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दिव्यांग धमेंद्र ने साबित किया विकलांगता तन की कमजोरी हो सकती है मन की नहीं, राज्य स्तरीय बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

बहुत से लोग जीवन के सफर में एक समय पर आकर हताश हो जाते हैं। वहीं चंद ही लोग होते हैं जो अपने अथक परिश्रम और लगन से अपने सपनों और लक्ष्य को साध पाते हैं। हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं जो परिस्थितियों के विपरीत अपने लक्ष्य को पा लेते हैं चाहे फिर वो दिव्यांग ही क्यों न हों।

दिव्यांग धमेंद्र ने साबित किया विकलांगता तन की कमजोरी हो सकती है मन की नहीं, राज्य स्तरीय बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

रविकांत सिंह राजपूत, कोरिया। बहुत से लोग जीवन के सफर में एक समय पर आकर हताश हो जाते हैं। वहीं चंद ही लोग होते हैं जो अपने अथक परिश्रम और लगन से अपने सपनों और लक्ष्य को साध पाते हैं। हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं जो परिस्थितियों के विपरीत अपने लक्ष्य को पा लेते हैं चाहे फिर वो दिव्यांग ही क्यों न हों।

जी हां हम बात कर रहे हैं हल्दीबाड़ी के रहने वाले 33 वर्षीय धर्मेंद्र दास की। जिन्होंने अपनी कमी को ही अपनी ताकत बनाकर रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल किया है।
देख जिंदा से परे रंग-ए-चमन, जोश-ए-बहार....रक्स करना है तो फिर पांव की जंजीर देख। मजरूह सुल्तानपुरी की लिखी इस शायरी जैसी ही कहानी है धर्मेंद्र की। वे एक पैर से दिव्यांग हैं।
कम उम्र में दुर्घटना में अपना पांव गंवा बैठे, धर्मेंंद्र ने अपनी इसी कमी को अपनी ताकत बनाई और लक्ष्य साधने में लग गए। रोज सुबह 5 से 8 बजे तक जिम में पसीना बहाते हैं। इसमें दिव्यांगता भी इनके आड़े नहीं पाई। बॉडी मैंटेन रहे, इसके लिए खानपान पर विशेष ध्यान देते हैं।
प्रोटिन किंग पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में पहले स्थान पर रहे धर्मेंद्र ने बताया प्रतियोगिता में देशभर के 150 से अधिक बॉडी बिल्डिरों ने भाग लिया था। इसमें लगभग 10 दिव्यांग थे। वहीं करीब 60 युवतियां भी शामिल थीं।
स्पर्धा में उन्होंने अपने प्रदर्शन से लोगों को प्रभावित किया। बॉडी बिल्डिंग में धर्मेंद्र की अभिन्न रूचि है। अपने इस शौक को वे पैशन बनाना चाहते थे, इसलिए अब वे अन्य को भी बॉडी बिल्डिंग से जोड़ रहे हैं।
खुद दिव्यांग, दूसरों को दे रहे सहारा
धर्मेंद्र ने जिम आने वालों को प्रशिक्षण देकर मिसाल कायम की है। दरअसल ये वेस्ट चिरमिरी स्थित नगर निगम चिरमिरी के जिम में पहुंचने वाले दूसरे युवाओं को भी प्रशिक्षण देते है। ताकि वे भी बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के लिए उन्मुख हो सकें। उनसे प्रशिक्षण प्राप्त करने दर्जन भर युवा रोजाना जिम में वर्कआउट कर रहे है। धर्मेंद्र के ट्रेनर राम नारायण सिंह कहते है कि वे अच्छा काम कर रहे हैं। उनसे अन्य लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
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