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छत्तीसगढ़ समाचार: सरकारी संचालन के बाद 10 प्रतिशत बढ़ी खपत, 9 महीनों में शराब प्रेमियों ने डकार डाली पौने 9 करोड़ की शराब

शराब दुकानों के सरकारी स्तर पर संचालन शुरू होने के साथ शराब की खपत करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ गई है। दुकानों में पसंदीदा ब्रांड की शराब उपलब्ध नहीं होने के बावजूद यह आंकड़ा चौंकाने वाला है।

छत्तीसगढ़ समाचार: सरकारी संचालन के बाद 10 प्रतिशत बढ़ी खपत, 9 महीनों में शराब प्रेमियों ने डकार डाली पौने 9 करोड़ की शराब

रायपुर। शराब दुकानों के सरकारी स्तर पर संचालन शुरू होने के साथ शराब की खपत करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ गई है। दुकानों में पसंदीदा ब्रांड की शराब उपलब्ध नहीं होने के बावजूद यह आंकड़ा चौंकाने वाला है।

पिछले करीब 9 महीने में जिले के मदिराप्रेमी करीब पौने 9 करोड़ की शराब डकार चुके हैं। सरकार बदलने के बाद अब दुकानों में ज्यादातर ब्रांड की शराब उपलब्ध हो गई है। ऐसे में इसकी खपत और बढ़ गई है।
प्रदेश में सरकार द्वारा शराब दुकानों का संचालन प्रारंभ से ही एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से ही शराब को लेकर घमासान मचा हुआ है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भी यह बड़ा मुद्दा था। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में सरकार आने के बाद यहां शराबबंदी करने का वादा किया है।
कांग्रेस की सरकार बनने के बाद शराब दुकानें बंद नहीं होने को लेकर विपक्ष उसे घेरने में लगा है। इस बीच सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में शराबबंदी तो होगी, लेकिन यह आनन-फानन में नहीं, बल्कि इसके लिए एक माहौल बनाकर इसे लागू किया जाएगा।
प्रदेश में शराबबंदी कब होगी? यह एक अलग विषय है, लेकिन यहां मदिरा की बढ़ती खपत जरूर चिंताजनक है। सरकारी संचालन के बाद यहां शराब की खपत में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वह भी तब, जब दुकानों के खुलने व बंद होने के समय का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है और अवैध शराब की बिक्री पर बहुत हद तक अंकुश लगा है।
रायपुर जिले में 26 देसी व 39 विदेशी मदिरा दुकानें हैं। विगत वर्ष अप्रैल से दिसंबर तक यहां करीब 7 अरब 79 करोड़ 14 लाख की शराब बिकी थी। इस वर्ष इस अवधि में यह आंकड़ा 8 अरब 87 करोड़ 21 लाख तक पहुंच गया है।
चुनाव के पहले जहां दुकानों में देसी मदिरा की किल्लत रहती थी, वहीं विदेशी दुकानों में कुछ चुनिंदा ब्रांड ही बेचे जा रहे थे। चुनाव के बाद दुकानों में शराब की किल्लत व ब्रांड की समस्या खत्म हो गई है। इसके कारण इसकी खपत और बढ़ गई है। ऐसे में शराबबंदी के बाद क्या स्थिति बनेगी? यह बड़ा सवाल है। फिलहाल इस मुद्दे पर स्पष्ट तौर पर कुछ बोलने की स्थिति में कोई नहीं है।
जिले में अप्रैल से दिसंबर तक शराब की बिक्री
वर्ष - देसी विदेशी कुल राशि
2017 - 3642132385 - 4149376461 - 7791499846
2018 - 3804775150 - 5067336460 - 8872111610


स्टाक व ब्रांड की समस्या नहीं
जिले में शराब के स्टाक व ब्रांड को लेकर कोई समस्या नहीं है। यहां पहले भी सभी ब्रांड की शराब मिलती रही है। 6 सौ रुपए से अधिक कीमत की विदेशी शराब के लिए शहर में अलग काउंटर खोले गए हैं, जहां सुविधाजनक ढंग से शराब मुहैया हो जा रही है। - पीएल साहू, सहायक आयुक्त, आबकारी
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