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पुलिसकर्मियों के बाद अब जेल प्रशासन के कर्मचारियों को सरकार से आस, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

पुलिसकर्मियों के बाद अब जेल प्रशासन के कर्मचारियों ने भी अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी है।

पुलिसकर्मियों के बाद अब जेल प्रशासन के कर्मचारियों को सरकार से आस, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

रायपुर: छत्तीसगढ़ में नई सरकार आते ही अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की उम्मीद में नई जान आ गई है। इसी कड़ी में पुलिसकर्मियों के बाद अब जेल प्रशासन के कर्मचारियों ने भी अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी है। पुलिसकर्मियों के तरह जेल प्रशासन के कर्मचारियों की भी ड्यूटी 24 घंटे की होती है, लेकिन इन्हें पुलिस वालों की तरह छुट्टी के एवज में एक माह का वेतन भी नहीं दिया जाता। इन सभी बातों को लेकर जेल प्रशासन के कर्मचारियों ने 7 जनवरी को सीएम भूपेश बघेल के नाम ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन पत्र में जेल प्रशासन के कर्मचारियों यह मांग की है कि जेल प्रहरी एवं अधीक्षक पुलिस सेवा के लिए उपयुक्त मापदंड वाली शैक्षणिक व शारीरिक योग्यता रखते हैं, परंतु जेल में कार्यरत प्रहरी एवं मुख्य प्रहरी 24 घंटे सातों दिन गंभीर आपराधिक धारा में जेल में निरुद्ध दुर्दांत बंदियों के बीच विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए बंदियों की देखरेख व सुरक्षा करते हैं। राज्य में ऐसी कई घटनाएं घटी भी हैं जिनमें जेल प्रहरियो को जानलेवा हमले का सामना करना पड़ा है। जेल नियमावली के तहत जेल प्रहरियों को बिना अनुमति के जेल परिसर को छोड़ना मना है और किसी भी समय आवश्कता होने पर तत्काल ड्यूटी के लिए बुलाया जाता है। जेल में कार्यरत प्रहरियों को किसी प्रकार की साप्ताहिक अवकाश या शासकीय अवकाश नहीं मिल पाता है। ना ही इसके एवज में पुलिस के समान उन्हें वर्ष में एक माह का अतिरिक्त वेतन दिया जाता है।
इतना ही नहीं जेल प्रहरी को मात्र 700 से ₹800 का आवास भत्ता दिया जाता है। इतने कम पैसे में राज्य के किसी भी जिले में आवास मिलना संभव नहीं है, जिसका सुधार किया जाना नितांत आवश्यक है। जेल प्रहरी को सिर्फ प्रहरी से मुख्य प्रहरी की एक ही पदोन्नति का अवसर प्राप्त होता है। यही नहीं बहुत कम वेतनमान पर जेल प्रहरी सेवा देते हैं। पूरी सेवाकाल में अपना आवास भी नहीं बना पाते हैं। पुलिसकर्मियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना दी जाती है, जबकि जेल कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिलती है। ऐसी परिस्थितियों में जेल प्रहरी अपने माता पिता की सेवा या परिजनों के साथ समय नहीं बिता पाता, जिसके कारण वह गहरे मानसिक तनाव और दूसरी अन्य बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। कम वेतनमान के कारण उन्हें अधिक आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर जेल विभाग के आला अधिकारी कभी कोई आवश्यक कदम उठाते नहीं दिखते हैं। अतः ज्ञापन पत्र के माध्यम से जेल परिवार के लोगों ने राज्य के नए मुख्यमंत्री से उनकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुधार कार्य हेतु तत्काल पहल करने की अपील की है।
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