logo
Breaking

छत्तीसगढ़ समाचार: मृत पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही पत्नियों को HC से राहत, कहा- जरूरी नहीं उत्तराधिकार प्रमाण पत्र

शासकीय सेवा में मृत पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही महिलाओं को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने आज आदेश देते हुए कहा कि मृत शासकीय सेवक की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।

छत्तीसगढ़ समाचार: मृत पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही पत्नियों को HC से राहत, कहा- जरूरी नहीं उत्तराधिकार प्रमाण पत्र
बिलासपुर। शासकीय सेवा में मृत पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही महिलाओं को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने आज आदेश देते हुए कहा कि मृत शासकीय सेवक की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।
याचिकाकर्ता अन्नपूर्णा रात्रे की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा किसी शासकीय सेवक का निधन होने पर उसकी पत्नी को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की जरूरत नही हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि बिजली कंपनी ने पूर्व में याचिकाकर्ता के खाते में मृत कर्मचारी के देयक का 65 हजार जमा कराया है। इससे साबित होता है कि याचिकाकर्ता मृतक की पत्नी है।
इसके साथ ही कोर्ट ने बिजली कंपनी को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता को 90 दिन के अंदर अनुकंपा नियुक्ति दे। वहीं कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हिन्दु उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 372 में यह कहीं भी उल्लेख नहीं है कि वैध विवाहित पत्नी व उसके बच्चों को दिवंगत शासकीय कर्मी के किसी भी हित या अधिकार को प्राप्त करने के लिए संबंधित न्यायालय से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पेश करना होगा।
गौरतलब है याचिकाकर्ता अन्नपूर्णा रात्रे के पति सत्यम रात्रे छत्तीसगगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के पेंड्रा कार्यालय में पदस्थ थे। 11 अगस्त 2016 को सत्यम की मौत हो गई। पति के मौत के चार महीने बाद याचिकाकर्ता अन्नपूर्णा रात्रे ने 5 दिसंबर 201़6 को एक पुत्र को जन्म दिया। इसके बाद अन्नपूर्णा ने शासन का निर्धारित प्रपत्र भर कर पति की जगह पर अनुकंपा नियुक्ति देने पेंड्रा कार्यालय में आवेदन दिया।
लेकिन विभाग ने उसके आवेदन को लंबित रखा दिया। इसके बाद 3 मार्च को 2018 को विभाग ने उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र नहीं दिए जाने के कारण आवेदन निरस्त कर​ दिया। जिसके बाद अन्नपूर्णा ने अधिवक्ता बृजेश सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता ने कहा, अनुकंपा नियुक्ति के मामले में शासन के विभिन्न सर्कुलर का पालन नहीं कर अनावश्यक रूप से आवेदन को तीन वर्ष तक लंबित रखने के बाद निरस्त किया गया।
Share it
Top