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खुद रजिस्टर खरीद कर लिखते थे मीटर रीडिंग, अफसर के फर्जी दस्तखत कर लेते थे भुगतान

पुलिस विभाग के एमटी पूल शाखा में समीर और खालसा ट्रैवल्स द्वारा गाड़ी लगाकर लाखों के फर्जीवाड़े में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ट्रैवल्स संचालक बगैर एमटीओ के परमिशन खुद रजिस्टर खरीदे थे और उस पर गाड़ी का मीटर दर्ज करते थे।

खुद रजिस्टर खरीद कर लिखते थे मीटर रीडिंग, अफसर के फर्जी दस्तखत कर लेते थे भुगतान
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रायपुर। पुलिस विभाग के एमटी पूल शाखा में समीर और खालसा ट्रैवल्स द्वारा गाड़ी लगाकर लाखों के फर्जीवाड़े में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ट्रैवल्स संचालक बगैर एमटीओ के परमिशन खुद रजिस्टर खरीदे थे और उस पर गाड़ी का मीटर दर्ज करते थे।

यही नहीं, रजिस्टर पर एमटीओ की फर्जी मोहर और हस्ताक्षर भी करके भुगतान करा लेते थे। ट्रैवल्स संचालकों द्वारा दिए गए दस्तावेज की जांच में ऐसी कई खामियां मिलीं। दरअसल, पुलिस विभाग द्वारा निजी ट्रैवल्स की गाड़ियों को अधिग्रहित करने के बाद एमटीओ द्वारा लागबुक जारी किया जाता है, जिस पर गाड़ी की मीटर रीडिंग, गाड़ी के रवाना और वापसरी का समय, विजिट का हस्ताक्षर समेत अन्य डिटेल दर्ज की जाती है। इस बुक में एमटीओ का हस्ताक्षर होता है, लेकिन दोनों ने इसका पालन ही नहीं किया।

इनके खिलाफ दर्ज केस
पुलिस के मुताबिक आरोपी जहीर खान निवासी हार्डवेयर लाइंस सुपेला भिलाई, मिर्ता इब्राहिम बेग निवासी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी चरोदा भिलाई, समीरचंद सुमन निवासी सी 30 गायत्रीनगर शंकरनगर समीर ट्रैवल्स रायपुर और जसविंदर सिंह गुरुदत्ता निवासी श्यामनगर तेलीबांधा, इंद्रजीत सिंह निवासी सेक्टर 3 भिलाई के खिलाफ धोखाधड़ी समेत 8 धराओं में केस दर्ज किया गया है।
मीटर रीडिंग बदली गई है
दो ट्रैवल्स द्वारा 1 मई 2018 से 27 फरवरी के बीच मीटर रीडिंग बदली गई है। साथ ही अपना खुद का रजिस्टर खरीदकर पुलिस अफसर के फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान लिया गया है।
- एमएस चंद्रा, डीएसपी, रिजर्व पुलिस लाइंस

7 लाख रुपए की ठगी
गौरतलब है, पुलिस मुख्यालय की एमटी पूल शाखा द्वारा समीर ट्रैवल्स और खालसा ट्रैवल्स की गाड़ियां अधिग्रहित की गई थीं। एक मई 2018 से दोनों ट्रैवल्स की गाड़ियों का संचालन शुरू हुआ था। इस दौरान आरोपी संचालक और चालक मिलीभगत कर मीटर बढ़ाकर और अफसर के फर्जी दस्तखत रक भुगतान कराते थे। 1 मई 2018 से 27 फरवरी 2019 के बीच करीब 7 लाख रुपए का फर्जी तरीके से भुगतान ​लिया था। आॅडिट करने पर फर्जीवाड़े का खेल फूटा था।

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