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छत्तीसगढ़ समाचार : भूपेश सरकार के 30 दिन पूरे, हर दूसरे दिन लिए बड़े फैसले- बनी रहेगी यही रफ्तार

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेतृत्व वाली भूपेश बघेल सरकार के गठन का एक महीना पूरा हो गया है। 17 दिसंबर को भूपेश बघेल ने राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी।

छत्तीसगढ़ समाचार : भूपेश सरकार के 30 दिन पूरे, हर दूसरे दिन लिए बड़े फैसले- बनी रहेगी यही रफ्तार
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रायपुर. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेतृत्व वाली भूपेश बघेल सरकार के गठन का एक महीना पूरा हो गया है। 17 दिसंबर को भूपेश बघेल ने राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। शपथ लेने के बाद से श्री बघेल के नेतृत्व में सरकार राज्यहित से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले ले रही है। तीस दिनों की बात की जाए, तो सरकार ने औसतन हर दूसरे दिन एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के कार्यकाल का एक महीना पूरा होने के अवसर पर प्रदेश की जनता के नाम पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि नागरिकों के हक के फैसलों की यही रफ्तार बनी रहेगी।

राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने से पहले प्रदेश के किसानों से वादा किया गया था कि सरकार बनने के 10 दिन के अंदर किसानों की कर्जमाफी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री के रूप में 17 दिसंबर की शाम शपथ लेने के बाद मंत्रालय पहुंचकर भूपेश बघेल की तीन सदस्यीस कैबिनेट ने सबसे पहले प्रदेश के 16 लाख किसानों के अल्पकालीन कृषि ऋण माफ करने का फैसला किया। यह सारा काम सरकार गठन के दो घंटे के भीतर किया गया।

ये भी हैं सरकार के महत्वपूर्ण फैसले

कांग्रेस सरकार ने किसानों से यह वादा भी किया था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 2500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से की जाएगी। सरकार ने इस बारे में भी फैसला किया। इसकी वजह से प्रदेश के किसानों को प्रतिक्विंटल करीब 450 रुपए अधिक कीमत मिल रही है। इसी तरह तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 2500 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए मानक बोरा की गई है।

इसी क्रम में सरकार ने उद्योग न लगाने वाले टाटा उद्योग समूह से जमीन वापस लेकर किसानों को वापस सौंपी है। प्रदेश में वनों पर दशकों से काबिज आदिवासियों को वनाधिकार दिलाने के लिए सरकार ने निरस्त वन अधिकार पट्टों की पुन: जांच का निर्णय लिया है। छोटे भूखंड की खरीदी-बिक्री से रोक हटाई गई।

झीरम घाटी कांड तथा नान घोटाले की एसआईटी जांच प्रारंभ की गई। जिला खनिज संस्थान न्यासों के कार्यों की समीक्षा का निर्णय लिया गया। महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती, चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई व एजेंटों के खिलाफ प्रकरण वापसी पर विचार, राजिम कुंभ का नाम बदलकर माघी पुन्नी मेला करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया गया। पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। साथ ही सरकारी खर्चों में मितव्ययिता के निर्देश दिए गए।

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