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छत्तीसगढ़ समाचार / मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना फेल, 42 युवाओं पर गिरी गाज, एक से 2.50 लाख ले रहे थे प्रतिमाह सेलरी

छत्तीसगढ़ में नई सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की जिन योजनाओं को फिजुलखर्ची मानते हुए आंखें तरेरी हैं, उनमें मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना भी शामिल है। आईआईएस, आईआईटी समेत कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से पढ़कर आए युवाओं को शासन के अहम पदों पर नियुक्त करने की इस योजना का कांग्रेस ने पहले दिन से ही विरोध किया था।

छत्तीसगढ़ समाचार / मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना फेल, 42 युवाओं पर गिरी गाज, एक से 2.50 लाख ले रहे थे प्रतिमाह सेलरी
गौरव शर्मा, रायपुर। छत्तीसगढ़ में नई सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की जिन योजनाओं को फिजुलखर्ची मानते हुए आंखें तरेरी हैं, उनमें मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना भी शामिल है। IIS, IIT समेत कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से पढ़कर आए युवाओं को शासन के अहम पदों पर नियुक्त करने की इस योजना का कांग्रेस ने पहले दिन से ही विरोध किया था।
अब सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि ऐसे अफसरों की आवश्यकता नहीं है। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सचिवों के साथ और सभी 27 जिलों में कलेक्टरों के साथ 42 युवाओं को नियुक्त किया था।
इन्हें न सिर्फ शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर मॉनीटरिंग करने के काम सौंपे गए थे, बल्कि जिलों की स्थितियों के बारे में सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट करने के निर्देश भी दिए गए थे। इस तरह जिलों में फेलोशिप में काम कर रहे युवा शैडो कलेक्टर के रुप में काम कर रहे थे।
एक लाख से 2.30 तक मिल रही प्रतिमाह सेलरी
छत्तीसगढ़ में इन युवाओं को एक लाख रुपए से लेकर ढाई लाख रुपए तक प्रतिमाह सेलरी भी दी जा रही है। साथ ही कई अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई है। इंटरव्यू के माध्यम से चुने गए 42 युवा न सिर्फ जिलों में काम कर रहे हैं, बल्कि इनमें से 12 युवाओं की नियुक्ति विभिन्न विभागीय सचिवों के साथ भी की गई है। 1 युवा को चीफ सेक्रेटरी के दफ्तर में भी संलग्न किया गया है। जबकि 2 फेलोशिप सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ हैं। इस तरह 42 युवाओं के पीछे हर माह करोड़ों रुपए की राशि खर्च की जा रही है।
इन कामों के लिए हुई थी नियुक्ति
  • योजनाओं के क्रियान्वयन के उद्देश्यों को पूरा करने में आ रही बाधाओं को समझना।
  • विभाग के साथ बातचीत कर योजना को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए रणनीति बनाना।
  • सरकारी सिस्टम और ब्लॉक लेवल से जिले स्तर तक की विभागीय योजनाओं की कार्यशैली की मॉनीटरिंग।
  • विभाग की तरफ से लागू योजनाओँ की रिपोर्ट तैयार करना।
  • योजनाओं और कार्यक्रमों की सफलता के लिए रणनीति तैयार करना और धरातल पर लागू करवाने में सहयोग प्रदान करना।
  • कार्यक्रमों की जवाबदेह और पारदर्शी क्रियान्वयन की सुविधा के लिए डेटा एनालिसिस करना।
ऐसा है खर्च का गणित
  • 42 लोगों की वेतन प्रतिमाह- 1 लाख से 2.5 लाख
  • प्रतिमाह वेतन पर कम से कम खर्च – 42 लाख
  • दो साल की योजना, प्रति साल खर्च – लगभग 5 करोड़
पूरा भरोसा है हमें अपने अफसरों पर
फेलोशिप योजना पर होने वाले भारी भरकम खर्च और उससे शासन तंत्र में खास सुधार न होने की वजह से ही अब सरकार फेलोशिप योजना को बंद करने पर विचार कर रही है। इसीलिए मुख्यमंत्री ने पहले ही साफ कर दिया है कि हमें आईएएस अफसरों के अतिरिक्त और किसी की आवश्यकता नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि हमें अपने अफसरों पर पूरा भरोसा है। उनके ऊपर किसी को बैठाने की जरूरत भी नहीं है। - भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री
फिजुलखर्ची को लेकर पहले ही दिन से सरकार के कसावट और मुख्यमंत्री के बयान के बाद साफ है कि सुशासन के नाम पर प्रारंभ की गई योजना खटाई में पड़ सकती है। साथ ही उन 42 युवाओं की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है, जिन्हें लंबे इंटरव्यू और काफी जद्दोजहद के बाद फेलोशिप के लिए चुना गया था। देखना दिलचस्प होगा कि लगातार फैसले कर रही सरकार फेलोशिप को फेल करेगी या सुशासन के नाम पर इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।
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