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Chhattisgarh CM / कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल को बनाया छत्तीसगढ़ का नया सीएम

राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी सीएम के नाम का ऐलान हो गया है। कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल के नाम पर मुहर लगा दी है।

Chhattisgarh CM / कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल को बनाया छत्तीसगढ़ का नया सीएम
राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी सीएम के नाम का ऐलान हो गया है। कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल के नाम पर मुहर लगा दी है। वहीं भूपेश बघेल को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक खत्म हो चुकी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके नाम का पार्टी ने ऐलान किया है। इस बैठक में टीएस सिंहदेव, पीएल पुनिया और मल्लिकार्जुन खड़गे मौजूद हैं। बता दें कि भूपेश बघेल के अलावा चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू भी रेस में शामिल थे। लेकिन उनके नाम पर सहमती नहीं बन पाई।

बैठक से पहले रायपुर पहुंचे मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भूपेश बघेल ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीक के दौरान कहा कि आज विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कौन होगा के सवाल पर बघेल कुछ नहीं बोले थे।
वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चल रहा सस्पेंस पर सीएम की रेस में प्रबल दावेदार माने जा रहे टीएस सिंहदेव रायपुर पहुंच चुके हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री के सवाल पर कुछ भी कहने पर साफतौर पर मना कर दिया।

जानें कौन हैं भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ के दूसरे मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेश बघेल के नाम का ऐलान कर दिया है। भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 को दुर्ग छत्तीसगढ़ में हुआ। कांग्रेस प्रदेश कमेटी के प्रमुख बघेल कुर्मी क्षत्रिय परिवार से हैं। वहीं वर्तमान में वो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी है। बघेल 1985 से कांग्रेस से जुड़कर राजनीति कर रहे हैं। भूपेश बघेल पहली बार 1993 में विधायक बने थे। उसके बाद मध्य प्रदेश की दिग्विजय सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।

ऐसे हुई राजनीति में शुरुआत

भूपेश बघेल ने साल 1985 से राजनीति में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी।
भूपेश ने 1990 से लेकर 1994 तक युवक कांग्रेस कमेटी से जिला अध्यक्ष रहे।
उसके बाद 1996 में उनको छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी समाज का संरक्षक बनाया गया। फिर 1993 से 2001 तक मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के निदेशक बनाया गया।
2000 में जब छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया। तभी उनको सरकार बनते ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया। पहली बार वो पाटन सीट से विधानसभा पहुंचे।
2003 में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस बाहर हुई और भाजपा का शासन चला। उसके बाद भूपेश को विपक्ष का उप-नेता बनाया गया।
उसके बाद 2014 में पार्टी में उनका कद बढ़ा और छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर प्रदेश की कमान उनको सौंप दी।
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