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छत्तीसगढ़ समाचार : 500 करोड़ की बंदरबाट, कवि सम्मेलन और रंग पंचमी पर फूंक दिए लाखों!

कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की रकम कब और कहां खर्च हो रही है। इसकी निगरानी का पूरे प्रदेश में सिस्टम ही नहीं है। इसी वजह से कवि सम्मेलन रंग पंचमी, कॉर्निवाल जैसे निजी कार्यक्रमों के लिए लाखों रुपए फूंके जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ समाचार : 500 करोड़ की बंदरबाट, कवि सम्मेलन और रंग पंचमी पर फूंक दिए लाखों!
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बिलासपुर। कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की रकम कब और कहां खर्च हो रही है। इसकी निगरानी का पूरे प्रदेश में सिस्टम ही नहीं है। इसी वजह से कवि सम्मेलन रंग पंचमी, कॉर्निवाल जैसे निजी कार्यक्रमों के लिए लाखों रुपए फूंके जा रहे हैं।

यही नहीं जिन कार्यक्रमों के लिए सरकारी विभागों को करोड़ों रुपए का अबंटन शासन से मिलता है उन विभागों ने भी सीएसआर से कई करोड़ रुपए की राशि ले ली है। कमीशन के फेर में इस राशि की बंदरबांट हो रही है। हाल यह है कि दिल्ली के एक एनजीओ ने जिले के एसीएसआर मदसे 187 लाख रुपए ले लिए हैं।

सिर्फ जिले में ही पिछले तीन सालों में सीएसआर मद से 500 करोड़ रपुए की राशि खर्च कर दी गई है। माइनिंग फंड की तरह इस मद का भी उपयोग कम, दुरुपयोग ज्यादा हो रहा है। गौरतलब है कि प्रत्येक सार्वजनिक उपक्रम के लिए मुनाफे का दो फीसद सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है।

यह नियम निजी कंपनियों पर भी लागू होता है। यह रकम उस क्षेत्र के लोगों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, नैतिक और स्वास्थ्य आदि में सुधार के लिए खर्च की जानी चाहिए साथ ही सामाजिक विषयों के विकास में योगदान करना इन कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

कार्निवाल और कवि सम्मेलन के लिए 48 लाख रुपए
कंपनियों के शुद्ध लाभ के औसत का 2 प्रतिशत विर्भिन्न कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्वों में कंपनी की सीएसआर कमेटी द्वारा निर्धारित नीति अनुसार व्यय किए जाने का प्रावधान है ंजिले की बात सब जगह हो रही है। डीएमएफ की तरह सीएसआर मद भी कमीशन का खेल बनकर रह गया है। इसमें प्रशासनिक अधिकारी से लेकर राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग शामिल है। इन्ही की अनुशंसा पर पिछले तीन सालों में ताज एडवेंचर्स को बिलासपरु कार्निवाल आयोजन के लिए 35 लाख रुपए दिए गए हैं। कवि सम्मेलन के लिए 10 लाख तो रंग पंचती के लिए 3 लाख रुपए दे दिए गए हैं।

ध्यान दिया जाएगा
सीएसआर मद की राशि नियमों के ​तहत ही आबंटित की जानी चाहिए। इस पर ध्यान दिया जाएगा। फंड का उपयोग सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, नैतिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतरी के लिए उपयोग हो इसके और कड़े प्रावधानों पर नजर होगी।
-डॉ. सजय अलंग, कलेक्टर

100 से अधिक प्रकरणों में 50 करोड़ की मांग
सीएसआर मदसे आसानी से मिलने वाले फंड के कारण विभिन्न विभागों के 100 से अधिक प्रकरण कलेक्टर के पास पहुंचे हैं। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, नैतिक और स्वास्थ्य आदि में सुधार क लिए किए जाने चाहिए साथ ही सामाजिक विषयों के विकास में योगदान के लिए नहीं है, बल्कि अपने हित के लिए है। इसके पीडब्ल्यूडी ने तो एक सड़क का एस्टीमेट बनाने के लिए 2 लाख मांग लिए हैं। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी आफिस स स्कूलों में मिनी साइंस के लिए बजट की मांग की है जबकि इसके लिए शासन से राशि मिलती है।

ट्राइसिकल व खेल परिसर सुधारने 4 करोड़ की राशि
सीएसआर मद से विकलांगों को 486 नग मोटराइज्ड ट्राइसिकल देने के लिए 174.47 लाख रुपए का फंड ले लिया गया जबकि इस काम के लिए विभाग को शासन द्वारा अलग से फंड जार किया जाता है। सवाल यह है कि शासकीय आबंटन का क्या हुआ। इसी तरह जिला खेल परिसर की हालत सुधारने के लिए 225 लाख रुपए सीएसआर मद से खर्च कर दिए गए हैं जबकि इसके लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा लगातार राशि जारी की जाती रही है। इसी तरह कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए 25 लाख रुपए सीएसआर मद से लिए गए हैं, जबकि इस योजना पर सरकार पिछले तीन सालों में 50 करोड़ रुपए पूरे राज्य में खर्च कर चुकी है।

दिल्ली के एनजीओ को 187 लाख
सीएसआर मद के बंदरबांट की हालत यह है कि दिल्ली के एक एनजीओ सेंटर फार सोशल रिस्पासबिलिटी एडं लीडरशिव ने पिछले दो सालों में 187 लाख रुपए ले लिया है। 2017-18 में 87.50 लाख रुपए तो 2018-19 में एनजीओ को 99.75 लाख रुपए दे दिया है। यहां भी सवाल है कि दिल्ली की कंपनी को जिले से आबंअन क्यों और सिक आधार पर दिया गया। इसी तरह एक निजी स्कूल को हास्टल भवन के साथ लैब और लाइब्रेरी के लिए 110 लाख रुपए दिए गए हैं। इसी तरह 45 आदिवासी हास्टलों में वेंडिंग मशीन के लिए लाखों रुपए का आबंटन किया गया है।

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