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GST इंटेलीजेंस ने कहा-जांच में चौंकाने वाले तथ्य, 1000 करोड़ की कर चोरी, जांच के दायरे में 100 करोबारी

छत्तीसगढ़ में GST इंटेलीजेंस की जांच में पता चला है कि ओड़िसा की जिस कंपनी ने गिरफ्तार दो कारोबारियों को फर्जी बिल मुहैया कराए थे, उसी कंपनी ने यहां के करीब सौ कारोबारियों को ऐसे ही फर्जी बिल दिए हैं।

GST इंटेलीजेंस ने कहा-जांच में चौंकाने वाले तथ्य, 1000 करोड़ की कर चोरी, जांच के दायरे में 100 करोबारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में GST इंटेलीजेंस की जांच में पता चला है कि ओड़िसा की जिस कंपनी ने गिरफ्तार दो कारोबारियों को फर्जी बिल मुहैया कराए थे, उसी कंपनी ने यहां के करीब सौ कारोबारियों को ऐसे ही फर्जी बिल दिए हैं।

फर्जीबाड़े की रकम 1000 करोड़ रुपए होने का अंदाजा जताया गया है। इंटेलीजेंस के मुताबिक टैक्स चोरी के मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। आने वाले दिनों में और भी नामचीन व्यापारियों की गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि टैक्स चोरी करने वाले कारोबारियों के नामों को सूचीबद्ध कर जीएसटी इंटेलीजेंस की टीम पड़ताल कर रही है। लोहा कारोबारी श्याम सेल्स कार्पोरेशन के संचालक संतोष अग्रवाल और आयुष अग्रवाल को 141 करोड़ के बोगस लेन-देन कर 21 करोड़ रुपए टैक्स चोरी करने के आरोप में जीएसटी इंटेलीजेंस के अधिकारियों ने शनिवार को गिरफ्तार किया था।
इस मामले की जीएसटी इंटेलीजेंस की टीम ने तीन माह पड़ताल करने के बाद दोनों कारोबारियों को गिरफ्तार किया। पूर्व में जीएसटी चोरी के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन पकड़े जाने के बाद उन कारोबारियों ने कानूनी लफड़े से बचने टैक्स जमा करने मजबूर हुए।

ओडिशा के रास्ते पूरे देश में फैलाया जाल
जांच में यह बात सामने आई है कि प्रदेश के लोहा कारोबारी ओडिशा में फर्जी कंपनी बनाकर, घर बैठे उस कंपनी से माल खरीदी शो करते थे और अपने माल को देश के अलग-अलग राज्यों में बेचते थे। फर्जी बिल के माध्यम से जिन कारोबारियों ने माल खरीदा है, विभागीय अधिकारी उन कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।

ऐसे करते हैं टैक्स चोरी
माल खरीदी के समय चुकाया गया कर आईटीसी, जिसे आउटपुट पर टैक्स देने के समय अपने इनपुट टैक्स के समय एडजस्ट कर सकते हैं, जो कारोबारी ने माल खरीदते समय चुकाया है। इस बात का फायदा उठाकर कारोबरियों ने ओडिशा की बोगस कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपए का लेन-देन किया। कारोबारियों ने उस बोगस कंपनी के नाम से बैंक में अकाउंट भी खुलवाया था, जिसमें आरटीजीएस और चेक के द्वारा रुपए भी जमा कराए। इस तरह कारोबारियों ने टैक्स चोरी की वारदात को अंजाम दिया।

आंख में धूल झोंकने की कोशिश
जीएसटी एक्ट के तहत दो करोड़ से ज्यादा टैक्स चोरी करने के आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रावधान है। इस वजह से कारोबारी बोगस कंपनियों से दो करोड़ रुपए से कम लेन-देन कर उस कंपनी से माल खरीदना बंद कर देते थे। इस तरह कारोबारियों ने एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की कर चोरी की है।

पकड़े जाने पर पटाया टैक्स
जीएसटी चोरी के आरोप में विभागीय अधिकारियों द्वारा पहले भी कारोबारियों के ठिकानों में छापे की कार्रवाई कर उनसे टैक्स के पैसे जमा कराए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से समता आर्केड स्थित मेसर्स हनुमान स्टील्स, मेसर्स कपिश्वर स्टील्स, श्री रिफ्रैक्टरी और ओजस्वी कार्पोरेशन के नाम शामिल हैं।

खामियों का उठा रहे फायदा
कारोबारी जीएसटी में व्याप्त खामियों का फायदा उटाकर टैक्स चोरी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। इसके अलावा स्टाफ की कमी होने की वजह से कारोबारियों के लेन-देन की नियमित जांच नहीं हो पा रही है। इस वजह से कारोबारी भविष्य में अंजाम की परवाह किए बिना बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की घटना को अंजाम दे रहे हैं।
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