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26 साल से इस मंदिर में नहीं हुई पूजा, कहते हैं भगवान अपवित्र हैं, वजह हैं प्रेमी युगल...

हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मं​दिर में पूजा तो होती ही नहीं, बल्कि इलाके के लोग भगवान को ही अपवित्र मानते हैं।

26 साल से इस मंदिर में नहीं हुई पूजा, कहते हैं भगवान अपवित्र हैं, वजह हैं प्रेमी युगल...

रविकांत सिंह राजपूत, कोरिया: अभी तक आपने सुना होगा कि मंदिर में भगवान की पूजा होती है और भगवान को पवित्र मान जाता है। लेकिन हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मं​दिर में पूजा तो होती ही नहीं, बल्कि इलाके के लोग भगवान को ही अपवित्र मानते हैं। दरअसल ये मंदिर भगवान शंकर का है, जो छत्तीसगढ़ के चिरमिरी शहर से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव साजापहाड़ में है। इस मंदिर को देखने से ऐसा लगता है कि यह प्राचीनकाल का है।

दरअसल इस मंदिर में पूजा प्रेमी युगल के चलते पूजा नहीं की जाती। ये सुनकर आपको हैरानी होगी, लेकिन ये सच है। बताया जाता है कि करीब 26 साल पहले एक प्रेमी युगल मंदिर के भीतर आपत्तिजनक हालत में पकड़े गए थे। इसके बाद गांव में पंचायत बैठी और पंचों ने पंडित रामनारायण ठाकुर की उपस्थिति में मंदिर को अशुभ और वहां विराजित मूर्तियों को अपवित्र मानने का निर्णय लिया। इसके बाद से ही इस मंदिर में पूजा नहीं की जाती है।

साजापहाड़ के इस मंदिर में आज भी पत्थर की जलहरी, शिवलिंग और त्रिशूल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में देखे जा सकते हैं। इसके अलावा मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। पहाड़ी पर मौजूद मंदिर के परिसर के साथ साथ मंदिर के भीतर भी घास और झाड़ियां उग आई हैं। बताया जाता है कि यह शिव मंदिर 60 वर्ष पहले बिरला एण्ड संस कंपनी के अधिकारियों ने बनवाया था। उस वक्त इस मंदिर में पूरे विधि-विधान से दो वक्त की आरती व पूजा-अर्चन होती थी। साजापहाड़ गांव के पंडित रामनारायण ठाकुर वहां पूजा करवाते थे।

महाशिवरात्रि और सावन में इस शिव मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का मेला लगता था। अब मंदिर तो दूर लोग इसके आसपास जाने से भी घबराते हैं। चिरमिरी के कुछ युवाओं ने 25 साल बाद अंधविश्वास से दूर हटते हुए मंदिर के पट खुलवाए और गांव वालों को भी इस कार्य में आगे आने की प्रेरणा दी, लेकिन ग्रामिण अपने पूरखों द्वारा लिए गए इस निर्णय को तोड़ना नहीं चाहते। ग्रामीण मंदिर में पूजा करने को अब भी तैयार नहीं हैं।

गांव के बुजुर्ग देव साय बताते हैं कि 60 वर्ष पहले बिरला एण्ड सन्स कंपनी इस क्षेत्र में कोयला खदान चलती थी। इसी दौरान अधिकारियों ने यह मंदिर बनवाया था। पहले मंदिर में खासी रौनक रहती थी। कंपनी कोयला खनन करती थी, लोगों के लिए भी रोजगार के साधन थे।

चिरमिरी में ही पोड़ी हनुमान मंदिर के पुजारी शास्त्री पवन तिवारी इस अंधविश्वास को नहीं मानते। पं. पवन कहते हैं कि भगवान व उनका स्थान कभी भी अशुद्ध नहीं होता है। शास्त्रों में भी इसका वर्णन है। किसी द्वारा कोई गलत कृत करने पर वह व्यक्ति गलत या अशुद्ध हो सकता है, लेकिन वह स्थान कभी भी अछूत नहीं होता है। लोगों को भगवान में आस्था रखकर फिर से मंदिर में पूजा-पाठ शुरू करनी चाहिए।

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