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HC ने शिक्षक पंचायत कर्मियों को दिया जवाब, कहा- शिक्षक पंचायत को शासकीय कर्मचारी नहीं माना जा सकता

हाईकोर्ट ने फिर साफ कहा है कि शिक्षक पंचायत को शासकीय कर्मचारी नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा है कि पंचायत स्वतंत्र संस्था है, जिसे नियुक्ति करने व नियम निर्धारित करने का अधिकार है।

HC ने शिक्षक पंचायत कर्मियों को दिया जवाब, कहा- शिक्षक पंचायत को शासकीय कर्मचारी नहीं माना जा सकता
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संदीप करिहार, बिलासपुर: हाईकोर्ट ने फिर साफ कहा है कि शिक्षक पंचायत को शासकीय कर्मचारी नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा है कि पंचायत स्वतंत्र संस्था है, जिसे नियुक्ति करने व नियम निर्धारित करने का अधिकार है। ये आदेश चीफ जस्टिस की बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें शिक्षाकर्मी रहते एक पंचायत शिक्षक ने सरकारी कर्मचारी की तरह सिविल जज परीक्षा में आयु सीमा में छूट न मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
दरअसल साल 2014 में आयोजित सिविल जज परीक्षा में भाटापारा निवासी शिक्षाकर्मी वर्ग-3 और वर्तमान में शिक्षक पंचायत के पद पर कार्यरत हरनारायण यादव ने भी फॉर्म भरा। यादव ने शासकीय कर्मचारी के रूप में अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट देने की मांग की। यादव ने प्रारंभिक और लिखित परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन इंटरव्यू में यादव को शामिल नहीं किया गया, उसे कहा गया कि परीक्षा में शामिल होने की उसकी अधिकतम आयु सीमा पूरी हो चुकी है।
इस पर यादव ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। याचिका पर 19 मार्च 2017 को दिए गए फैसले में जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत पंचायत की स्थापना, अधिकार आदि के लिए निर्धारित प्रावधानों व सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसलों का हवाला देते हुए और यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि शिक्षक पंचायत शासकीय कर्मचारी नहीं है इसलिए आयु सीमा में छूट की पात्रता नहीं है। जिसके बाद उसने फिर अपील की, इस पर चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने 29 नवंबर 2018 को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया, फैसले में सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया गया।

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