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राजनांदगांव में स्वाइन फ्लू से मौत का पहला मामला, अब तक 10 की मौत, संदिग्ध मरीजों की संख्या पहुंची 50

राजनांदगांव में एक शिक्षाकर्मी की स्वाइन फ्लू से मौत का पहला मामला सामने आया है। शिक्षाकर्मी का राजधानी के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी जिले में अर्लट जारी कर दिया है।

राजनांदगांव में स्वाइन फ्लू से मौत का पहला मामला, अब तक 10 की मौत, संदिग्ध मरीजों की संख्या पहुंची 50

राजनांदगांव। राजनांदगांव में एक शिक्षाकर्मी की स्वाइन फ्लू से मौत का पहला मामला सामने आया है। शिक्षाकर्मी का राजधानी के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी जिले में अर्लट जारी कर दिया है।

इसके साथ प्रदेश में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। वहीं संदिग्ध मरीजों की संख्या 50 तक पहुंच गई है। अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डाले तो 6 फरवरी तक नौ लोगों को स्वाइन फ्लू था। शिक्षाकर्मी खैरागढ़ ब्लॉक के ग्राम चिचका निवासी गजेंद्र कुमार डाखरे 31 वर्ष का है।

स्वाईन फ्लू के लक्षण को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जिले में अलर्ट जारी किया गया है सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि स्वाईन फ्लू एच 1 एन 1 वायरस के संक्रमण से होने वाली श्वसन तंत्र में फैलने वाली संक्रामक बीमारी हैं।
स्वाईन फ्लू ​बीमारी एक संक्रमित व्यक्ति से उसके छींकने या खांसते वक्त वायरस वातावरण में ड्रापलेट के रूप में फैलते हैं। बीमारी की गंभीरता के मद्देनजर जिले के सभी शासकीय चिकित्सालयों एवं निजी चिकित्सालयों के प्रमुखों को पूर्व से दिशा निर्देश, लक्षण, जटिलताएं, मरीजों के वर्गीकरण, उपचार प्रोटोकॉल, मरीजों के प्रबंधक, बीमारी की रोकथाम के प्रबंधन, कान्टेक्स ट्रेसिंग, मॉनिटरिंग, धनात्मक मरीजों के सर्विलेंस, मरीजों की पूर्ण जानकारी इंद्राज करने एवं लैब सेंपल रिपोर्टिंग के निर्देश दिए जा चुके हैं।
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