Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

नंगे पांव ध्वाजारोहण करने निकला देश का भविष्य, सरकारी आश्रमों के 80 फीसदी बच्चों के पांव में नहीं हैं जूते

आश्रम छात्रावासों में बच्चों की मूलभूत सुविधाओं के लिए सालाना करोड़ो रूपये खर्च किये जाते हैं मगर धरातल पर बच्चों को इसका लाभ नही मिलता। सरकारी दावों को ठेंगा दिखाती दोरनापाल के सरकारी आश्रमों में पढ़ रहे बच्चों की नंगे पांव तिरंगा लेकर जाते हुए तस्वीर सच्चाई बयां कर रही है।

नंगे पांव ध्वाजारोहण करने निकला देश का भविष्य, सरकारी आश्रमों के 80 फीसदी बच्चों के पांव में नहीं हैं जूते

सुकमा। आदिवासी क्षेत्रों में सरकार ने बच्चों के लिए स्कूल तो खोल दिए लेकिन क्या सिर्फ स्कूल खोलना ही काफी है। सरकार कितने ही दावे क्यों न करे लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी कई सरकारी स्कूलों के बच्चे मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। विडम्बना है कि आश्रम छात्रावासों में बच्चों की मूलभूत सुविधाओं के लिए सालाना करोड़ो रूपये खर्च किये जाते हैं मगर धरातल पर बच्चों को इसका लाभ नही मिलता। सरकारी दावों को ठेंगा दिखाती दोरनापाल के सरकारी आश्रमों में पढ़ रहे बच्चों की नंगे पांव तिरंगा लेकर जाते हुए तस्वीर सच्चाई बयां कर रही है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दोरनापाल सरकारी आश्रम के यह बच्चे तिरंगा हाथ में लेकर पथरीले रास्तों से होते नारा लगाते हुए बिना चप्पल या जुते पहने दोरनापाल थाना परिसर की ओर ध्वजारोहण करने जा रहे थे। 80 प्रतिशत से ज्यादा दोरनापाल में बने आश्रमों के बच्चों के पांव में जुते नहीं थे। गौरतलब है कि गरीब आदिवासी अपने बच्चों को इस विश्वास के साथ आश्रमो में भेजते हैं कि उनके बच्चों को वहां पूरी सुविधाएं मिलेंगी। मगर आश्रमों में तो पहनने के लिए जुते तक नसीब नहीं हो रहे।

Share it
Top