Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

दस जिलों में सूखा, हफ्तेभर में नहीं बरसा पानी तो अकाल का अंदेशा...10 साल में दूसरी बार राज्य में ऐसे हालात

राज्य में सामान्य बारिश का पूर्वानुमान फेल होता नजर आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि सावन आने से महज दो दिन बाकी है और आसमान से मानसूनी बादल गायब हौ। तकरीबन दस जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 30 फीसदी पानी कम बरसा है।

दस जिलों में सूखा, हफ्तेभर में नहीं बरसा पानी तो अकाल का अंदेशा...10 साल में दूसरी बार राज्य में ऐसे हालात

रायपुर। राज्य में सामान्य बारिश का पूर्वानुमान फेल होता नजर आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि सावन आने से महज दो दिन बाकी है और आसमान से मानसूनी बादल गायब हौ। तकरीबन दस जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 30 फीसदी पानी कम बरसा है। इन जिलों में हफ्तेभर में बारिश नहीं हुई, तो अकाल का अंदेशा गहरा जाएगा। विशेषज्ञ भर मान रहे हैं। कि हालात नहीं सुधरे तो किसानों की मुसीबत बढ़ जाएगी। प्रदेश में अब तक 306 मिलीमीटर औसत बारिश हुई है। यह सामान्य वर्षा से 11 प्रतिशत कम है।

यहां आमतौर पर मानसून के आने के बाद से बारिश शुरू हो जाती है, लेकिन स्थिति विपरीत दिखाई दे रही है। सावन लगन में अब महज दो दिन का समय ही बचा है। ऐसे में बारिश का कहीं अता पता नहीं है। शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने बोनी का काम शुरू कर दिया था, लेकिन अब बीज के अंकुरण के लिए पानी की जरूरत है। ऐसे में बीज के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

पहले बोनी कर चुक किसानों के खेत सूखने लगे हैं। इसके कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। जिन जिलों में बारिश कम हुई है, वहां खेत सूख्ने के हालात तो है। ही, बोनी का काम भी पूरा नहीं हुआ। असल में इस साल प्रदेश में खंड वर्षा की स्थिति है। कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो गई है। वहीं ज्यादातर जिलों में बारिश का आंकड़ा पिछड़ा हुआ है।

फिर भी औसत के हिसाब से देखें, तो पिछले 10 वर्षों में 2015 व 2017 में ही जुलाई में इस साल से कम बारिश हुई थी। उन वर्षों में उत्पादन भी बहुत प्रभावित हुआ था। यह स्थिति इस साल बनने की आशंका बढ़ती जा रही है। मौसम विभाग की मानें तो आगामी एक सप्ताह तक यहां अच्छी बारिश के आसार नहीं है। ऐसे में किसानों के साथ ही आम लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

कमजोर पड़ा सिस्टम

उत्तरप्रदेश, बिहार से होकर बंगाल की खाड़ी तक बना सिस्टम आय कमजोर हो गया है और चक्रवात हिमालय की तराई में पहुंच गया है। यह छत्तीसगढ़ के लिए अच्छा संकेत नहीं है, क्योंकि जब भी ऐसा होता हेै, तब यहां बारिश थम जाती है। मौसम विभाग के अनुसार यहां 17-18 जुलाई के बाद बारिश होने की संभावना है। तब तक लोगों को इंतजार करना पड़ेगा।

सप्ताहभर में बारिश जरूरी

मौसम में फिलहाल नमी मौजूद है, इसलिए फसल खराब होने की स्थिति नहीं है, लेकिन सप्ताहभर बारिश नहीं हुई, तो स्थिति बिगड़ सकती है। इससे निपटने किसानों को पहले से योजना बना लेना चाहिए। - आरएल खरे, उपसंचालक कृषि

राजनांदगांव में कम व कोंडगांव में सर्वाधिक बारिश

इस साल राजनांदगांव जिले में सबसे कम 188 ​मिलीमीटर बारिश हुई है। वहीं सर्वाधिक वर्षा कोंडागांव में 538.7 मिलीमीटर हुई है। सरगुजा जिला ऐसा है, जहां सामान्य से आधी वर्षा भी नहीं हुई । प्रदेश में इस अवधि तक 343.9 मिलीमीटर वर्षा हो जानी चाहिए, लेनिक अलग—अलग इलाकों में बारिश की असमानता को देखकर यहां के खराब हालात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

Share it
Top