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व्हीलचेयर बनी चार साल की दिव्यांग माही का सहारा, मां की चिंता हुई दूर

चार साल की माही को व्हीलचेयर क्या मिला उसकी जिंदगी आसान हो गई। माही की मां की चिंता भी कुछ कम हो गई। बिलासपुर जिले के मरवाही ब्लाक के ग्राम अंडी निवासी माही के पिता की मौत सड़क हादसे में हो गई थी।

व्हीलचेयर बनी चार साल की दिव्यांग माही का सहारा, मां की चिंता हुई दूर

चार साल की माही को व्हीलचेयर क्या मिला उसकी जिंदगी आसान हो गई। माही की मां की चिंता भी कुछ कम हो गई। बिलासपुर जिले के मरवाही ब्लाक के ग्राम अंडी निवासी माही के पिता की मौत सड़क हादसे में हो गई थी। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। जीवन और कठिन हो गया था। माही चल भी नहीं पा रही थी लेकिन समाज कल्याण विभाग से मिले व्हीलचेयर ने काफी हद तक परेशानियों को कम कर दिया है।

समाज के कमजोर वर्गों का शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक उत्थान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाना ही समाज कल्याण का मुख्य उद्देश्य है। मरवाही ब्लाॅक के ग्राम अण्डी निवासी चार साल की माही ने कभी अपने पिता को नहीं देखा था। माही की मां श्रीमती दुर्गा गुप्ता बताती हैं कि माही जब गर्भ में थी तभी उनके पति की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति के गुजर जाने के बाद तो जैसे सबने मुंह ही मोड़ लिया।
दोस्त, रिश्तेदार किसी ने मदद नहीं की। कई जगह सहायता मांगने के बाद भी लोगों ने अपने हाथ खींच लिए। श्रीमती दुर्गा भावुक होकर बताती हैं कि जब माही का जन्म हुआ तब उनको खुशी से ज्यादा चिंता होने लगी। क्योंकि डाॅक्टर ने उन्हें बताया कि माही शारीरिक रूप से दिव्यांग है। फिर भी दुर्गा ने हिम्मत नहीं हारी। ऐसे में समाज कल्याण विभाग उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।

घरवालों पर बोझ न बने इसलिए खोली किराना दुकान

मरवाही ब्लाॅक के ग्राम अण्डी निवासी श्रीमती दुर्गा गुप्ता के अनुसार पति की मौत के बाद वे अपने मायके आकर रहने लगी। मायके में किसी पर बोझ न बनें इसलिये अपने पैरों पर खड़े होने की सोची। बची खुची जमां पूंजी से छोटी सी किराने की दुकान खोली। इससे थोड़ी-बहुत आमदनी होने लगी। आय तो हुई लेकिन घर चलाने के लिये यह काफी नहीं था। श्रीमती दुर्गा गुप्ता बताती हं कि किराना दुकान के साथ घर पर ही सिलाई करने लगी।

दिव्यांगों के लिए बेहतर है योजना

श्रीमती दुर्गा गुप्ता के बताया कि इसी बीच जब उन्हें पता चला कि समाज कल्याण विभाग से कुछ सहायता मिल सकती है तब उन्होंने वहां माही का पंजीयन कराया। जल्द ही विभाग की तरफ से माही को निशुल्क व्हीलचेयर उपलब्ध करा दी गई है। श्रीमती दुर्गा गुप्ता राज्य शासन को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि विभाग की योजना से उनको काफी लाभ हुआ है।
क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे व्हीलचेयर खरीद पाती। व्हीलचेयर मिलने से भले ही श्रीमती दुर्गा गुप्ता और उनकी बच्ची माही के जीवन में बहुत बदलाव न आ पाए लेकिन उनका स्वयं मानना है कि उनकी काफी हद तक परेशानी कम होंगी।
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