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साख बचाने की जंग में हारेंगे 1100 से ज्यादा प्रत्याशी, तीसरे नंबर की लड़ाई भी दिलचस्प

जोगी-बसपा गठबंधन की मौजूदगी और थोक में निर्दलियों के साथ कांग्रेस-भाजपा की जंग का फैसला आने में कुछ घंटे ही बचे हैं। जाहिर है, जीतकर 90 प्रत्याशी ही विधानसभा पहुंचेंगे। इतने ही निकटतम प्रत्याशी होंगे। तीसरे नंबर पर कौन और किसकी बचेगी जमानत, यह देखना भी दिलचस्प होगा, क्योंकि कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय है।

साख बचाने की जंग में हारेंगे 1100 से ज्यादा प्रत्याशी, तीसरे नंबर की लड़ाई भी दिलचस्प

जोगी-बसपा गठबंधन की मौजूदगी और थोक में निर्दलियों के साथ कांग्रेस-भाजपा की जंग का फैसला आने में कुछ घंटे ही बचे हैं। जाहिर है, जीतकर 90 प्रत्याशी ही विधानसभा पहुंचेंगे। इतने ही निकटतम प्रत्याशी होंगे। तीसरे नंबर पर कौन और किसकी बचेगी जमानत, यह देखना भी दिलचस्प होगा, क्योंकि कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय है।

विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती के लिए एक दिन बाकी है। प्रदेश में 1268 प्रत्याशी में से केवल 90 ही जीतकर आएंगे। तीसरे नंबर पर रहने वाले कुछ तो जमानत बचा लेंगे पर माना जा रहा है कि करीब 11 सौ से अधिक प्रत्याशियों का जमानत जब्त हो सकती है।
जमानत जब्त होना चुनावी जंग में यह सबसे खराब बात समझी जाती है। जमानत जब्त ऐसे उम्मीदवारों की होती है, जो अपने विधानसभा क्षेत्र में डाले गए कुल पड़े मतों का छठवां हिस्सा भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
इसे इस प्रकार समझा जा सकता है, जैसे किसी विधानसभा क्षेत्र में एक लाख वोट पड़े। तो हर उम्मीदवार को इसका छठा हिस्सा यानी 16 हजार 666 वोट पाना जमानत बचाने के लिए जरूरी है। रायपुर शहर की चार सीटों में रायपुर दक्षिण की सीट में काफी संख्या में उम्मीदवार खड़े होते हैं।
पिछले चुनाव में यहां से 36 उम्मीदवार खड़े हुए थे, जिनमें से 34 की जमानत जब्त हो गई थे। यही स्थिति रायपुर ग्रामीण की थी, यहां पर भी 15 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। इस बार के चुनाव में 561 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में हैं।

उत्तर में 18 हजार वोट पाना जरूरी
शहर की चारों सीटों पर इस बार मतदान का प्रतिशत 60 से 61 प्रतिशत के बीच ही रहा है। रायपुर ग्रामीण में कुल 2 लाख 83 हजार 81 मतदाता में से 61.09 प्रतिशत वोट पड़े है, यानि कुल 1 लाख 72 हजार 934 लोगों ने मतदान किया। उन्हें 28 हजार 822 वोट जमानत बचाने के लिए जरूरी है। यहां पर 22 उम्मीदवार मैदान में हैं।
वहीं रायपुर पश्चिम में कुल 2 लाख 48 हजार 278 मतदाताओं में से 60.45 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला। इस प्रकार 1 लाख 50 हजार 64 मत पड़े। यहां पर जमानत बचाने के लिए प्रत्याशी को 25 हजार 14 वोट जमानत बचाने के लिए जरूरी है। यहां पर कुल 37 उम्मीदवार मैदान में है।
वहीं रायपुर उत्तर में कुल 1 लाख 82 हजार 462 मतदाता में से 60.30 प्रतिशत ने मतदान किया। इस प्रकार 1 लाख 10 हजार 24 लोगों ने मतदान किया।
यहां पर 18 हजार 337 वोट जमानत बचाने के लिए आवश्यक है। यहां पर 18 प्रत्याशी मैदान में हैं। वहीं रायपुर दक्षिण में कुल 2 लाख 38 हजार 736 मतदाता में से 61.78 प्रतिशत यानी 1 लाख 47 हजार 491 मतदाता ने मतदान किया। यहां पर 24 हजार 584 वोट प्रत्याशी के जमानत बचाने के लिए जरूरी है। यहां से कुल 46 प्रतयाशी इस बार मैदान में हैं।
कितनी होती है जमानत, कैसे ले सकते हैं वापस
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 34(1)(ख) के अनुसार विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले सामान्य अभ्यर्थी को 10 हजार रुपए की जमानत राशि जमा करानी होती है। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को पांच हजार रुपए जमानत राशि जमा करानी होती है।
रायपुर के उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजीव पाण्डेय ने बताया कि हारने वाले उन लोगों की जमानत जब्त होती जो वैध मतों के एक बंटे छह हिस्से से कम वोट पाते हैं। इससे अधिक वोट पाने वाले और विजयी उम्मीदवारों को जमानत राशि पाने के लिए लिखित में जिला निर्वाचन अधिकारी को आवेदन करना होता है। उन्हें कुछ दिनों में नगद रुपए लौटा दिए जाते हैं।
कब कितने लोगों की हुई जमानत जब्त
चुनाव आयोग को 2003 और 2008 के चुनावों में करीब सवा पांच करोड़ रुपए जमानत राशि से कमाई हुई थी। इन चुनावों में सैकड़ों प्रत्याशियों की करारी हार हुई थी। 2013 में राज्य में 355 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, जिनमें से 248 की जमानत जब्त हो गई थी।
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