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पहली बार नक्सलियों के मांद में अ​दिवासियों के बीच पहुंचा पुलिस का कोई अधिकारी, ग्रामीणों की स्थिती देख हुए भावुक

नक्सल प्रभावित इलाकों के हालात ऐसे हैं कि यहां के लोगों तक सरकार तो दूर सरकारी योजनाएं भी नहीं पहुंच पाती। आदिवासियों के हालात की जानकारी होने पर कांकेर एसपी अपने आपको रोक नहीं पाए और दल-बल के पोरियाहू गांव और हिदुर गांव का दौरा किया।

पहली बार नक्सलियों के मांद में अ​दिवासियों के बीच पहुंचा पुलिस का कोई अधिकारी, ग्रामीणों की स्थिती देख हुए भावुक

अंकुर तिवारी, कांकेर: बस्तर का वनांचल क्षेत्र नक्सलियों का दंश तो झेल ही रहा है, लेकिन नक्सल आतंक के चलते यहां के आदिवासियों को कई और अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नक्सल प्रभावित इलाकों के हालात ऐसे हैं कि यहां के लोगों तक सरकार तो दूर सरकारी योजनाएं भी नहीं पहुंच पाती। आदिवासियों के हालात की जानकारी होने पर कांकेर एसपी अपने आपको रोक नहीं पाए और दल-बल के पोरियाहू गांव और हिदुर गांव का दौरा किया।

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कांकेर एसपी कन्हैयालाल ध्रुव की अगुवाई में पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने अतिसंवेदनशील संगम गांव में ग्रामीणों की समस्या दूर करने उनसे मुलाकात की। नागरिक जीवन की मूलभूत सुविधाओं की कमी से बेहाल आदिवासी परिवारों ने जब पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपनी समस्या बताई तो एसपी केएल ध्रुव आदिवासियों की पीड़ा देख भावुक हो गए। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जल्दी ही गांव में पेयजल संकट से निपटने के लिए हैंडपंप और बोरिंग लगाया जाएगा।
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घने जंगल और नदी पहाड़ से घिरे पोरियाहू गांव के आदिवासियों की मुश्किल भरी जिंदगी का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है। यहां के आदिवासी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं उसके बाद भी कांकेर जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने कुपोषण को दूर करने या उसे कम करने के उपायों पर काम नहीं किया है। गर्मी के दिनों में पोरियाहू गांव में पेयजल किल्लत से आदिवासियों को जूझना पड़ता है जबकि पिछले कई सालों से ग्रामीणों ने अलग अलग शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन अफसरों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
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हिदुर और पोरियाहू गांव के आदिवासियों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है। कम से कम सुविधाओं में गुजारा करने वाले आदिवासियों को अफसरों में काम करने की इच्छा शक्ति की कमी के कारण नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान और कपड़ा दिया है। लेकिन आदिवासियों की सिर्फ इतनी मदद नाकाफी साबित होगी। उन्हें जल्द ही सरकार के जागने का इंतजार है।
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हिदुर के ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक केएल ध्रुव से बेगुनाह आदिवासियों को नक्सली बताकर जेल में डालने से रोक लगाने की मांग की। उन्होंने वनाधिकार पट्टा दिलाने की मांग की। गांव में पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों की पढ़ाई लिखाई छूट जाता है। इसके लिए गांव में मिडिल स्कूल खोलने की मांग की गई। हिदुर और पोरियाहू गांव में समस्याओं का अंबार लगा है। गरीबी रेखा के निचे जीवन यापन करने वाले आदिवासियों का नाम सरकारी राशन कार्ड से काट दिया गया है। जिसके कारण उन्हें बाहर से महंगे दामों पर चावल खरीदना पड़ता है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट कर थक चुके ग्रामीणों को शासन प्रशासन के भरोसे पर ऐतबार नहीं है। नक्सलियों से डरे सहमे ग्रामीण पुलिस प्रशासन के आश्वासन पर जंगल से निकलकर मुख्यधारा में जुड़ना चाहते हैं लेकिन अफसरों की गैरजिम्मेदाराना रवैया उन्हें जंगल तक ही सीमित न कर दें?
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