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सीएम भूपेश बघेल की पहल, 1707 किसानों की 1764 हेक्टेयर जमीन होगी वापस

लोहंडीगुड़ा ब्लाक के 9 तथा तोकापाल ब्लाक के 1 कुल 10 गांव के टाटा प्रभावित 1707 किसानों की 1764 हेक्टेयर जमीन वापस होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार की सुबह चित्रकोट विधायक दीपक बैज से चर्चा के कुछ घंटे बाद दोपहर में जमीन वापसी के आदेश दे दिये।

सीएम भूपेश बघेल की पहल, 1707 किसानों की 1764 हेक्टेयर जमीन होगी वापस

लोहंडीगुड़ा ब्लाक के 9 तथा तोकापाल ब्लाक के 1 कुल 10 गांव के टाटा प्रभावित 1707 किसानों की 1764 हेक्टेयर जमीन वापस होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार की सुबह चित्रकोट विधायक दीपक बैज से चर्चा के कुछ घंटे बाद दोपहर में जमीन वापसी के आदेश दे दिये।

गौरतलब है कि 2008 में टाटा समूह ने 10 गांव की जमीन स्टील प्लांट के लिए अधिग्रहित की थी, जिसमें लोहंडीगुड़ा ब्लाक के 9 गांव छिंदगांव, कुम्हली, धुरागांव, बेलीयापाल, बड़ांजी, दाबपाल, बड़ेपरोदा, बेलर तथा टाकरागुड़ा एवं तोकापाल ब्लाक का ग्राम सिरिसगुड़ा शामिल हैं।
स्टील प्लांट नहीं लगने से लगातार प्रभावित किसान जमीन वापसी के लिए शासन से गुहार लगा रहे थे। चुनाव के पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तथा तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने जनसभा में यह घोषणा की थी कि नियम के अनुसार जिस प्रयोजन के लिए जमीन ली गई थी, वह यदि 5 साल तक उपयोग में नहीं लाया जाता है तो नियमानुसार वह जमीन किसानों को वापिस हो जाती है।
उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस सरकार बनते ही टाटा प्रभावित किसानों को जमीन वापस कर दी जायेगी। क्षेत्रीय विधायक दीपक बैज ने हरिभूमि से चर्चा में कहा कि 10 साल से अपनी जमीन से बेदखल हो चुके किसानों को शासन की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा था।
न वे कृषि लोन ले पा रहे थे न ही अपनी धान बेच पा रहे थे। मुख्यमंत्री बनने के 6 वें दिन में भूपेश बघेल ने आदेश निकालकर क्षेत्र की जनता को बड़ी राहत दी है। अब वे जमीन के मालिक हो जायेंगे तथा उन्हें हर तरह की शासकीय योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

शासन के आदेशानुसार जमीन वापसी की कार्रवाई की जायेगी

10 गांव के प्रभावित 1707 किसानों की 1764 हेक्टेयर जमीन वापस होगी। टाटा के द्वारा मुआवजा के रूप में 69 करोड़ रूपए प्रभावित किसानों को दिया जाना था। जिसमें से 1165 किसानों ने 42 करोड़ मुआवजा प्राप्त कर लिया है। मुआवजा रािश वापिस किसानों से ली जायेगी या नहीं इस संबंध में अभी मैं कुछ नहीं कह सकता। शासन के निर्णय का पालन होगा। टाटा के चले जाने से जमीन उद्योग विभाग के पास है।
(डॉ. अय्याज फकीर भाई तम्बोली, कलेक्टर बस्तर)

रमन सरकार की नियत साफ नहीं थी

10 साल से जमीन देकर प्रभावित किसान भटक रहे थे। शासन-प्रशासन के सामने अनेक बार गुहार के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। सड़क से लेकर सदन तक हमने जमीन वापसी के लिए लड़ाई लड़ी। किसान के हक में मुख्यमंत्री ने फैसला लेकर राहत दी है। क्षेत्रीय जनता की ओर से मुख्यमंत्री का आभार मानते हैं। जल्द ही क्षेत्र में मुख्यमंत्री का सम्मान किया जायेगा। मुआवजा टाटा ने दिया है आैर वह प्लांट बिना लगाये वापस हो गया। इसलिए मुआवजा लेने वाले किसानों से राशि वापस नहीं लेने के लिए मुख्यमंत्री से गुजारिश करेंगे।
(दीपक बैज, विधायक चित्रकोट)
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