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9 साल पुराने मामले में HC ने दिया फैसला, कहा- शादी से इंकार करना आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरणा नहीं

हाईकोर्ट की अवकाशकालीन अदालत ने 9 साल पुराने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शादी से इंकार पर युवती के खुदकुशी करने पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरणा का मामला नहीं बनता है।

9 साल पुराने मामले में HC ने दिया फैसला, कहा- शादी से इंकार करना आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरणा नहीं

बिलासपुर। हाईकोर्ट की अवकाशकालीन अदालत ने 9 साल पुराने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शादी से इंकार पर युवती के खुदकुशी करने पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरणा का मामला नहीं बनता है। जिसके चलते हाईकोर्ट ने विचारण न्यायालय द्वारा 2010 में पिता-पुत्र के खिलाफ तय आरोप को खारिज कर दिया।

मामला राजनांदगांव जिले के गेंदाटोला का है। याचिकाकर्ता विशेष कुमार भावटे पिता भीमराव भावटे की अंजू अंबाडे के साथ 2009 में शादी तय हुई थी। बाद में कुछ कारणों की वजह से विशेष ने अंजू के साथ शादी करने से इंकार कर दिया था। जिसके बाद 15 जुलाई 2009 को एक सामाजिक बैठक बुलाई गई।

बैठक में विशेष व उसके पिता भीमराव के अलावा युवती के परिवार वाले समेत अन्य लोग शामिल हुए। परिजनों द्वारा लाख समझाने के बाद भी विशेष विवाह करने को तैयार नहीं हुआ। वहीं युवती की जिद थी कि वह विशेष से ही शादी करेगी। रातभर बैठक चली, सुबह युवती पानी पीकर आने की बात कह कर घर चली गई। आधे घंटे तक वापस नहीं लौटने पर जब उसकी मां चंद्रभागा युवती को देखने गई तब तक उसने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

पुलिस ने आत्महत्या के लिए युवक व उसके पिता को जिम्मेदार मानते हुए दोनों के खिलाफ धारा 306, 34 के तहत अपराध पंजीबद्घ किया। विचारण न्यायालय ने 21 जनवरी 2010 को विशेष व उसके पिता भीमराव के खिलाफ धारा 306, 34 का आरोप तय किया।

इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर जस्टिस रजनी दुबे के अवकाशकालीन कोर्ट में अंतिम सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में विवाह से इन्कार करने को धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरणा का अपराध नहीं माना है।

मामले में ऐसा कोई रिकार्ड प्रस्तुुत नहीं किया गया कि विशेष युवती की खुदकुशी के लिए किसी भी प्रकार से जिम्मेदार है। कोर्ट ने पिता व पुत्र के खिलाफ धारा 306, 34 के तहत तय आरोप को खारिज कर दिया है। नौ वर्ष बाद याचिकाकर्ता दोषमुक्त हो गए।

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