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छत्तीसगढ़ समाचार : गरीब नहीं, सि​र्फ अति गरीब ही कर सकेंगे प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन!

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए पंपलेट के मुताबिक इस बार गरीब नहीं, केवल अति गरीब ही शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत निजी स्कूलों में आवेदन करसकेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जो पपंलेट जारी किया गया है।

छत्तीसगढ़ समाचार : गरीब नहीं, सि​र्फ अति गरीब ही कर सकेंगे प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन!
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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए पंपलेट के मुताबिक इस बार गरीब नहीं, केवल अति गरीब ही शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत निजी स्कूलों में आवेदन कर सकेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जो पपंलेट जारी किया गया है।
उसमें यह कहा गया है कि केवल गुलाबी राशन कार्डधारी ही राइट टू एजूकेशन अर्थात शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के लिए आवेदन कर सकेंगे। अब तक गुलाबी और नीले दोनों की राशनकार्डधारी आवेदन कर सकते थे।
हालांकि यह पात्रता संबंधी यह निर्देश केवल पंपलेट में ही दिए गए हैं। स्पष्ट रूप से लिखित में कोई आदेश ना मिलने के कारण अधिकारी भी कशकश में हैं।
गुलाबी और नीले दोनों ही राशनकार्डधारी गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। इनमें फर्क यह है ​​कि गुलाबी कार्डधारक को अधिक गरीब माना जाता है और उन्हें कुछ अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। विधवा, परित्यक्ता व विकलांगों को भी गुलाबी कार्ड प्रदान किया जाता है।
इस वर्ष रायपुर जिले में आरटीई के तहत लगभग 10 हजार सीटों में प्रवेश के​ लिए आवेदन मंगाए जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया 1 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगी। वहीं प्रवेश प्रक्रिया अप्रैल में प्रारंभ होगी।

जानकारी नहीं
इस संबंध में जब स्कूल शिक्षा सचिव से बात की गई तो उन्होंनं कहा, अभी बाहर हूं। इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। यथास्थिति से अवगत होने के बाद ही कुछ कह सकूंगा। - गौरव ​द्विवेदी, स्कूल शिक्षा सचिव
लिखित में नहीं
केवल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए पंपलेट में इसका उल्लेख है। लिखित में कोई ओदश नहीं आया। विधिवत आदेश के बाद ही कुछ कह सकेंगे।
- एएन बंजारा, जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर
पहले ही सीटें खाली
ऐसा नहीं है कि आरटीई के तहत आवेदन करने वाले पालकों के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा अथवा सीटें नहीं मिल पा रहीं। आवेदन करने वाले लगभग सभा छात्रों को सीटें आबंटित हो रही हैं।
हालांकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो मनपसंद अथवा बड़े स्कूल ना मिलने पर मिली हुई सीट छोड़ देते हैं। गुलाबी और नीले दोनों राशनकार्डधारियों द्वारा आवेदन एिक जाने पर भी सीटें खाली ही रह जा रही हैं।
पिछले वर्ष आरटीई के अंतर्गत 8050 सीटों के लिए आवेदन मंगाए गए थे, लेकिन लगभग 6 हजार सीटें ही भर पाईं। ऐसे में यदि केवल गुलाबी राशन कार्डधारियों को ही आवेदन की पात्रता होगी, तो सीटें और अधिक खाली रह जाएंगी।

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