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छत्तीसगढ़ समाचार : 130 साल के मगरमच्छ ''गंगाराम'' की मौत, दाल - भात भी खाता था गंगाराम, अंतिम विदाई में रोया पूरा गांव

जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर ग्राम बाबा मोहतरा के तालाब में रहने वाले करीब 130 साल के मगरमच्छ ''गंगाराम" की मंगलवार को मौत हो गई। गांव के लोग बताते हैं कि गंगाराम बहुत ही शांत स्वभाव का था।

छत्तीसगढ़  समाचार :  130 साल के मगरमच्छ

बेमेतरा। जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर ग्राम बाबा मोहतरा के तालाब में रहने वाले करीब 130 साल के मगरमच्छ 'गंगाराम" की मंगलवार को मौत हो गई। इससे पूरा गांव शोक में डूब गया। बताया जाता है कि गांव के लोग उसे देवता के रूप में पूजते थे। उनकी मांग पर वन विभाग ने गांव में ही उसका पोस्टमार्टम किया। पीएम के बाद ग्रामीणों को उनका देवता सौंप दिया गया। इसके बाद एक ट्रैक्टर सजाया गया। ग्रामीण उसकी आरती उतारते रहे। उसके माथे पर गुलाल का टीका लगाने को होड़ मची रही। सके बाद ट्रैक्टर पर पूरे गांव में उसे घुमाया गया।

बावामोहतरा में गंगाराम की कहानी सौ साल अधिक पुरानी है.

गांव के लोग बताते हैं कि गंगाराम बहुत ही शांत स्वभाव का था। उसके आसपास ही गांव के बच्चे नहाते रहते थे, पर कभी किसी पर हमला नहीं किया। कहा जाता है कि लोगों को सामने आता देख गंगाराम रास्ता बदल लेता था। इतना ही नहीं गांव के लोगों की माने तो गंगाराम दाल भात भी खाता था। गंगाराम पर कई शार्ट फिल्म और डाक्यूमेंट्री भी बन चुकी है।

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