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CAG रिपोर्ट ने खोली पिछली सरकार की पोल, 3 अलग-अलग सेक्टर्स में हुआ करोड़ों का गोलमाल

सीएजी रिपोर्ट से छत्तीसगढ़ में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। पिछली सरकार ने सोशल सेक्टर सहित तीन अलग-अलग सेक्टर्स में करोड़ों रुपए की गड़बड़ियां की है।

CAG रिपोर्ट ने खोली पिछली सरकार की पोल, 3 अलग-अलग सेक्टर्स में हुआ करोड़ों का गोलमाल

अंकिता शर्मा, रायपुर. सीएजी रिपोर्ट से छत्तीसगढ़ में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। पिछली सरकार ने सोशल सेक्टर सहित तीन अलग-अलग सेक्टर्स में करोड़ों रुपए की गड़बड़ियां की है। वर्तमान में तीन अलग-अलग सेक्टरों में रिपोर्ट पेश की गई है। जारी किए रिपोर्ट ने भाजपा सरकार के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने लाकर रख दी है।

महालेखाकर विजय कुमार मोहंती ने सीएजी की रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि रिपोर्ट में 21 ऐसे स्कूलों में गड़बड़ियों का खुलासा हुआ, जो अस्तित्व में ही नहीं था। इन स्कूलों में एसटी/एससी के स्कॉलरशिप लिए जा रहे थे। गौर करने वाली बात यह है कि इस कारनामे में सरकारी स्कूल के 6 ओर प्राइवेट स्कूल के 13 प्रिंसिपल शामिल हैं। इस मामले में एक करोड़ 40 लाख रुपए की रिकवरी का आदेश दिए गए हैं साथ ही 20 अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज की गई है। वहीं, रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले का खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने ट्रांसपोर्ट एलाउंस के नाम से तय सीमा से अधिक राशि का आहरण किया है।
भाजपा सरकार ने ई टेंडर में 4601 करोड़ के 74 कॉमन कम्प्यूटर से गलत तरीके से बिडिंग किया था। जिस पर कार्रवाई की गई और टेंडर में बड़े पैमाने पर घोटाले का भी खुलासा हुआ है। जांच में सीएजी ने पाया है कि जिन कंप्युटरों से टेंडर को जारी किया गया था, उसी कप्युटर आईपी से टेंडर भरे गए हैं। मतलब आशंकाएं है कि टेंडर अधिकारियों ने भरे हैं। 4600 रुपये के टेंडर में 74 ऐसे कप्यूटर का इस्तेमाल टेंडर भरने के लिए किया गया, जिससे टेंडर निकाले गए थे। 17 विभागों ने चिप्स संस्था के ज़रिए 1921 निविदाओं के 4601 करोड़ की निविदाएं भरी थी। 79 वेंडर्स ने दो दो पेनकार्ड का उपयोग किया गया, जिसको वेरिफाई नहीं किया गया। वहीं, ज़्यादातर वेंडर्स के कॉमन ईमेल आईडी से निविदा भरी गई है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में CAG ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि राज्य में 90 प्रतिशत स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की कमी है। अस्पतालों में दवाइयों का 40 से 76 प्रतिशत तक की कमी है। वहीं 36 से 71 प्रतिशत प्रयोगशालाओं की कमी है, जिससे लोगो को सुविधाएं नहीं मिल रही है। चौकाने की बात ये है कि 186 हॉस्पिटल्स 5 साल से अधूरे हैं, जिनमें 14 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।
सबसे बड़ी परेशानी दवाइयों की कमी है, सही समय पर दवाइयों की खरीदी और वितरण नही होने के कारण परेशानी आ रही है। डिलेवरी के लिए आने वाली महिलाओं को 24 घंटे अस्पताल में होना चाहिए। लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण वे नहीं रहती, जिसके कारण शिशु औऱ मातृ मृत्यु दर में बढ़ोतरी हुई है।
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