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CG News: किसानों की आंखों से छलका जमीन छिनने का दर्द, प्रोजेक्ट फेस-5 बंद होने की खुशी भी

कमल विहार प्रोजेक्ट-4 में किसानों, व्यवसायियों व रहवासियों को पुश्तैनी जमीन जाने का मलाल है, तो दूसरी तरफ कमल विहार फेस-5 के बंद होने से चार गांवों की 23 सौ एकड़ जमीन बच गई है।

CG News: किसानों की आंखों से छलका जमीन छिनने का दर्द, प्रोजेक्ट फेस-5 बंद होने की खुशी भी
रायपुर। कमल विहार प्रोजेक्ट-4 में किसानों, व्यवसायियों व रहवासियों को पुश्तैनी जमीन जाने का मलाल है, तो दूसरी तरफ कमल विहार फेस-5 के बंद होने से चार गांवों की 23 सौ एकड़ जमीन बच गई है।
इससे प्राेजेक्ट की जद में आने वाले भू-स्वामियों ने राहत की सांस ली है। फेस-5 के अंतर्गत देवपुरी, फुंडहर, अमलीहीह और डूमरतराई क्षेत्र को प्रस्तावित किया गया था। इससे इन क्षेत्रों के सैकड़ों लोगों की जमीन अधिग्रहित की जानी थी।
शासन द्वारा प्राेजेक्ट को बंद किए जाने से किसानों व अन्य व्यवसायियों के चेहरे पर खुशी छा गई है। वहीं कमल विहार-4 प्रोजेक्ट में जिन भू-स्वामियों के जमीनें अधिग्रहित हुई हैं। वे लोग कृषि व अावासीय भूमि जाने से बेहद गमगीन हैं, क्योंकि इन लोगों को उनकी जमीन के एवज में सिर्फ 35 प्रतिशत विकसित भूमि ही वापस की गई है।
इसे खुद के साथ शासन द्वारा अन्याय मान कर कमल विहार-4 प्रोजेक्ट के प्रभावित लोगों ने लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़ी है, लेकिन उनको किसी तरह का न्याय नहीं मिल पाया। गौरतलब है कि रायपुर विकास प्राधिकरण ने नगर विकास योजना के तहत कमल विहार फेस-4 को विकसित किया है।
इसी योजना के अंतर्गत कमल प्रोजेक्ट-5 को भी विकसित किया जाना था। इसकी जद में कृषि, व्यवसायिक जमीन के साथ-साथ रहवासी क्षेत्र भी शामिल थे, जबकि आरडीए के अधिकारियों का कहना है कि प्राेजेक्ट काे लेकर फाइलें आगे बढ़ गई थीं, लेकिन अचानक ही प्रोजेक्ट बंद किए जाने के निर्णय से मामला लटक गया।
वहीं शासन ने इस प्रोजेक्ट को किसान के हित में लिया गया फैसला बताया है। फेस-5 के बंद होने और कमल विहार प्रोजेक्ट-4 में जमीन जाने से प्रभावित होने वाले लोगाें का क्या कहना है, इसे लेकर हरिभूमि की टीम ने बातचीत की।
पूर्वजों की जमीन जाने का दुख
डूमरतराई निवासी सुशील कुमार साहू का कहना है कि कमल विहार प्रोजेक्ट-4 में उनकी 4 एकड़ जमीन शासन ने अधिग्रहित की। इसके बदले 35 प्रतिशत यानी सिर्फ 1 एकड़ 40 डिसमिल जमीन ही वापस दी गई। इसमें लगभग उनके 3 एकड़ पुश्तैनी कृषि भूमि चली गई। इसको लेकर उनके पिता पंचराम साहू ने कानूनी लड़ाई भी लड़ी है, मगर कोई मतलब नहीं हुआ। खून पसीने की कमाई से बनाई गई पुश्तों की जमीन जाने का उनके परिवार को बहुत दुख है।
2 एकड़ भूमि भेंट चढ़ गई
कमल विहार प्राजेक्ट-4 के प्रभावित किसान गजेंद्र साहू को उनकी 2 एकड़ जमीन जाने का दर्द है। उनका कहना है कि उनके पास जीवनयापन के लिए पूर्वजों की छोड़ी गई 2 एकड़ कृषि योग्य जमीन थी। जिसे शासन ने कमल विहार-4 के लिए ले ली। उसके बदले में उन्हें जमीन का 35 प्रतिशत भाग ही वापस किया। अब जीवनयापन कैसे करें।
8-9 सौ घर टूटने से बचे
रविंद्रनाथ टैगोर वार्ड नंबर 51 के अंतर्गत आने वाले देवपुरी-डूमरतराई की पार्षद लक्ष्मी हिरेंद्र देवांगन का कहना है कि कमल विहार प्रोजेक्ट-5 के बंद होने से क्षेत्र के 8-9 सौ की बसाहट यानी घर उजड़ने से बच गए हैं। प्रोजेक्ट के बंद होने से रहवासियों में खुशी का ठिकाना नहीं है।

फेस-5 बंद होने से खुशी
डूमरतराई निवासी टी. श्रीनिवास रेड्डी का कहना है कि कमल विहार फेस-5 के बंद होने से लोगों में खुशी है। इस प्रोजेक्ट के जद में मेरी 7 हजार वर्गफुट रहवासी भूमि जा रही थी। प्रोजेक्ट के बंद होने से मेरी मेहनत की कमाई से बनाई गई जमीन बच गई। यह मेरे लिए लॉटरी लगने जैसा है। शासन ने इस प्रोजेक्ट को बंद करने को निर्णय लिया है, वह किसान हितैषी व जनहित में है।

बेघर होने से बच गया परिवार
डूमरतराई के रहने वाले मनहरण वैष्णव का कहना है कि उन्होंने सब्जी मंडी में काम करके 510 वर्गफुट जमीन खरीद कर रहने के लिए घर बनाया है। अगर कमल विहार प्रोजेक्ट आगे बढ़ता तो परिवार बेघर हो जाता। इतना ही नहीं 35 प्रतिशत जमीन वापस भी होती तो उसका क्या करता। इसलिए मकान के नहीं टूटने से उनका पूरा परिवार राहत की सांस ले रहा है।
13465 एकड़ जमीन लेने की थी योजना
आरडीए के अधिकारियों के मुताबिक नगर विकास योजना के अंतर्गत कुल 8 प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए थे। इन प्रोजेक्ट के लिए कुल 13 हजार 465 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित थी। अभी इनमें से सिर्फ 16 सौ एकड़ जमीन पर कमल विहार प्रोजेक्ट 4 ही सफल हो सका है। बाकी के 7 प्राेजेक्ट कभी शुरू ही नहीं हो पाए। वहीं कमल विहार-5 शुरू किया जा रहा था, वह भी शासन ने बंद कर दी।
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