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छत्तीसगढ़ समाचार- बड़ी खबर: EOW की जांच के बाद चिप्स कार्यालय में आईजी कल्लूरी की दबिश, अधिकारियों में मचा हड़कंप

EOW की जांच के बाद आईजी कल्लूरी ने आज चिप्स कार्यालय में दबिश दी। छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसाइटी (CHIPS) कार्यालय में आईजी के साथ पहुंचे अफसरों की टीम को अचानक देखकर अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

छत्तीसगढ़ समाचार- बड़ी खबर: EOW की जांच के बाद चिप्स कार्यालय में आईजी कल्लूरी की दबिश, अधिकारियों में मचा हड़कंप
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मनोज नायक, रायपुर। EOW की जांच के बाद आईजी कल्लूरी ने आज चिप्स कार्यालय में दबिश दी। छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसाइटी (CHIPS) कार्यालय में आईजी के साथ पहुंचे अफसरों की टीम को अचानक देखकर अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा कार्यालय पहुंची की आईजी की टीम चिप्स इंजीनियर सहित अन्य अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। बता दें गुरुवार को ओडब्लू की टीम ने पीडब्लूडी और चिप्स के ऑफिस में दबिश दी थी। रेड टीम में कई बड़े अधिकारियों के नाम शामिल थे। उस समय बड़ी गड़बड़ी का खुलास होने को अंदाजा लगाया जा रहा था। टेंडर प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले रहे हैं। बता दें अभी तक का प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है।

गौरतलब है कि बीते दिनों सीएजी ने छत्तीसगढ़ की पिछली सरकार के कार्यकाल में 4601 करोड़ के घोटाले का खुलासा किया था। इसके बाद से राज्य सरकार ने जांच का जिम्मा ईओडब्लू को सौंपा था। कैग ने खुलासा करते हुए बताया था कि पिछली सरकार के कार्यकाल में कई टेंडरों का फार्म चिप्स के दफ्तर से ही भरा गया था और टेंडर भी चिप्स के दफ्तर से ही पास किए गए थे।

जानिए क्या है पूरा मामला

  • नवंबर 2015 से मार्च 2017 के बीच 1459 टेंडरर्स के लिए एक ही ई-मेल आईडी का 235 बार उपयोग किया गया। जबकि सभी के लिए यूनिक आईडी देने प्रावधान था।
  • एक ही मेल आईडी का उपयोग 309 ठेकेदारों द्वारा लगातार किया गया। वहीं 17 विभागों के अधिकारियों ने 4601 करोड़ के टेंडर में 74 ऐसे कंप्यूटर का इस्तेमाल निविदा अपलोडकरने में किया। जिनका उपयोग वापस उन्हीं के आवेदन भरने के लिए हुआ था।
  • पीडब्लूडी व जलसंसाधन विभाग ने 10 लाख से 20 लाख के 108 करोड़ के टेंडर प्रणाली द्वारा जारी न कर मैन्युअल जारी किए।
  • जिन 74 कंप्यूटरों से टेंडर निकले उन्हीं से वापस भरे। ऐसा 1921 टेंडर में हुआ। इनकी कुल लागत 4601 करोड़ रुपए थी।
  • वहीं टेंडर के लिए 79 ठेकेदारों ने दो पैन नंबर का इस्तेमला किया था। एक पैन एक पैन पीडब्लूडी में रजिस्ट्रेशन और दूसरा ई-प्रोक्योरमेंट के लिए। ये आईटी एक्ट की धारा 1961 का उल्लंघन है।
  • टेंडर से पहले टेंडर डालने वाले और टेंडर की प्रक्रिया में शामिल अधिकारी, एक दूसरे के संपर्क में थे। 5 अयोग्य ठेकेदारों को 5 टेंडर जमा करने दिए गए। ई-टेंडर को सुरक्षित बनाने के लिए चिप्स ने पर्याप्त उपाय नहीं किए।

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