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छत्तीसगढ़ समाचार: खुले में शौच रोकने रोपे तुलसी के पौधे, तड़के ढोल-मंजीरे के साथ कीर्तन भी

ग्राम पंचायत सिवनी के आश्रित ग्राम कामता में खुले में शौच जाने से रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने अनोखा तरीका इजाद किया है। गांव वालों ने तालाब के पास तुलसी के पौधों का रोपण कर दिया है।

छत्तीसगढ़ समाचार: खुले में शौच रोकने रोपे तुलसी के पौधे, तड़के ढोल-मंजीरे के साथ कीर्तन भी

पावन देवांगन, डौंडीलोहारा। ग्राम पंचायत सिवनी के आश्रित ग्राम कामता में खुले में शौच जाने से रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने अनोखा तरीका इजाद किया है। गांव वालों ने तालाब के पास तुलसी के पौधों का रोपण कर दिया है। इसके बाद सुबह से ही क्षेत्र के लोग पौधों के पास पहुंचकर भजन कीर्तन करने लगते हैं जिसका सकारात्मक अ सर अब दिखाई देने वाला है।

यहां सूर्योदय से पर्वू स्वच्छाग्राही सिन्हा समाज के सामुदायिक भवन के पास ढोल, मंजीरा, घुंघरू और करताल लेकर एकत्रित होकर सीताराम नाम का संकीर्तन करते हुए सीधे तालाब की ओर रवाना होते हैं। जहां पहले लोग खुले में शौच करने जाते थे, उस स्थान में कार्य योजना अनुसार तुलसी का पौधा पखवाड़े भर पहले लगाये थे, जहां सभी घेरा बनाकर कड़कड़ाती ठंड के बावजूद भी सीताराम नाम का संकीर्तन करने लगे।

इस रोचक नजारे को देखकर स्वच्छता के प्रति इनी जागरूकता को लोगों ने सलाम किया। संभवत ऐसा अनोखा कार्य जिले में पहली बार हो रहा है। स्वच्छता के क्षेत्र में कार्य करने वाले गौतम सिन्हा ने बताया कि विकासखंड की महिला समूहों ने वर्षों से स्वच्छता की मिसाल को स्थाई बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं।

गांव-गांव में यह महिला समूह खुले में शौच जाने वाले परिवारों को रोकने व समझाने की कोशिश करते थे, जहां उन्हें नोकझोक का सामना भी करना पड़ता था, मगर इन बहनों ने हिम्मत नहीं हारी और स्वच्छता की अलख जगाने निकल पड़ी।

विकासखंड के चंद लोग ही बच गए हैं, जिसके व्यवहार परिवर्तन में दिक्कत हो रही है। उसे भी ऐसे नायाब तरीका से परिवर्तन करने की तरकीब चल रही है, जिसमें सफलता जरूर मिलेगी। खुले में शौच जाने वाले परिवारों को चिन्हित करने महिला समूह के स्वच्छाग्राहियों ने घर घर जाकर सर्वे रजिस्टर में नाम अंकित कर रही है।

ओडीएफ घोषित है ब्लॉक

विदित हो कि डौडीलोहारा ब्लॉक ओडीएफ घोषित है। गांव के प्रत्येक घरों में शौचालय का निर्माण शासन के सहायोग से किया गया है, बावजूद लोग शौचालय का उपयोग न रक खुले में जाना ज्यादा उचित समझते हैं। इसी प्रथा को रोकने के लिए स्वच्छता हितग्राहियों ने तालाब किनारे खाली जगह पर तुलसी के पौधे लगाकर सुबह-सुबह ढोल, मंजीरा, घुंघरू और करताल से भजन कीर्तन गायन शुरू किया, जिससे लोगों में जागरूकता आने लगी है और लोग अब धीरे-धीरे घरों में बने शौचालयों का उपयोग करने लगे हैं।

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