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नक्सल दहशत में अपना घरौंदा छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं कांकेर जिले के ग्रामीण

नक्सल समस्या को हल करने का सरकार चाहे कितने भी दावे कर ले, लेकिन धरातल की सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है। वनांचल क्षेत्र के आदिवासी आज भी नक्सलियों से खौफ खाते हैं और दहशत के साए में जिंदगी गुजार रहें हैं।

नक्सल दहशत में अपना घरौंदा छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं कांकेर जिले के ग्रामीण

अंकुर तिवारी, कांकेर: नक्सल समस्या को हल करने का सरकार चाहे कितने भी दावे कर ले, लेकिन धरातल की सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है। वनांचल क्षेत्र के आदिवासी आज भी नक्सलियों से खौफ खाते हैं और दहशत के साए में जिंदगी गुजार रहें हैं। नक्सली दहशत का जिवंत उदाहरण उस वक्त देखने को मिला, जब कांकेर जिले के कई गांवों के लोग अपना घरौंदा छोड़कर कहीं और जाने को मजबूर हैं। गांवों से पलायन कर रहे ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टर के जनदर्शन में नौकरी और रहने के लिए आवास की मांग की।

दरसअल बीते दिनों नक्सलियों ने कांकेर जिले के एक ग्रामीण की पुलिस मु​खबीरी के शक में हत्या कर दी थी। इसके बाद से मृतक के परिवार के सदस्यों को नक्सली प्रताड़ित कर रहे हैं। अब आलम ऐसा है कि मृतक के परिवार का एक पल भी गांव में गुजारना मुश्किल हो गया है। ये कहानी किसी एक गांव की नहीं है, बल्कि इस अंचल के हर गांव की यही कहानी है।
पीड़ित परिवारों ने कलेक्टर रानू साहू से नौकरी दिलाने की गुहार लगाई है। असल में, माओवादी हिस्सा से थर्रा रहें बस्तर के ग्रामीण इलाकों में नक्सलियों के डर से ग्रामीणों को गांव खाली करना पड़ा है। पानीडोबिर, लोहत्तर, दमोड़ा, पेंडावरी, कन्हारगांव, मुल्ला समेत तुमसनार गांव से अपनी जान बचाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों की निगरानी में रहना पड़ता है। जबकि नक्सली संगठन में भर्ती होकर आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों की हत्या करने वाले नक्सलियों को सरेंडर पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरी और रहने को मकान दिया जाता है।
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