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छत्तीसगढ़ समाचार: रमन ने कहा- ज्ञानचक्षु धीरे-धीरे खुलेंगे, चंद्रशेखर का पटलवार- पहले खुले रहते तो ऐसी दुर्गति नहीं होती

भाजपा में हार की समीक्षा के बाद भाजपा नेताओं में ही खुलकर एक दूसरे पर हमला हो रहा है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर साहू के बयान पर की गई टिप्पणी लोगों के ज्ञानचक्षु धीरे-धीरे खुलेंगे, पर चंद्रशेखर साहू ने पलटवार करते हुए कहा, डॉ. रमन हमारे नेता हैं, वो जो कहें वो सही है।

छत्तीसगढ़ समाचार: रमन ने कहा- ज्ञानचक्षु धीरे-धीरे खुलेंगे, चंद्रशेखर का पटलवार- पहले खुले रहते तो ऐसी दुर्गति नहीं होती
रायपुर। भाजपा में हार की समीक्षा के बाद भाजपा नेताओं में ही खुलकर एक दूसरे पर हमला हो रहा है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर साहू के बयान पर की गई टिप्पणी लोगों के ज्ञानचक्षु धीरे-धीरे खुलेंगे, पर चंद्रशेखर साहू ने पलटवार करते हुए कहा, डॉ. रमन हमारे नेता हैं, वो जो कहें वो सही है।
इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा, जहां तक ज्ञानचक्षु क सवाल है, तो ये पहले खुले रहते, तो ऐसी दुर्गति नहीं होती। हमारे ज्ञानचक्षु नहीं खुले, लेकिन जनता ने चुनाव में हमोर चक्षु खोल दिए हैं।

चंद्रशेखर साहू ने एक दिन पहले ही डॉ. रमन सिंह पर करारा हमला करते हुए यह कहा था कि उनका सुपेबेड़ा न जाना और किसानों को दो साल का बोनस न देकर मोबाइल बांटना चुनाव में भारी पड़ा। उनके इस बयान के बाद डॉ. रमन सिंह ने शुक्रवार को राजधानी में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हएु एक सवाल के के जवाब मे कहा, अब सभी ज्ञानचक्षु खुल रहे हैं। इस तरह क बयान और भी सामने आएंगे।
मेरा बयान हर कार्यकर्ता की भावना
श्री साहू ने हरिभूमि से चर्चा करते हुए कहा, मैंने जो भी कहा उसे मरेा बयान न माना जाए। मैंने जो कहा है, वह भाजपा के हर कार्यकर्ता की भावना है। भाजपा का हर कार्यकर्ता आज एक ही बात कहता है, भाजपा का सत्ता में रहते हुए किसानों को दो साल का बोनस देने का फैसला करना था, न कि मोबाइल बांटने का। अगर सरकार ने ऐसा किया होता, तो भले सरकार न बनती, कम से कमक इतनी दुर्गति नहीं होती और एक सम्मानजनक हार पार्टी को मिलती।
मैं भाजपा के हर कार्यकर्ता के साथ खड़ा हूं। मैं उनकी भावनाओं की कदर करता हूं, इसलिए उनकी भावनाओं को सामने लाने का काम मैंने किया है। मैं इसलिए भी यह बात सामने ला रहा हूं, ताकि हम आगे एक जुटकर काम कर सकें और फिर ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
वीरेंद्र पांडेय भी बरसे
वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है, चंद्रशेखरब साहू दुर्गति होने के बाद सार्वजनिक रूप से जो बातें कह रहे हैं, यदि समय रहते पार्टी फोरम में कहते, तो आजा ये दुर्दिन न देखने पड़ते। शायद साहू या अन्रू सामान्य कार्यकर्ता ज्यादा दोषी नहीं हैं, ​क्योंकि पिछले 10—15 साल में भाजपा सामूहिक नेतृत्व और कार्यकर्ता ​आधारति पार्टी से बदलकर कारपोरेट कल्चर वाली पार्टी हो गई है।
इसमे ंनेता सीईओ और कार्यकर्ता कर्मचारी हो गए हैं। अब पार्टी में परिवार भाव के स्थान पर स्वामी सेवक संस्कृति हावी हो गई है। अत: कोठ्र भी वह सत्य नहीं कहना चाहता, जो नेता सुनना नहीं चाहते। नेात की नारजगी संभावित लाभ से वंचित करसकती है। इसलिए सबसे भली चुप्पी। लाभ के लोभ में मौन भी आज की दुर्गति का कारण है। वो कार्यकर्ता खो गए, निजके बारे में एक अमेरिकी शोधकर्ता क्रेग बेस्टर ने अपने शोधग्रंथ एन आटोबायोग्राफी आफ इंडियन पोलिटिक्ल पार्टी में लिखा था कि जनसंघ का चवन्नी का सदस्य भी अपने नेताओं से निडरता पूर्वक सवाल कर सकता है।
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