित किये गए सिकलसेल से पीड़ित बच्चों तथा सिकलसेल के अन्य मरीजों को उच्च स्तरीय जांच, उपचार एवं परामर्श की निःशुल्क सुविधा मिल सकेगी।

16.17 एम.सी.आई. के मापदण्डों के अनुरूप चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सा उपकरण और स्किल लैब की स्थापना हेतु नवीन मद में 75 करोड़ का प्रावधान है।

16.18 युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानंद जी के रायपुर स्थित निवास स्थान डे-भवन को स्वामी विवेकानंद स्मृति संस्थान के रूप में विकसित किया जायेगा।

16.19 राज्य के विकास में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए राजीव युवा मितान क्लब योजना शुरू की जायेगी। योजना में 15 हजार युवा मितान क्लब गठित करने का लक्ष्य है। इसके लिए नवीन मद में 50 करोड़ का प्रावधान है।

16.20 युवाओं में अर्न्तनिहित बहुआयामी प्रतिभा को अवसर प्रदान करने के लिए इस वर्ष बहुस्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन किया गया। आयोजन में पहली बार छत्तीसगढ़ के पारम्परिक लोक गीत, नृत्य, खेल और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को शामिल किया गया। आयोजन की सफलता को देखते हुए प्रतिवर्ष युवा महोत्सव आयोजित किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए नवीन मद में 5 करोड़ का प्रावधान है।

16.21 आईआईटी, आईआईएम एवं एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लेने वाले राज्य के युवाओं के शिक्षण शुल्क का भार शासन द्वारा वहन किया जायेगा। ऐसे युवाओं की प्रतिभा का राज्य के विकास में उपयोग करने के लिये शासकीय, अर्द्धशासकीय संस्थानों में सीधे चयन की पात्रता दी जायेगी।

16.22 खेल संबंधी नीतिगत निर्णय, विभिन्न विभागों से समन्वय, खेल अधोसंरचनाओं का रख-रखाव तथा आवासीय खेल अकादमी के संचालन हेतु छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है।

16.23 मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत प्रतिभावान खिलाड़ियों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण, खेल-सामग्री एवं राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। इसके लिए नवीन मद में 10 करोड़ का प्रावधान है।

कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन

17. धान उत्पादन पर प्रोत्साहन एवं कृषि ऋणों की माफी से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी को जन अभियान के रूप में परिवर्तित करने का निर्णय ग्रामीणों के लिये वरदान सिद्ध हो रहा है। हमारी इन दूरदर्शी योजनाओं का परिणाम है कि जब सारा देश मंदी के दौर से गुजर रहा है, तब छत्तीसगढ़ में ऑटोमोबाईल सेक्टर में बिक्री में ग्रोथ दर्ज हो रही है।

18. केन्द्र सरकार द्वारा पिछली सरकार को बोनस वितरण के साथ समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की विशेष छूट दी गई थी किन्तु इस वर्ष केन्द्र से राज्य को यह छूट प्राप्त नही हो सकी। अन्नदाता को उनके श्रम का उचित लाभ देने के लिये राजीव गांधी किसान न्याय योजना प्रारंभ की जायेगी। योजना का लाभ वर्ष 2019-20 के लिये भी दिया जायेगा। इसके लिए 5 हजार 100 करोड़ का प्रावधान है।

19. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 366 करोड़, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 370 करोड़, एकीकृत बागवानी मिशन में 205 करोड़, जैविक खेती मिशन के लिए 20 करोड़, वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम में 200 करोड़ एवं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 110 करोड़ का प्रावधान है।

20. कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत 5 एच.पी. तक के कृषि पंपों के लिये निःशुल्क विद्युत प्रदाय का प्रावधान है। वर्तमान में योजना में 5 लाख 26 हजार कृषकों को 2 हजार 164 करोड़ की छूट प्राप्त हो रही है। इसके लिये 2 हजार 300 करोड़ का प्रावधान है।

21. गोठानों के संचालन हेतु गौठान समितियों को प्रतिमाह 10 हजार का अनुदान तथा पशुओं के चारे के लिये धान के पैरे की व्यवस्था की जायेगी। पैरा के रख-रखाव को सरल बनाने हेतु चौकोर बेलर क्रय करने के लिए नवीन मद में 6 करोड़ का प्रावधान है।

22. बेमेतरा, जशपुर, धमतरी एवं अर्जुन्दा, जिला बालोद में उद्यानिकी महाविद्यालय तथा लोरमी में कृषि महाविद्यालय की स्थापना के लिए नवीन मद में 5 करोड़ का प्रावधान है।

23. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना की जायेगी। इसके प्रारंभ होने से कृषि एवं सम्बद्ध उत्पादों का प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं पोस्ट हार्वेस्ट हानि को कम करने में कुशल मानव संसाधनों का सृजन होगा।

24. बेमेतरा एवं तखतपुर में डेयरी डिप्लोमा महाविद्यालय की स्थापना की जायेगी। इसके लिए 2 करोड़ का प्रावधान है।

25. मछली पालन के क्षेत्र में रोजगार की संभावना को देखते हुए युवाओं को डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अध्यापन हेतु ग्राम राजपुर (धमधा) में फिशरीज पॉलिटेक्निक की स्थापना की जायेगी।

26. 9 पशु औषधालयों को पशु चिकित्सालय में उन्नयन, 12 नवीन पशु औषधालय तथा 5 विकास खंडों में मोबाईल पशु चिकित्सा इकाई स्थापित की जायेगी।

सिंचाई

27. सृजित सिंचाई क्षमता के विरूद्ध वास्तविक सिंचित क्षेत्र 13 लाख हेक्टेयर को वर्ष 2028 तक 32 लाख हेक्टेयर तक किये जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिये हमारी सरकार विशेष प्रयास कर रही है।

28. बस्तर संभाग मंे बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना से 2 लाख 66 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में इस सुविधा से खेती से आय में वृद्धि होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि और खुशहाली से इस क्षेत्र की नक्सलवाद की समस्या में भी कमी आयेगी।

29. बाह्य सहायता प्राप्त परियोजना के अंतर्गत पैरी बांध एवं पैरी-महानदी इंटर लिंकिंग नहर परियोजना के लिए 20 करोड़, डांडपानी वृहत् जलाशय परियोजना, कुनकुरी के लिए 20 करोड़ एवं शेखरपुर वृहत् जलाशय, सरगुजा के लिए 20 करोड़ का नवीन मद में प्रावधान है।

30. नाबार्ड सहायित सिंचाई परियोजनाओं हेतु 697 करोड़, महानदी परियोजना हेतु 237 करोड़, लघु सिंचाई परियोजनाओं हेतु 610 करोड़ तथा एनीकट/स्टाप डैम निर्माण के लिए 173 करोड़ का प्रावधान है। कमाण्ड क्षेत्र में सिंचाई की पूर्ति हेतु भी 116 करोड़ का प्रावधान है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास

31. बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल एवं अधिक जनसंख्या वाले ग्राम पंचायतों की मांग पर विचार करते हुए राज्य में 704 नयी ग्राम पंचायतों का गठन किया गया है।

32. स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय आत्मनिर्भरता प्रदान करने की दृष्टि से राज्य के शुद्ध कर राजस्व में से 8 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत राशि देने संबंधी तृतीय राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा मान्य की गयी है।

33. 'नरवा गरूवा घुरूवा बारी' कार्यक्रम के तहत 912 नालों पर नरवा उपचार के लिये 20 हजार 810 काम स्वीकृत किये गए हैं। 1 हजार 900 गोठानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। घुरूवा का उपयोग कर 3 लाख 16 हजार मैट्रिक टन जैविक खाद का उत्पादन किया गया है। 1 लाख 50 हजार बाड़ियों को पुनर्जीवित करने का कार्य हुआ है। इन कार्याें के लिये महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अभिसरण से राशि की स्वीकृतियां दी गई हैं। योजना मंे 1 हजार 603 करोड़ का प्रावधान है।

34. शासकीय विभागों को स्व-सहायता समूहों को द्वारा उत्पादित सामग्री क्रय करने का निर्देश दिया गया है। मनरेगा मजदूरी, पेंशन एवं अन्य बैंकिंग सुविधा ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए बीसी सखी की व्यवस्था की जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में 400 करोड का प्रावधान है।

35. प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में अब तक 7 लाख 22 हजार आवास पूर्ण हो चुके हैं। आगामी वर्ष में इस हेतु 1 हजार 600 करोड़ का प्रावधान है।

36. ग्रामीण स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत छूटे हुए घरों में निजी शौचालय निर्माण के साथ-साथ ग्राम पंचायतों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य शुरू हो चुके हैं। गोबर.धन योजना अंतर्गत 1 हजार 176 बायोगैस संयंत्र के स्थापना का भी लक्ष्य है। इस हेतु 450 करोड़ का प्रावधान है।

37. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत निर्मित 6 हजार 959 सड़कों एवं 221 वृहद् पुलों के माध्यम से राज्य की 9 हजार 742 बसाहटों को सड़क मार्ग से जोड़ा जा चुका है। इस हेतु 2 हजार 70 करोड़ का प्रावधान है।

स्वच्छ पेयजल

38. नल कनेक्शन के माध्यम से पेय जल हेतु प्रारंभ की गई जल जीवन मिशन योजना के लिये 225 करोड़ का प्रावधान है।

39. ग्रामीण क्षेत्रों में पाईप द्वारा ग्रामीण जल प्रदाय योजना के लिये 185 करोड़ तथा नलकूप खनन के लिये 70 करोड़ का प्रावधान है।

40. नगरीय जल प्रदाय योजनाओं के लिये 124 करोड़ का प्रावधान है।

41. राज्य में निर्मित हो रहे गोठानों में जल प्रदाय हेतु नलकूप खनन के लिये 5 करोड़ का प्रावधान है।

शैक्षणिक विकास-स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा

42. राज्य के 1 लाख 31 हजार शिक्षाकर्मियों का संविलियन हो चुका है। शेष बचे 16 हजार शिक्षाकर्मियों में से 2 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके शिक्षाकर्मियों का 1 जुलाई 2020 से संविलियन किया जायेगा।

43. महान संत गुरू घासीदास की जन्मस्थली ग्राम गिरौदपुरी में गुरूकुल विद्यालय की स्थापना की जायेगी।

44. दूरस्थ आदिवासी अंचल के ग्राम तोंगपाल, जिला सुकमा एवं कुआकोंडा, जिला दंतेवाड़ा में छात्रावास की सुविधा सहित नवीन महाविद्यालय प्रारंभ किया जायेगा। सुुकमा, कोण्डागांव, नारायणपुर, बीजापुर एवं तखतपुर में कन्या महाविद्यालय खोले जाएंगे।

45. महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ आगमन की स्मृति में ग्राम कंडेल, जिला धमतरी में महाविद्यालय प्रारंभ किया जायेगा।

46. स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन की पूर्ति हेतु औद्योगिक क्षेत्र सिरगिट्टी, नगरनार एवं तिल्दा में नवीन आई.टी.आई. खोले जाएंगे।

47. दंतेवाड़ा में मल्टी स्किल सेंटर की स्थापना के लिए 3 करोड़ 85 लाख का प्रावधान है।

48. मुख्यमंत्री पॉलीटेक्निक गुणवत्ता विकास योजना के तहत 9 पॉलीटेक्निक कॉलेज के उन्नयन हेतु 5 करोड़ का प्रावधान है।

49. राज्य के 3 इंजीनियरिंग कॉलेज एवं 5 पॉलीटेक्निक कॉलेजों में नव विकसित तकनीकों के अध्ययन एवं शोध हेतु इंटरनेट ऑफ थिंग्स एवं रोबोटिक्स की प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।

श्रम एवं समाज कल्याण

50. निराश्रितों, बुजुर्गाें, विधवा महिलाओं एवं निःशक्त व्यक्तियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना कल्याणकारी राज्य का प्राथमिक दायित्व है।

51. इन दायित्वों की निर्बाध पूर्ति के लिये सामाजिक सुरक्षा और कल्याण

मद में 352 करोड़, वृद्धावस्था पेंशन योजना में 185 करोड़ और मुख्यमंत्री पेंशन योजना मेें 150 करोड़ का प्रावधान है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना में 68 करोड़ तथा सुुखद सहारा योजना में 100 करोड़ का प्रावधान है।

52. दिव्यांगजनों के लिये निःशक्तजन पुनर्वास केन्द्र, मादक द्रव्यों एवं पदार्थाें की रोकथाम एवं नशामुक्ति केन्द्र का संचालन तथा तृतीय लिंग समुदाय से संबंधित योजनाओं हेतु 5 करोड़ 30 लाख का प्रावधान है।

53. असंगठित श्रमिक सुरक्षा एवं कल्याण मण्डल हेतु 38 करोड़ 50 लाख का प्रावधान है।

54. ठेका मजदूर, घरेलू कामकाजी महिला एवं हम्माल कल्याण मण्डल हेतु 15 करोड़ का प्रावधान है।

औद्योगिक विकास

55. नई औद्योगिक नीति 2019 का मुख्य उद्देश्य समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता एवं परिपक्व अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।

56. नई औद्योगिक नीति में नवीन तकनीकों पर आधारित रोबोटिक्स, एयरक्राफ्ट रिपेयरिंग, धान से जैव ईंधन अथवा इथेनॉल निर्माण, सब्जी एवं फल प्रसंस्करण तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण/मरम्मत में लगने वाले उपकरणों के निर्माण से संबंधित उद्योगों को उच्च प्राथमिकता दी गई है।

57. उद्योगों के लिये आबंटित किये जाने वाले भू-खण्ड की दरों में 30 प्रतिशत तथा लीज रेन्ट की दर में 33 प्रतिशत कमी की गई है।

58. राज्य में उत्पादित होने वाले हर्बल, वनौषधि तथा लघु वनोपज आधारित उद्योगों को अधिकतम ब्याज अनुदान, नेट एसजीएसटी क्षतिपूर्ति, स्टाम्प ड्यूटी छूट एवं विद्युत शुल्क में छूट देने की व्यवस्था है।

59. स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये शासकीय खरीदी सीएसआईडीसी के पोर्टल ई-मानक पर पंजीकृत स्थानीय इकाईयों से किया जाना अनिवार्य किया गया है।

60. राज्य के हस्तशिल्पियों, बुनकरों, मिट्टी तथा कांसा धातुओं के लघु उद्यमियों/कलाकारों के उत्पादों को भी ई-मानक के द्वारा विपणन सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।

61. अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्तर क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये 20 एकड़ तक के निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।

62. राज्य में उत्पादित सब्जी, फल एवं मोटे अनाजों को प्रसंस्कृत कर मूल्य संवर्धन वाले उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए नये फूड पार्क की स्थापना हेतु नवीन मद में 50 करोड़ का प्रावधान है।

63. नये औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 15 करोड़ एवं जेम ज्वेलरी पार्क की स्थापना के लिए 1 करोड़ का प्रावधान है।

64. उद्योगों की स्थापना पर दी जाने वाली लागत पूंजी अनुदान के लिये 100 करोड़ एवं ब्याज अनुदान के लिये 39 करोड़ का प्रावधान है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास

65. 13 नगर निगम क्षेत्र के निवासियों के लिये मुख्यमंत्री मितान योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके तहत नगरीय प्रशासन, राजस्व, श्रम एवं स्वास्थ्य आदि विभिन्न विभागों की 100 से अधिक सेवाओं का लाभ नागरिकों को उनके घर पर मितान के माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना है। इस हेतु 10 करोड़ का प्रावधान है।

66. शहरी नागरिकों की बुनियादी समस्याओं का निराकरण वार्ड स्तर पर करने के लिये मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय योजना प्रारंभ की गई है। वार्ड कार्यालयों के द्वारा सड़क एवं नालियों का निर्माण एवं साफ सफाई, उद्यानों एवं सामुदायिक भवनांे का रख-रखाव तथा पेयजल से संबंधित समस्याओं का निराकरण किया जा सकेगा। साथ ही, भवन अनुज्ञा, दुकान पंजीयन, विद्युत अनापत्ति प्रमाण पत्र संबंधी आवेदन पत्र एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त हो सकेगी। इस हेतु 5 करोड़ का प्रावधान है।

67. साप्ताहिक हाट-बाजार एवं पौनी-पसारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अभिन्न अंग है। बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप पौनी-पसारी के परम्परागत व्यवसाय एवं व्यवसायी धीरे-धीरे खतम हो रहे हैं। इसके लिये सभी 166 नगरीय निकायों में पौनी-पसारी योजना प्रारंभ की गई है। प्रति इकाई 30 लाख की लागत से 255 पौनी-पसारी बाजारों का निर्माण किया जायेगा। इसके लिए 30 करोड़ का प्रावधान है।

68. नगरीय क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के लिए 489 करोड़, स्मार्ट सिटी योजना के लिए 396 करोड़, अमृत मिशन के लिए 300 करोड़ एवं राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के लिए 50 करोड़ का प्रावधान है।

वन संपदा

69. राज्य में वन तथा वनेत्तर क्षेत्र में वन आवरण वृद्धि करते हुए पर्यावरण एवं वनोपज आधारित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

70. प्राकृतिक पुनरोत्पादन की कार्य योजना के आधार पर वनों के विदोहन की अनुमति प्राप्त होती है। इस योजना में 200 करोड़ का प्रावधान है। इससे 60 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन होगा तथा राज्य की सालाना आय में 400 करोड़ की वृद्धि संभावित है।

71. लघु वनोपज के प्रसंस्करण हेतु 50 करोड़ का प्रावधान है। इसके अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज संग्रहण तथा हाट-बाजार उन्नयन एवं गोदाम निर्माण के कार्य किये जाएंगे। इसका लाभ स्थानीय ग्रामीणों को प्राप्त होगा।

72. राज्य में उद्योग तथा व्यापार के लिये प्रतिस्पर्धात्मक दर पर काष्ठ की पर्याप्त उपलब्धता के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके तहत किसानों की निजी भूमि पर वृक्ष लगाने, काटने तथा परिवहन की प्रक्रिया को सरल करने का भी प्रयास किया गया है।

73. छत्तीसगढ़ अभिवहन वनोपज में संशोधन कर वृक्षों की कुछ प्रजातियों को चयनित 9 जिलों में तथा कुछ प्रजातियों को समस्त जिलों में अभिवहन पास से मुक्त किया गया है।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गाें का कल्याण

74. अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों के लिये 61 नये छात्रावास खोलना प्रस्तावित है। नये छात्रावास खोलने सहित कुल छात्रावास/आश्रमों के संचालन के लिये 378 करोड़ का प्रावधान है।

75. नवीन मद में 100 भवन विहीन छात्रावास/आश्रमों के भवन निर्माण सहित कुल छात्रावास/आश्रम निर्माण कार्याें के लिये विवेकानंद गुरूकुल उन्नयन योजना में 303 करोड़ का प्रावधान है।

76. जनजाति सलाहकार परिषद् के कामकाज के लिये पृथक सचिवालय की स्थापना का निर्णय लिया गया है।

77. बहुरंगी और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को नजदीक से जानने एवं समझने का सशक्त मंच देने के उद्देश्य से देश के सबसे बड़े आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन 27 से 29 दिसंबर 2019 तक राजधानी रायपुर में किया गया। इसमें आसाम से अंडमान तक और अरूणाचल से गुजरात तक के 24 राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों के आदिवासियों ने भाग लिया। साथ ही, थाईलैण्ड, युगांडा, बेलारूस, मालदीव और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के भी आदिवासी कलाकारों की प्रतिभागिता रही। आयोजन की सफलता को देखते हुए आदिवासी अस्मिता एवं संस्कृति के उत्कर्ष के लिये प्रतिवर्ष राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जायेगा।

78. राज्य में निवासरत अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति के अनुरूप विकास योजनाओं में लाभ दिलाने के लिये समुचित आंकड़े तैयार करने हेतु इन वर्गाें का सर्वेक्षण करने के लिये सेवानिवृत्त जिला एवं सेशन जज की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया है।

79. नक्सल प्रभावित जिलों के भ्रमण में मैंने देखा है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी कमोबेश आदिवासी परिवारों के समान ही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के दौरान निःशुल्क आवासीय सुविधा के लिये 10 पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों की स्थापना की जायेगी।

80. सरगुजा एवं बस्तर संभाग एवं कोरबा जिले के लिये जिला संवर्ग के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिये विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन किया गया है।

शिल्प, कला, संस्कृति एवं पर्यटन

81. छत्तीसगढ़ी कृषि एवं हस्तशिल्प उत्पादों के लिये पहली बार अंतर्राष्ट्रीय क्रेता विक्रेता सम्मेलन के आयोजन ने राज्य के हजारों परिवारों के लिये आजीविका के नये रास्ते खोल दिये हैं।

82. छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की पहचान का केन्द्र बन चुके रायपुर के गढ़-कलेवा की अन्य 27 जिला मुख्यालयों में स्थापना के लिये स्व-सहायता समूहों को 10 लाख का रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराया जायेगा।

83. मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना शुरू की जायेगी। इसके अंतर्गत परंपरागत नृत्य, गायन, रंगमंच एवं लेखन कार्य के लिये समर्पित लोक कलाकारों एवं उनके आश्रितों को पेंशन, छात्रवृत्ति, वाद्य यंत्र क्रय तथा लोक महोत्सव के आयोजन हेतु आर्थिक सहायता दी जायेगी। इस हेतु 25 करोड़ का प्रावधान है।

84. राज्य की समृद्ध विरासत को संजोने-संवारने तथा पुरालेख सामग्रियों के प्रदर्शन हेतु नवा रायपुर में अभिलेखागार एवं संग्रहालय का निर्माण तथा जगदलपुर एवं बिलासपुर के संग्रहालयों का उन्नयन किया जायेगा।

85. राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये विभाग के बजट में 75 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इस वर्ष 103 करोड़ 50 लाख का प्रावधान किया गया है।

86. राज्य के पर्यटन केन्द्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित करने के लिये निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से पर्यटन प्रोत्साहन एवं अनुदान योजना तैयार की गई है।

87. राम वन गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत वनवास के दौरान

श्रीराम.जानकी द्वारा उपयोग किये गये मार्ग पर स्थित 9 पर्यटन केन्द्रों पर अधोसंरचना विकास एवं निर्माण कार्याें के लिये 10 करोड़ का प्रावधान है।

राजस्व प्रशासन

88. राज्य के भू-नक्शों का जियो-रिफरेंशिंग कराने का न

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