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CM भूपेश बघेल बोले- जनहित में सरकारी अमले से काम लेना भलीभांति जानता हूं

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कलेक्टर्स, एसपी कांफ्रेंस में सख्ती दिखाते हुए अफसरों से कहा कि आम लोग मेरे जनदर्शन में उस स्तर की समस्याएं लेकर आ रहे हैं, जो कलेक्टर और एसपी स्तर पर ही निपटाई जा सकती हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि कलेक्टर और एसपी ठीक से काम नहीं कर रहे।

CM भूपेश बघेल बोले- जनहित में सरकारी अमले से काम लेना भलीभांति जानता हूं

रायपुर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कलेक्टर्स, एसपी कांफ्रेंस में सख्ती दिखाते हुए अफसरों से कहा कि आम लोग मेरे जनदर्शन में उस स्तर की समस्याएं लेकर आ रहे हैं, जो कलेक्टर और एसपी स्तर पर ही निपटाई जा सकती हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि कलेक्टर और एसपी ठीक से काम नहीं कर रहे। कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि नामांतरण, बंटवारा और थाने में गलत एफआईआर जैसे काम लेकर लोग अगर मुख्यमंत्री के पास आएंगे, तो इसका मतलब यही हुआ कि कलेक्टर, एसपी ठीक से काम नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को आम आदमी की परेशानियों को समझना चाहिए।

कलेक्टर कांफ्रेंस खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुझे अपने अफसरों पर भरोसा है और मुझे जनहित में सरकारी अमले से काम लेना भी आता है। यह कांफ्रेंस 11 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन करीब 1 घंटे देर से शुरू हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम नागरिकों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के निराकरण के लिए भटकना ना पड़े। तहसील स्तर की समस्या का निराकरण तहसीलदार स्तर पर, थाना स्तर की समस्या थाना स्तर पर और जिला स्तर की समस्या का निराकरण जिला स्तर पर होना चाहिए। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, बिजली कनेक्शन लेने जैसी स्थानीय स्तर पर निराकृत होने वाली समस्या के हल के लिए नागरिकों को राजधानी तक भटकने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। मुख्यमंत्री ने वन अधिकार मान्यतापत्र के सामुदायिक एवं व्यक्तिगत दावे के प्रकरणों की समीक्षा कर लंबित प्रकरणों के निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने जुआ, सट्टा, अवैध शराब, कोयला की तस्करी पर लागाम लगाने के लिए पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत समयसीमा में सेवाएं प्रदान करने कहा। बैठक में मुख्य सचिव सुनील कुजूर, पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी, अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, केडीपी राव, आरपी मंडल, सीके खेतान, मुख्यमंत्री के सचिव गौरव द्विवेदी सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव, कमिश्नर, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।
डीएमएफ फंड की राशि की ना हो फिजूलखर्ची
मुख्यमंत्री ने जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ फंड) की राशि की फिजूलखर्ची की बात भी उठाई। उन्होंने कहा कि इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा। इस राशि से बड़ी बिल्डिंग बनाने से कोई फायदा नहीं होगा। इस राशि से टीचर, डाक्टर नियुक्त करेंगे, तो बेहतर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ माइनिंग प्रभावित लोगों का जीवन स्तर उठाने के लिए, उनके कल्याण के लिए है न कि ठेकेदारों के लिए। उन्होंने कहा कि डीएमएफ की राशि से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर का सुधार हो।
ग्रामीण विकास में तकनीक का हो इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘‘नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी‘‘ की परिकल्पना से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों की दशा में अामूलचूल परिवर्तन आएगा और ग्रामीण स्वावलंबन की अर्थव्यवस्था की दिशा में भी कार्य होगा। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र के लोग पहले बाहर से केवल नमक लेते थे, शेष जरूरत की सभी चीजें गांव में ही पैदा कर लेते थे, लेकिन आज गांव के लोग रोजगार तथा सामग्री के लिए शहर की ओर भाग रहे हैं। इसे बदलने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से अपने ज्ञान, कौशल तथा उच्च तकनीकी जैसे सैटेलाइट इमेजिंग, जीआईएस के माध्यम से ऐसी व्यवस्था करने पर जोर दिया, जिससे नदियों में ज्यादा से ज्यादा पानी उपलब्ध रहे।
गोठान के माध्यम से कार्ययोजना बनाएं
उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों और गांवों में गोठानों के लिए छायादार बड़ी जगह चिन्हांकित करने के निर्देश दिए, जो पशुधन के लिए ‘डे केयर सेंटर‘ की तरह कार्य करें। हर कलेक्टर पशुधन संवर्धन के लिए गोठान के माध्यम से कार्ययोजना बनाएं। गांवों में गोठानों को इस प्रकार बनाया जाए, जिससे कीचड़ न हो, मवेशियों को पानी और छाया मिले और यहां उनके गोबर का उपयोग गोबर गैस प्लांट, कंपोस्ट प्लांट और वर्मी कंपोस्ट प्लांट लगाने में किया जाए। गोबर गैस का उपयोग गांव में ईंधन या गैस चूल्हा जलाने में भी किया जाए, जिससे उज्ज्वला गैस के माध्यम से लगने वाली बड़ी राशि में कमी आए।
चारागाह विकास करने पर जोर
उन्होंने इसी तरह गांव में चारागाह विकास करने और समतलीकरण कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा, इन प्रयासों से गांव में रोजगार के साधन बढ़ेंगे, कृषि को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा ‘‘नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी‘‘ के माध्यम से आप एक बड़े कार्य के लिए आगे आ रहे हैं और इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ को मॉडल राज्य बनाना है।
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