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छत्तीसगढ़ समाचार: प्रबोधन कार्यक्रम में जब विधायकों ने पूछ डाला, मंत्री नहीं सुनेंगे तो उनको कैसे डराएंगे

छत्तसीसगढ़ की पंचम विधानसभा में पहली बार चुनकर पहुंचे 39 विधायकों को सवाल पूछने से लेकर संसदीय और सदन की विधानसभा की कार्यवाही के बारे में समिति कक्ष में शनिवार को प्रशिक्षण दिया गया।

छत्तीसगढ़ समाचार: प्रबोधन कार्यक्रम में जब विधायकों ने पूछ डाला, मंत्री नहीं सुनेंगे तो उनको कैसे डराएंगे
रायपुर। छत्तसीसगढ़ की पंचम विधानसभा में पहली बार चुनकर पहुंचे 39 विधायकों को सवाल पूछने से लेकर संसदीय और सदन की विधानसभा की कार्यवाही के बारे में समिति कक्ष में शनिवार को प्रशिक्षण दिया गया।
शनिवार से शुरू हुए इस दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। इसका उद्घाटन मधप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने किया। श्री प्रजापति ने कहा, सदन में हमारा आचरण एवं व्यवहार मीडिया के माध्यम से हमारे क्षेत्र की जनता की बीच जाता है। आप जितना सदन में अधिक समय देंगे, आप उतनी अधिक जागरूकता के साथ काम करने में सफल होंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक विधायक ने सवाल करते हुए पूछा कि जब मंत्री हमारी बात नहीं सुनेंगे तो उनको कैसे डराएंगे। जिसके बाद वहां, मौजूद सभी सदस्य ठहाका लगाकर हंसने लगे।
इस सवाल का जवाब देते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, यह आपके ज्ञान पर निर्भर करता है कि कोई मंत्री आपसे कैसे डरेगा। अगर आपको अपने सवाल के बारे में पूरी जानकारी होगी, तो किसी मंत्री और मंत्रालय में अफसर के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
श्री प्रजापति ने विधायकों से कहा कि विधायक बनने के बाद एक बार फिर आप सभी विद्यार्थी हो गये हैं। जितना पढ़ोगे, मंत्री-अफसर उतनी ही गंभीरता से सवालों को लेंगे। सदन में भले ही बोलने का मौका तीन महीने बाद मिले, लेकिन वरिष्ठ विधायकों को सुनने से ही विधायक के रूप में काम करने के बारे में सीख मिल जाएगी।
जनप्रतिनिधि सरकार के कामकाज पर रखें पैनी नजर- बृजमोहन
पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जनता द्वारा प्रदत्त अधिकारों का सदन के भीतर उनके हित में आप जितना प्रयोग करेंगे, उतने सफल जनप्रतिनिधि के रूप में आप पहचाने जाएंगे। जहां लोकतंत्री में जनता के अधिकारों एवं स्वतंत्रता की इजाजत सरकार का कर्तव्य होता है, वहीं चुने हुए सभी जनप्रतिनिधियों का दायित्व सरकार के कामकाज पर पैनी नजर रखने का होता है।
सरकार को बोध कराना कि सरकार के हाथ में शासन करने की शक्ति जनता की अमानत के रूप में है। यह बोध हम सरकार को तभी करा पाते हैं, जब विधानसभा सत्र का आगाज हो, हम विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं।
विस अध्यक्ष सदन की गरिमा बनाए रखें- महंत
विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण एवं ज्ञानार्जन के लिए आयु एवं वरिष्ठता की सीमा नहीं होती। योग्य एवं अनुभवी जनों का मार्गदर्शन अनुकरणीय होता है। उन्होंने कहा कि संसदीय सदन की गरिमा सभा के सदस्यों के कार्य विचार और व्यवहार पर निर्भर करती है, इसलिए सदस्यों का शिष्ट तथा संसदीय आचरण ही सदन की गरिमा को बनाये रखने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने सदस्यों से अनुरोध किया जिस भावना के साथ उनके निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं ने उन पर विश्वास व्यक्त किया है, उनके विश्वास की रक्षा करना और संसदीय परंपराओं, प्रक्रियाओं का परिपालन करते हुए उनकी अपेक्षाओं को पूर्ण करना सदस्यों का प्रथम दायित्व होना चाहिए।
सवाल पूछने के बताए तरीके
कार्यक्रम में नए विधायकों को सवाल पूछने के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। विधानसभा सचिव चंद्रशेखर गंगराडे ने बताया कि सवाले ऐेसे नहीं पूछने चाहिए कि उसका जवाब देना संभव न हो। श्री गंगराडे ने सवाल पूछने के शब्द सीमा के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही सदस्यों को संसदीय विषयों की जानकारी और शब्दावली के बारे में बताया।
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