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छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री पद के ये चार दावेदार, मंत्रियों की दौड़ में लम्बी कतार

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री के पद के लिए चार प्रमुख दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री पद के ये चार दावेदार, मंत्रियों की दौड़ में लम्बी कतार

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के परिणाम (chhattisgarh election result 2018) आने के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री के पद के लिए चार प्रमुख दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। इसमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel), विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव (TS Sinhdev), पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.चरणदास महंत (Dr Charyradas Mahant) तथा दुर्ग सांसद ताम्रध्वज साहू (Tamdhvraj Sahu) का नाम शामिल है। वहीं नई सरकार में मंत्री पद के दावेदारों की लंबी कतार है।

विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद अब मुख्यमंत्री पद के लिए कवायद शुरू हो गई है। हालांकि प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव पीएल पुनिया ने स्पष्ट कहा है कि सभी विधायकों से रायशुमारी के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इसे तय करेंगे। दावेदारों में प्रमुख नामों में प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल का नाम है।

माना जा रहा है कि किसी भी राजनीतिक दल में बहुमत आने पर मुख्यमंत्री पद की स्वाभाविक दावेदारी मानी जाती है। पूर्व मंत्री, सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक शैली, कुशल नेतृत्व और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को पुर्नजीवित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण श्री बघेल प्रबल दावेदार हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण अजीत जोगी को पार्टी से बाहर करना तथा विपरीत परिस्थितियों में भी प्रदेश कार्यालय का निर्माण कराना है।

वे अन्य पिछड़ा वर्ग के कुर्मी समाज से आते हैं। दूसरे दावेदारों में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव का है। पांच साल तक विपक्ष में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने के कारण स्वाभाविक दावेदारी उनकी है। पूरे 5 साल तक सदन में शानदार प्रदर्शन, सरल और स्वच्छ छवि के कारण उनकी स्वीकारिता सभी वर्ग के लोगों में है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले घोषणा पत्र बनाने की जिम्मेदारी उनकी थी।

उन्होंने घोषणा पत्र ऐसा बनाया कि कांग्रेस को शानदार सफलता मिली। विधायक और पार्टी आलाकमान में उनकी खासी पकड़ है। तीसरे दावेदार डॉ. चरणदास महंत चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष थे। वे सभी दावेदारों में सबसे वरिष्ठ हैं। मध्यप्रदेश की दिग्विजय सरकार और केंद्र की यूपीए सरकार में मंत्री भी रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत पार्टी के विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। कांग्रेस आलाकमान के बीच अच्छा तालमेल होने के कारण उनकी भी दावेदारी भी प्रमुखता से मानी जा रही है।

निर्विवादित हैं ताम्रध्वज

दुर्ग सांसद ताम्रध्वज साहू पूर्व मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान में वे कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके सरल स्वभाव के कारण प्रदेश से लेकर केंद्रीय पदाधिकारियों के बीच में भी स्वीकारिता है।

लंबा राजनीतिक अनुभव, सभी वर्ग के लोगों को उनका बेहतर तालमेल और निर्विवादित व्यक्तित्व है। वे अन्य पिछड़ा वर्ग के साहू समाज से आते हैं। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनकी दावेदारी भी प्रबल मानी जा रही है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में साहू समाज की संख्या काफी अधिक है।

मंत्री पद के दावेदार

मंत्री पद के दावेदारों में उप नेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा, पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ला, पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे, पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर, पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू, पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शिवकुमार डहरिया, पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू, युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उमेश पटेल, शैलेश पांडेय, जयसिंह अग्रवाल, रश्मि सिंह, अमरजीत भगत, बृहस्पत सिंह, मनोज मंडावी, अनिला भेड़िया, मोहन मरकाम, विकास उपाध्याय सहित 20 से अधिक विधायकों के नाम है। इसमें वे विधायक भी शामिल हैं, जिन्होंने रमन सरकार के मंत्रियों को हराया है।

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