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देश के पहले ISO प्रमाणित सरकारी अस्पताल के कर्मचारी खुलेआम करते हैं खून की सौदेबाजी

प्रदेश के सरकारी अस्पताल पहले ही सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं और अगर कोई कसर अधूरी रह जाए तो उसे वहां मौजूद कर्मचारी पूरी कर देते हैं।

देश के पहले ISO प्रमाणित सरकारी अस्पताल के कर्मचारी खुलेआम करते हैं खून की सौदेबाजी
उमेश यादव, कोरबा. प्रदेश के सरकारी अस्पताल पहले ही सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं और अगर कोई कसर अधूरी रह जाए तो उसे वहां मौजूद कर्मचारी पूरी कर देते हैं। जी हां ये सच है। छत्तीसगढ़ का ऐसा जिला अस्पताल है, जहां ब्लड बैंक के कर्मचारी यहां आने वाले मरीजों से खुलेआम खून की सौदेबाजी करते हैं। हालात ऐसे हैं कि सुदूर वनांचल से आए भोले-भाले लोगों से खून की फीस के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं, वो भी बिना रशीद दिए। गौर करने वाली बात यह है कि इन्हें किसी अधिकारी का भी खौफ नहीं, वे बेखौफ होकर अपने कारनामों को अंजाम देते हैं।
दरअसल मामला कोरबा जिला अस्पताल का है। यह अस्पताल देश का पहला आईएसओ प्रमाणित अस्पातल है। बीते दिनों वनांचल में बसे गांव में रहने वाली सलामती को प्रसव पीड़ा हुई। गर्भवती महिला को प्रसव के लिए महतारी एक्सप्रेस की मदद से जिला अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। प्रसव के दौरान खून अधिक बह जाने के चलते अस्पताल पहुंचते तक महिला के शरीर में महज 4 ग्राम खून ही शेष था। आनन-फानन में महिला को भर्ती किया गया और डॉक्टरों ने खून चढ़ाने की बात कही।
ऐसे शुरू हुआ खून की सौदेवाजी का खेल
महिला के पति माखन सिंह ने ब्लड बैंक प्रभारी सुशील मेरी से संपर्क किया। ब्लड बैंक प्रभारी सुशील मेरी ने खून के बदले 1050 रुपए चार्ज की बात कही। अब मरता नहीं क्या करता वाली स्थिती सामने आ गई थी। माखन सिंह ने 1050 भुगातन कर खून ले लिया, लेकिन ब्लड बैंक प्रभारी ने उन्हें खून के बदले कोई भी रशीद नहीं दी।
इस मामले को लेकर जब ब्लड बैंक प्रभारी से पूछताछ की तो उसका लहजा भी किसी सरकारी नुमाइंदे की तरह ही था। चिकित्सा के पेशे को समाज सेवा ही जन सेवा का उत्कृष्ट माध्यम माना गया है, लेकिन इसकी भाषा पर गौर करें तो पता चलता है कि गरीब मरीजों से इनका व्यवहार कैसा रहता होगा।
वहीं, सीएमओ डॉ अरुण तिवारी ने मामले को लेकर कहा कि खून के बदले पैसे लेना गलत है। यदि ऐसा किया गया है तो उन्हें रशीद देनी चाहिए।
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