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चिटफंड कंपनियों ने छोड़े सिर्फ 400 करोड़, डकारे 100 करोड़, रकम वापसी पर संकट

राज्यभर में चिटफंड कपनियों ने अवैध तरीके से कई वर्षों से फर्जीवाड़े का कारोबार कर पैसे दोगुना करने, जमीन और मकान देने समेत अन्य तरीकाें से डेढ़ दशक में करीब 1100 करोड़ रुपए की ठगी की और रकम समेट कर फरार हो गए, लेकिन उन्होंने राज्य में निवेश के पैसे से अर्जित संपत्ति इतनी कम छोड़ी है कि निवेशकों की रकम वापसी की राह कठिन हो गई है।

चिटफंड कंपनियों ने छोड़े सिर्फ 400 करोड़, डकारे 100 करोड़, रकम वापसी पर संकट

राज्यभर में चिटफंड कपनियों ने अवैध तरीके से कई वर्षों से फर्जीवाड़े का कारोबार कर पैसे दोगुना करने, जमीन और मकान देने समेत अन्य तरीकाें से डेढ़ दशक में करीब 1100 करोड़ रुपए की ठगी की और रकम समेट कर फरार हो गए, लेकिन उन्होंने राज्य में निवेश के पैसे से अर्जित संपत्ति इतनी कम छोड़ी है कि निवेशकों की रकम वापसी की राह कठिन हो गई है।

160 चिटफंड कंपनियों ने राज्य में सिर्फ 400 करोड़ रुपए की संपत्ति ही छोड़ी है। इनमें भी अधिकांश जमीनें और कमर्शियल भवनों में दफ्तर हैं। सभी संपत्तियाें को पुलिस ने जप्त किया है, लेकिन मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इन्हें नीलाम करने में इतने पचड़े हैं कि सालों गुजर जाने पर भी नीलामी का रास्ता साफ नहीं हुआ। ऐसी दशा में निवेशकों के पैसे वापसी पर संकट खड़ा हो गया है।

दरअसल चिटफंड कंपनियों द्वारा निवेशकों को लुभाने के लिए कई जगहों पर जमीन खरीदकर प्लाटिंग की गई। साथ ही दफ्तर खोलने बहुमंजिला अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदे। निवेशकों के पैसे समेट कर फरार होने के बाद सिर्फ जमीनें और फ्लैट ही पुलिस और प्रशासन के हाथ लगे हैं। इनकी कीमत भी ठगी की रकम की आधे से भी कम है। इन कंपनियों की संपत्ति नीलाम भी की जाती है तो निवेेशकों की रकम वापसी के लिए 700 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।

इतनी छोड़ गए संपत्ति
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राजधानी समेत राज्यभर में चिटफंड कंपनियों के संचालक करीब 300 से 400 करोड़ रुपए की संपत्ति छोड़ गए हैं। इनमें सिर्फ रायुपर में करोड़ों रुपए की संपत्ति को नीलाम करने साल 2016 से प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक उनके नीलाम करने पर फैसला नहीं हो सका। इसी तरह बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी समेत राज्यभर में सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति का ब्योरा पुलिस के पास है।

लाखों ने अरबों किया निवेश
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक राज्यभर मेें 160 चिटफंड कंपनियां अवैध रुप से छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित रही थीं। इनमें करीब 2 लाख 70 हजार निवेशकों ने 11 अरब 5 करोड़ रुपए निवेश किया, लेकिन एक भी निवेशक को कंपनी की तरफ से पैसे वापस नहीं किए गए हैं।
कुछ मामले में कोर्ट से स्टे
जानकारी के मुताबिक अधिकांश चिटफंड कंपनियों की छत्तीसगढ़ के अलावा भी दूसरे राज्यों में संपत्ति है। उनकाे वहां की पुलिस ने जप्त किया है और कोर्ट में मामले लंबित हैं। ऐसी संपत्ति को नीलाम करना कठिन होता है। यही नहीं, दर्जनभर चिटफंड कंपनियों की संपत्ति पर हाईकोर्ट से रोक लगी हुई है। वहां से आदेश मिलने के बाद भी उनकी नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
चिटफंड कंपनी की इतनी संपत्ति
- निर्मल इंफ्रा होम कार्पाेरेशन लिमिटेड भोपाल का डगनिया में 35 लाख का मकान और खरोरा में .834 हेक्टेयर जमीन कीमत 25 लाख
- आरोग्य धनवर्षा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मंदिर हसौद के उमरिया गांव में 5 डिसमिल की कीमत करीब 6 लाख
- देव्यानी प्रापर्टी प्राइवेट लिमिटेड की अमलीडीह में 3 जगहों की .357 हेक्टेअर जमीन की कीमत करीब 18 करोड़
- बीएन गोल्ड रियल स्टेट एलाइड लिमिटेड की एमएम शॉपिंग माॅल में 244 स्क्वॉयर फीट व वार्ड 2 में 4326 स्क्वायर फीट जमीन
- गोल्ड की इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ओर डेसीड बेनीफिट फंड लिमिटेड की 11 करोड़ रुपए की प्रापर्टी

ब्योरा लिया है
चिटफंड कंपनियों की छोड़ी संपत्ति का ब्योरा इकट्ठा किया गया है। उसकी कीमतों का अध्ययन किया जा रहा है।
- हेमकृष्ण राठौर, आईजी, सीआईडी
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