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छत्तीसगढ़ समाचार: बच्चों की थाली में प्रोटीन कम और कैलोरी ज्यादा, पांच जिलों के सेंट्रल किचन भी फेल

प्रदेश के स्कूली छात्रों की थाली में कैलोरी की मात्रा ज्यादा और प्रोटीन की मात्रा कम है। छात्रों को दएि जाने वाले मध्यान्ह भोजन की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। न केवल स्कूल मध्यान्ह भोजन में फेल हो गए हैं, बल्कि पांच जिलों में संचालित सेंट्रल किचन भी फेल हो गए हैं।

छत्तीसगढ़ समाचार: बच्चों की थाली में प्रोटीन कम और कैलोरी ज्यादा, पांच जिलों के सेंट्रल किचन भी फेल

प्रदेश के स्कूली छात्रों की थाली में कैलोरी की मात्रा ज्यादा और प्रोटीन की मात्रा कम है। छात्रों को दएि जाने वाले मध्यान्ह भोजन की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। न केवल स्कूल मध्यान्ह भोजन में फेल हो गए हैं, बल्कि पांच जिलों में संचालित सेंट्रल किचन भी फेल हो गए हैं। जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद सभी जिलों के कलेक्टर को माध्यान्ह भोजन में बदलाव करने के निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग द्वार दिए गए हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 19 जिलों एवं पांच केंद्रीकृत किचन के 66 शालाओं के पके हुए भोजन का रेंडम सैंपल लेकर जांच की गई। 47 स्कूलों के भोजन में कैलोरी की मात्रा तय मानक से अधिक मिली। केवल 2 स्कूलों में ही निर्धारित मात्रा में कैलोरी पाई गई। शेष स्कूलों में कैलोरी की मात्रा कम रही।

प्रोटीन की मात्रा सिर्फ 3 स्कूलों में शत प्रतिशत पाई गई। 18 स्कूलों में भोजन में प्रोटीन की मात्रा तय मानक की 85 प्रतिशत रही, जबकि शेष में प्रोटीन की मात्रा अत्यधिक कम पाई गई। 5 शहरों में एनजीओ द्वारा संचालित केंद्रीकृत किचन के सैंपल में अधिक गड़बड़ी पाई गई है। केंद्रीकृत किचन के 8 सैंपल में से 7 में कैलोरी और प्रोटीन का स्तर अमानक पाया गया। केवल एक विद्यालय में ही दोनों की मात्रा संतुलित रही।

उचित दर पर उपलब्ध

सभी सोया उत्पाद उचित दर पर छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम में उपलब्ध हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल का वितरण भी मध्यान्ह भोजन में करने निर्देश दिए गए हैं। - गौरव द्विेवेदी, स्कूल शिक्षा सचिव

कुपोषित हो सकते हैं बच्चे

मध्यान्ह भोजन की शुरूआत इसलिए की गई थी, ताकि छात्रों को दिनभर के लिए आवश्यक प्रोटीन और कैलोरी का तीन तिहाई हिस्सा मिल सके। कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा में कमी होने पर बच्चे कुपोषित हो सकते हैं। - डॉ. अरुणा पल्टा, आहार विशेषज्ञ, प्राचार्य राधाबाई कन्या महाविद्यालय

छोटे बच्चों को 450 और बड़े बच्चों को 700 ग्राम

किसी भी सैंपल में स्वास्थ्य के लिए कोई हानिकारक तत्व नहीं मिला, लेकिन भोजन में कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा तय निर्धारित मानक के अनुसार नहीं रही। नियमानुसार प्राइमरी के बच्चों को 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन मिलना चाहिए। जबकि छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों को 7 सौ ग्राम कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन दिया जाना है। गौरतलब है, राज्य के 146 विकासखंडों में 31 हजार 278 प्राइमरी और 13 हजार 559 मिडिल स्कूलों में करीब 32 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है।

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