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नक्सलियों से शांति वार्ता करेगी भूपेश सरकार, मुख्य सचिव ने गृह विभाग को प्लान बनाने को कहा

नई सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल साहसिक फैसले ले रहे हैं। ताजा खबर यह है कि राज्य में नक्सलियों से वार्ता करने के लिए मुख्य सचिव अजय सिंह ने गृह विभाग के अफसरों को योजना बनाने कहा है।

नक्सलियों से शांति वार्ता करेगी भूपेश सरकार, मुख्य सचिव ने गृह विभाग को प्लान बनाने को कहा
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नई सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल साहसिक फैसले ले रहे हैं। ताजा खबर यह है कि राज्य में नक्सलियों से वार्ता करने के लिए मुख्य सचिव अजय सिंह ने गृह विभाग के अफसरों को योजना बनाने कहा है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हरिभूमि के सहयाेगी चैनल आईएनएच से बातचीत में कहा कि उनके कार्यकाल में कई बार नक्सलियों से बात करने का प्रयास किया गया। नक्सलियों की ओर से कोई एक नेता नहीं मिला, जिससे बातचीत की जा सके। चार दशकाें से उनसे चर्चा की काेशिशें की जा रही हैं, लेकिन अब तक उनकी ओर से काेई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा, इस मामले में सरकार उनसे कोई सुझाव मांगती है, तो वे जरूर देंगे।

इस विषय पर आईएनएच चैनल में एक बड़ी बहस हुई। इसमें बीबीसी के पूर्व संवाददाता और सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्रांशू चौधरी ने कहा कि हमारे पास केवल चार पांच साल का ही वक्त है। नक्सलियों के टॉप लीडर इस समय तक या तो उनकी मौत हो जाएगी या वे उखड़ जाएंगे। दूसरी पंक्ति में ऐसा कोई सर्वमान्य नेता नहीं जिससे वार्ता की जा सकेे। नक्सली भी छोटे-छोटे गुटों में बंटकर बिखर जाएंगे। ऐसे में कोई सर्वमान्य नेता नहीं होने पर वार्ता मुश्किल होगी। केवल एक प्रतिशत लोग ही बस्तर में क्रांति की बात कर रहे हैं। वहीं 99 प्रतिशत लोग इस समस्या के हल के लिए कोई योजना बनाने के लिए सहमत हैं।
इधर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रुचिर गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा इस मामले में बहुत साफ है कि वे प्रदेश में शांति चाहते हैं। इसके लिए किसी से भी बात कर सकते हैं। गोली से गोली का जवाब तो कई दशकों से दिया जा रहा है, लेकिन इससे समस्या का हल नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि वार्ता होगी, भले ही कठिन हो पर रास्ता इसी से ही निकलेगा।
आत्मसमर्पित नक्सली रमेश ने मामले में कहा कि पहले सरकार को भरोसा कायम करना होगा। नक्सली आसानी से सरकार पर भरोसा नहीं करने वाले, क्याेंकि नक्सलियों ने झीरम कांड किया। कदम दर कदम बढ़ाने से वार्ता सफल हो भी सकती है। नक्सल मामलों की विशेषज्ञ वर्णिका ने कहा कि नक्सलियों से वार्ता संभव है, लेकिन भरोसा कायम करना और उसे बनाए रखना बहुत कठिन है । शांति के लिए दोनों पक्षों की जिम्मेदारी बहुत बची है।
मुख्य सचिव अजय सिंह ने शनिवार को मंत्रालय में जन घोषणापत्र के विभिन्न बिंदुओं के क्रियान्वयन की तैयारी के लिए विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों और स्वतंत्र प्रभार वाले विशेष सचिवों की बैठक ली। बैठक में गृह विभाग से संबंधित बिंदुओं पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री बघेल ने नक्सल समस्या के समाधान के लिए नीति तैयार करने और वार्ता शुरू करने के लिए गंभीरता से प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए गृह विभाग आवश्यक तैयारियां जल्द सुनिश्चित करे।
छत्तीसगढ़ में नई सरकार के गठन के बाद नक्सलियाें से बातचीत काे लेकर नए सिरे से बहस का दाैर प्रारंभ हाे गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेेश बघेल ने पहले ही प्रेस कांफ्रेंस में इसे सामाजिक आर्थिक समस्या करार देते हुए पीड़ित पक्ष से बातचीत कर रास्ता निकालने की बात कही थी। इस बीच बीते 15 सालाें में बताैर मुख्यमंत्री नक्सलियाें से लाेहा लेते रहे डॉ. रमन सिंह ने पहली बार नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि चार दशकाें से उनसे चर्चा की काेशिशें की जा रही है, लेकिन अब तक उनकी ओर से काेई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। जहां तक नक्सल समस्या के खात्मे का सवाल है, पूर्ववर्ती सरकार ने नक्सलियाें के खिलाफ कार्रवाई भी की और विकास की दिशा में कदम भी बढ़ाए। इस नीति काे सफलता भी मिली। सरगुजा पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त हुआ। दाेहरे माेर्चाें पर नक्सलियाें से निपटने के प्रयास किए गए। एक ओर जहां नक्सलियाें के खिलाफ बड़े ऑपरेशंस हुए, वहीं विकास के माध्यम से भी इसे हल करने की काेशिश की।

...तो प्रदेश में नक्सलवाद को रोकना कठिन होगा
प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद काे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से खास बातचीत-
प्रश्नः प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद नक्सलियाें से बातचीत काे लेकर नए सिरे से बहस छिड़ी है, क्या कहेंगे इस पर ..
डॉ. रमन सिंहः एक तरफ प्रदेश में झीरम जैसी घटना हुई, जिसमें कांग्रेस के नेताओं और जवानाें की नक्सलियाें ने निर्ममता से हत्या की। यह अपने आप में बड़ा अपराध है। नक्सलियाें की इससे बड़ी काेई और घटना मैं नहीं मानता कि हुई हाे। जिन्हाेंने ऐसे कृत्य किए हैं, अाज यदि उनके सामने यह कहा जाए कि यह सामाजिक-अार्थिक समस्या है, ताे प्रदेश में नक्सलवाद के विस्तार काे राेकना कठिन हाेगा।
प्रश्नः झीरम कांड के एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं, इसे किस तरह देखते हैं?
डॉ. रमन सिंहः झीरम की घटना की एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं। जबकि एनअाईए की जांच के अादेश कांग्रेस की सरकार में ही प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने दिए थे। उसके बाद भी नई जांच का आदेश हुआ, हम सब इसका स्वागत करते हैं।
प्रश्नः आपके 15 सालाें के कार्यकाल में कई बार नक्सलियाें से बातचीत के लिए पहल हुई, क्या प्रतिक्रिया रही उनकी?
डॉ. रमन सिंहः नक्सली कभी चर्चा करना चाहते ही नहीं। पिछले 40 सालाें में आंध्रा हाे या तेलंगाना हाे या देश के अन्य हिस्से हाें, नक्सलियाें से बात हुई ताे सिर्फ और सिर्फ उन्हाेंने अपनी ताकत बढ़ाने की साेची। समाधान की दृष्टि से अाज तक पाेलित ब्यूराे या अन्य माध्यमाें से काेई प्रस्ताव केंद्रीय स्तर पर नहीं गया। स्पष्ट हाेना चाहिए कि काैन है, जाे इस बात की चर्चा करेगा? क्या उनकी तरफ से काेई ऑफर आया है?
प्रश्नः सरकार का कहना है बंदूक की नाेक से नक्सलवाद खत्म नहीं हाेगा, क्या मानते हैं आप?
डॉ. रमन सिंहः हमने दाेनाें तरफ से समाधान की काेशिश की। एक तरफ नक्सलियाें के खिलाफ कार्रवाई की। नक्सलियाें के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशंस किए गए। अलग-अलग राज्याें काे साथ लेकर लड़ाई लड़ी। दूसरी तरफ विकास के कार्य भी किए। एजुकेशन, हेल्थ, पीडीएस की दिशा में ध्यान दिया गया। बिजली पहुंचाने की काेशिश की। उनके जीवन में मूलभूत परिवर्तन लाने का काम किया। इन दाेनाें कामाें से बस्तर काे पूरे प्रदेश में नई दिशा मिली।
प्रश्नः अगर नक्सलियाें से बातचीत की स्थिति निर्मित हाेती है, ताे किसे सबसे उपयुक्त माध्यम मानते हैं?
डॉ. रमन सिंहः मुझे नहीं लगता कि काेई ऑफर आया है। यदि ऐसा काेई ऑफर पाेलित ब्यूराे या अन्य माध्यम से आता है ताे सरकार काे इस पर रिस्पांस देना चाहिए।
प्रश्नः सरगुजा आपके कार्यकाल में नक्सल मुक्त हुआ, फिर बस्तर में क्या कमी रह गई?
डॉ. रमन सिंहः बस्तर में कमी कुछ नहीं रही। बस्तर में धीरे-धीरे हम सफलता की ओर बढ़ रहे थे। बड़ी सफलता वहां पर मिली भी है। सभी जिलाें में प्रशासन काफी अंदर तक पहुंचा। सफलता काे इस रूप में भी देखा जा सकता है कि अाज वहां 15 हजार कराेड़ के काम चल रहे हैं।
प्रश्नः क्या नक्सल उन्मूलन में राजनीतिक दबाव भी राेड़े का काम करते हैं?
डॉ. रमन सिंहः ये दाेनाें तरफ की बात है। चाहे एनजीओ के माध्यम से हाे या काेर्ट की तरफ से हाे, नक्सलियाें के जाे समर्थक हाेते हैं, वह हर रूप में उन्हें सपाेर्ट करते हैं। शहरी तंत्र भी उनका काफी एक्टिव रहा है।
प्रश्नः कुल मिलाकर अगर बंदूक से समाधान नहीं हाेगा, बातचीत से नहीं हाेगा ताे नक्सलवाद की समस्या सुलझेगी कैसे ?
डॉ. रमन सिंहः देखिए, बातचीत का मैं विराेधी नहीं हूं। बातचीत में यह स्पष्ट हाेना चाहिए कि किससे बात की जा रही है? काैन तैयार है बातचीत के लिए? क्या सेंट्रल बॉडी तैयार है? क्या पाेलित ब्यूराे तैयार है? क्या उन्हाेंने काेई ऑफर भेजा है? इन बाताें के स्पष्ट हाेने के बाद ही बातचीत हाे सकती है।
प्रश्नः नई सरकार काे खासताैर पर नक्सलवाद काे लेकर क्या सुझाव देना चाहेंगे।
डॉ. रमन सिंहः मुझसे जब भी काेई सुझाव मांगा जाएगा, मैं जरूर दूंगा।
पत्रकारों और वकीलों के लिए बनेगा कानून
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारों के साथ-साथ वकीलों और डॉक्टरों के संरक्षण के लिए भी गृह विभाग को विशेष सुरक्षा कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि उन्होंने जनघोषणा पत्र में भी इसका उल्लेख किया है। सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रत्येक नक्सल प्रभावित पंचायत को सामुदायिक विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रूपए देने का भी जनघोषणा पत्र में वादा किया है, ताकि उन्हें विकास के माध्यम से मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।
महिलाओं के खिलाफ अपराध को गंभीरता से लें
मुख्य सचिव ने कहा कि जनघोषणा पत्र में मुख्यमंत्री ने गृह विभाग से यह अपेक्षा की है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों को गंभीरता से लिया जाए और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रत्येक पुलिस थाने में एक महिला प्रकोष्ठ होगा और महिलाओं से संबंधित अपराधों की स्वतंत्र जांच की जाएगी। सार्वजनिक स्थानों और यातायात के साधनों को महिलाओं के अनुकूल और सुरक्षित बनाया जाएगा।

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