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ई-टेंडरिंग घोटाले में CAG रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने EOW को सौंपा जांच का जिम्मा, कल्लूरी की निगरानी में 3 महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट

CAG की रिपोर्ट में ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर प्रदेश सरकार ने संशोधित आदेश जारी करते हुए ईओडब्ल्यू को जांच का जिम्मा सौंपा है। बता दें सरकार ने यह आदेश सीएजी रिपोर्ट में करोड़ों की अनियमितता उजागर होने के बाद दिया है।

ई-टेंडरिंग घोटाले में CAG रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने EOW को सौंपा जांच का जिम्मा, कल्लूरी की निगरानी में 3 महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट
अंकुश शर्मा, रायपुर। CAG की रिपोर्ट में ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर प्रदेश सरकार ने संशोधित आदेश जारी करते हुए ईओडब्ल्यू को जांच का जिम्मा सौंपा है। बता दें सरकार ने यह आदेश सीएजी रिपोर्ट में करोड़ों की अनियमितता उजागर होने के बाद दिया है। जारी आदेश में कहा गया है ​कि यह जांच रिपोर्ट एसआरपी कल्लूरी की निगरानी में 3 महीने में राज्य सरकार को सौंपनी होगी।
विभाग के समसंख्यक आदेश 17 जनवरी को निरस्त करते हुए राज्य शासन एतद द्वारा भारत के नियंत्रक महालेखाकार परीक्षक का 2018 का प्रतिवेदन संख्या-03 में CHiPS में ई-टेंडरिंग में इंगित अनियमितताओं के अनुसंधान हेतु प्रकरण छग राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्योरो को सौंपता है।
आदेश में कहा गया है ब्यूरो द्वारा आवश्यक वैधानिक कार्यवाही करते हुए एसआरपी कल्लूरी महा​निरीक्षक के प्रर्यवेक्षण में अनुसंधान कराया जाए। कार्यवाही का विवरण तीन महीने की अवधि में शासन को सौंपा जाए।

जानिए क्या है पूरा मामला
  • नवंबर 2015 से मार्च 2017 के बीच 1459 टेंडरर्स के लिए एक ही ई-मेल आईडी का 235 बार उपयोग किया गया। जबकि सभी के लिए यूनिक आईडी देने प्रावधान था।
  • एक ही मेल आईडी का उपयोग 309 ठेकेदारों द्वारा लगातार किया गया। वहीं 17 विभागों के अधिकारियों ने 4601 करोड़ के टेंडर में 74 ऐसे कंप्यूटर का इस्तेमाल निविदा अपलोडकरने में किया। जिनका उपयोग वापस उन्हीं के आवेदन भरने के लिए हुआ था।
  • पीडब्लूडी व जलसंसाधन विभाग ने 10 लाख से 20 लाख के 108 करोड़ के टेंडर प्रणाली द्वारा जारी न कर मैन्युअल जारी किए।
  • जिन 74 कंप्यूटरों से टेंडर निकले उन्हीं से वापस भरे। ऐसा 1921 टेंडर में हुआ। इनकी कुल लागत 4601 करोड़ रुपए थी।
  • वहीं टेंडर के लिए 79 ठेकेदारों ने दो पैन नंबर का इस्तेमला किया था। एक पैन एक पैन पीडब्लूडी में रजिस्ट्रेशन और दूसरा ई-प्रोक्योरमेंट के लिए। ये आईटी एक्ट की धारा 1961 का उल्लंघन है।
  • टेंडर से पहले टेंडर डालने वाले और टेंडर की प्रक्रिया में शामिल अधिकारी, एक दूसरे के संपर्क में थे। 5 अयोग्य ठेकेदारों को 5 टेंडर जमा करने दिए गए। ई-टेंडर को सुरक्षित बनाने के लिए चिप्स ने पर्याप्त उपाय नहीं किए।
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