Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

छत्तीसगढ़ समाचार : छात्रों की कमी के चलते बंद हो रहे निजी इंजिनियरिंग कॉलेज, NICTE का नया प्रयास

इंजिनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली बचने की समस्या को लेकर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) एक नया प्रयास करने जा रहा है। अब यहां बीए और बीएससी जैसे कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे रिसोर्सेज का सही तरह से इस्तेमाल हो सके।

छत्तीसगढ़ समाचार : छात्रों की कमी के चलते बंद हो रहे निजी इंजिनियरिंग कॉलेज, NICTE का नया प्रयास
X
इंजिनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली बचने की समस्या को लेकर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (NICTE) एक नया प्रयास करने जा रहा है। अब यहां बीए और बीएससी जैसे कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे रिसोर्सेज का सही तरह से इस्तेमाल हो सके।
बीते कुछ सालों में इंजिनियरिंग काॅलेज में सीटें बड़े पैमाने पर खाली बचती रही हैं। इस समस्या को देखते हुए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (NICTE) ने यह नया प्रयास किया है।
इंजीनियरिंग में छात्रों की घटती संख्या के कारण कई निजी इंजीनियरिंग काॅलेज बंद होने के कगार पर हैं। विगत वर्षाें में कई कॉलेज बंद भी हो चुके हैं। NICTE का मानना है कि बीए और बीएससी जैसे कोर्स शुरू किए जाने से रिसोर्सेज का सही तरह इस्तेमाल हो सकेगा।

पर्याप्त बेस होना जरूरी

इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए अन्य विषयों की पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं होगा। नए कोर्स शुुरू करने के लिए कॉलेजों के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर होना जरूरी है। NICTE के अनुसार प्लेग्राउंड और बाकी जगह एक हो सकते हैं, लेकिन फिर भी काॅलेज के पास पर्याप्त बेस होना जरूरी है।
नए कोर्स से संबंधित प्रयोगशाला और उपकरणों की व्यवस्था भी कैंपस में होनी चाहिए। इंजीनियरिंग के अतिरिक्त जिन अन्य विषयों की पढ़ाई संस्था में शुरू कराए जाने हैं, उनसे संबंधित पर्याप्त योग्य फैकल्टी भी संस्था में होने चाहिए।

जरूरी है अप्रूवल

निजी इंजीनियरिंग संस्थान अपनी इच्छा से कॉलजों में परंपरागत पाठ्यक्रम शुरू नहीं कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें विभिन्न स्तर पर अनुमति लेनी होगी। इसके लिए जांच बिंदु तय किए जाएंगे। विभिन्न जांच बिंदुओं पर खरा उतरने के बाद ही कॉलेजों को अनुमति प्रदान की जाएगी।
NICTE के अप्रूवल के साथ ही काॅलेजों को अन्य प्रकार की स्वीकृतियां लेनी पड़ेंगी। काॅलेजों को संबंधित विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा निदेशालय से भी अनुमति लेनी पड़ेगी। वहीं प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग कॉलेज संचालकों का कहना है कि फिलहाल उन्हें ऐसा कोई सर्कुलर प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन इस तरह के कोर्स को शामिल करने में उन्हें खुशी होगी।

संस्थान पर निर्भर

इंजीनियरिंग कॉलेजों के इतर अन्य कोर्स शुरू करने का फैसला पूरी तरह संस्थान पर निर्भर करता है। डॉ. एके दुबे, संचालक, तकनीकी शिक्षा संचालनालय, छग

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story