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जोगी बसपा गठबंधन पर गांठ, अजित बोले भाजपा के साथ, मायावती बोली- ना भजपा-ना कांग्रेस

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Ajit Jogi) के एक बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। उन्होंने एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल से कहा है कि अगर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में किसी को बहुमत नहीं मिला, तो वे भाजपा के साथ जा सकते हैं।

जोगी बसपा गठबंधन पर गांठ,  अजित बोले भाजपा के साथ, मायावती बोली- ना भजपा-ना कांग्रेस

रायपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Ajit Jogi) के एक बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। उन्होंने एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल से कहा है कि अगर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में किसी को बहुमत नहीं मिला, तो वे भाजपा के साथ जा सकते हैं। उनके इस बयान के बाद उनके साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ रही बसपा सुप्रीमो मायावती (BSP Suprimo Mayawati) ने साफ किया है कि वे न भाजपा के साथ जाएंगी, न कांग्रेस के साथ। माना जा रहा है कि जोगी के बयान पर मायावती की प्रतिक्रिया के बाद जोगी बसपा गठबंधन पर भी असर पड़ सकता है। इस बीच अजीत जोगी ने मायावती की मौजूदगी में कहा है कि बहुमत न मिलने पर भाजपा के साथ जाने की बात उन्होंने कभी नहीं की।

इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रेक्षक एक बड़े सियासी दांव के रूप में देख रहे हैं। खास बात ये है कि इसकी शुरुआत न जोगी ने की है और न मायावती ने। दरअसल बुधवार को छत्तीसगढ़ में अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान में हिस्सा लेने आए वरिष्ठ भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने जोगी के निर्वाचन क्षेत्र मरवाही जाकर बयान दिया था कि जोगी हमारे मित्र हैं, वे इधर उधर जाकर जबरन परेशान हो रहे हैं।

उन्हें अगर राजनीति करनी ही है, तो भाजपा में आ सकते हैं। राजनाथ के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत गरमाई थी। कांग्रेस ने राजनाथ सिंह के बयान के बाद उन्हें धन्यवाद दिया और कहा था कि जोगी से भाजपा की मिलीभगत की बात जो कांग्रेस कहती रही है, उसकी पुष्टि राजनाथ सिंह के बयान के साथ हो गई है। कांग्रेस पहले भी आरोप लगाती रही है कि जोगी की पार्टी भाजपा की बी टीम की तरह काम कर रही है।

गठबंधन पर पड़ सकता है असर

राजनीति के जानकारों का कहना है कि जोगी का भाजपा के साथ जाने वाला बयान आने के बाद उस पर मायावती की प्रतिक्रिया से ये साफ हो गया है कि जोगी ने जो बात कही है, वह उनका निजी विचार हो सकता है, गठबंधन का फैसला नहीं। अगर ऐसा होता, तो मायवती की लाइन जोगी से अलग नहीं होती।

दूसरी ओर जोगी ने मायावती की मौजूदगी में यह बात भी कही है कि उन्होंने कभी ये नहीं कहा कि बहुमत न मिलने पर वे भाजपा के साथ जाएंगे। एक मामले पर विरोधीभासी प्रतिक्रियाओं के बाद प्रेक्षकों का अनुमान है कि भाजपा के साथ जाने वाले बयान के मामले को लेकर गठबंधन में खींचतान बढ़ सकती है।

जोगी पहले भी बदल चुके बयान

इस बार के विधानसभा चुनाव के दौरान और इससे पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपने बयान बदलते रहे हैं। चुनाव शुरू होने के कई महीना पहले उन्होंने राजनांदगांव जाकर घोषणा की थी कि वे इस सीट से चुनाव लड़ेंगे। राजनांदगांव से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह चुनाव लड़ते हैं।

जोगी के बयान के बाद माना गया कि इस बार जोगी रमन के खिलाफ चुनाव मैदान पर होंगे, लेकिन नामांकन का समय शुरू होने से पहले उनकी पार्टी की ओर से कहा गया कि गठबंधन ने फैसला किया है कि जोगी किसी एक सीट से लड़ने की जगह प्रदेश की सभी 90 सीटों पर गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे।

इसके ठीक दो दिन बाद ये बात सामने आई कि मरवाही के लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि जोगी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। फिर मरवाही की जनता की ओर से आग्रह आया कि वे मरवाही से चुनाव लड़ें। जोगी राजनांदगांव का दावा छोड़कर मरवाही से चुनाव लड़ने चले गए।

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