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CG Elections 2018: ''जशपुर'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

आदिवासी बाहुल्य जशपुर विधानसभा की पहचान प्रदेश ही नहीं देश के सबसे पुराने और मजबूत भाजपा के गढ़ के रूप में है। लेकिन मानव तस्करी, पलायन समेत बदहाल सड़क और पत्थलगड़ी अभियान जैसे मुद्दे विपक्षी दलों के हाथों में भाजपा के खिलाफ बड़े हथियार साबित हो रहे हैं।

CG Elections 2018:

जशपुर। आदिवासी बाहुल्य जशपुर विधानसभा की पहचान प्रदेश ही नहीं देश के सबसे पुराने और मजबूत भाजपा के गढ़ के रूप में है। लेकिन मानव तस्करी, पलायन समेत बदहाल सड़क और पत्थलगड़ी अभियान जैसे मुद्दे विपक्षी दलों के हाथों में भाजपा के खिलाफ बड़े हथियार साबित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने जशपुर को ‘विकासगड़ी’ की संज्ञा दी है, लेकिन 5 विधानसभा चुनावों में यहां भाजपा की सत्ता होने के बाद भी अपेक्षित विकास नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।

भाजपा का अभेद किला होने के बावजूद जशपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क के साथ बिजली, स्वास्थ्य और पानी की गंभीर समस्या को लेकर लोगों का गुस्सा समय-समय पर फूटता रहा है।

चुनावी साल में सबसे बड़ी समस्या बिजली के रूप में सामने आई है। गांव से लेकर शहर तक बिजली की बदहाल व्यवस्था को लेकर लोग सड़क पर आते रहे हैं। पिछले दो महीने में कलिया, कांसाबेल, नीमगांव जैसे कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो चुका है।

कई दिनों तक बिजली का गुल रहना और बिना बिजली के ही अंधेरे में डूबे हुए गांवों के लोगों को बिजली जारी करने जैसी शिकायतें लगातार आ रही है। लेकिन इनका ठोस समाधान नहीं हो पा रहा है।

भाजपा के लिये बड़ी राहत देने वाली बात सिर्फ यही है कि विकास रथ पर सवार हो कर जशपुर पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सितम्बर 2018 तक जिले को शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य जिला प्रशासन को दिया है। इस बिजली तिहार के रूप में मना कर भाजपा अभी से भुनाने में जुटी हुई है।

उपलब्धि बनी गले की हड्डी

कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 के चौड़ीकरण और नवीनीकरण कार्य के लिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्ववाली एनडीए सरकार ने 14 सौ करोड़ का विशेष पैकेज जारी किया है। इसे भाजपा के नेताओं ने अपनी उपलब्धि बताते हुए कांग्रेस को निशाने पर लेने का कोई अवसर नहीं छोड़ा है। लेकिन अंबिकापुर से लेकर कुनकुरी तक इस एनएच का निर्माण करने वाली कंपनी जीवीआर के आर्थिक संकट में फंसने के बाद अधूरा पड़ा यह काम आम जनता के लिए मुसीबत और भाजपा नेताओं के लिए गले की हड्डी साबित हो रहा है।

जिले में विकास की नई इबारत लिखी जा रही

जशपुर विधानसभा क्षेत्र में दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव के सपने को साकार करने और मूलभूत सुविधा के विस्तार के लिए प्राथमिकता से प्रयास किया जा रहा है। बगीचा में डोड़की नदी में पुल का निर्माण, रौनी घाट का निर्माण, जशपुर में दमेरा रोड की स्वीकृति जैसे कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए हैं। विद्युत और शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से काम चल रहा है।

राजशरण भगत (विधायक)

भाजपा विधायक ने खुद का विकास किया

पांच सालों में भाजपा विधायक ने स्वयं का विकास करने का काम किया है। जशपुर के लिये स्वीकृत ट्रामा सेंटर को दुर्ग स्थानातंरित करना, जशपुर के भाजपा जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी नाकामी है। क्षेत्र में सिर्फ कागजी विकास हो रहा है। जनता भाजपा के इस छलावे का समझ चुकी है। जनता इसका करारा जवाब देगी।

सरहुल राम भगत (पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी)

जनता सड़क पर कर रही उग्र प्रदर्शन

जूदेव का मान भी नहीं रख पाई भाजपा

जिस दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव का नाम लेकर भाजपा सत्ता पर काबिज है, वही उनके जशपुर दमेरा चरईडांड़ मार्ग के सपने को साकार नहीं कर पाए। अपने मूंछों को दांव पर लगाकर भाजपा को सत्ता का स्वाद चखाने वाले जूदेव के साथ छल किया जा रहा है। ऐसी सरकार से लोग क्या उम्मीद रखेंगे। निर्माण व विकास कार्यों में कमीशनखोरी जनता के सामने उजागर हो चुकी है।

कृपाशंकर भगत, विधायक प्रत्याशी, छजकां

जीत के बाद भी हर चुनाव में भाजपा बदलती है प्रत्याशी

यहां जीत मिलने के बाद भी हर बार भाजपा अपना प्रत्याशी बदलती रही है। 1998 में विक्रम भगत ने चुनाव जीता लेकिन 2003 के चुनाव में भाजपा ने उनकी जगह राजशरण भगत को मैदान में उतारा। 2003 का चुनाव जीतने के बाद राजशरण को भी 2008 में टिकट नहीं मिला। उनकी जगह जागेश्वर राम को मौका मिला। 2013 के चुनाव में जागेश्वर राम को भाजपा ने किनारे कर फिर राजशरण को टिकट दी।

2013 में सहानुभूति की लहर

14 अगस्त 2013 को लंबी बीमारी के बाद कुमार दिलीप सिंह जूदेव के निधन के बाद तत्काल बाद हुए विधानसभा चुनाव में सहानुभूति की आंधी ने कांग्रेस सहित सारे विपक्षी दलों के प्रत्याशी को उड़ा ले गया था। इस आंधी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कांग्रेस को उसका परम्परागत वोट भी नहीं मिल पाया था और उसे 35 हजार से अधिक मतों से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। वहीं भाजपा के बागी प्रत्याशी गणेश राम भगत और बसपा के प्रत्याशी कृपा शंकर भगत सहित अन्य सारे प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।

यहां चलता है राजमहल का जादू

जशपुर विधान सभा सीट में प्रत्याशी का नाम तय करने से लेकर हार-जीत का फैसला पूरी तरह से राज परिवार के हाथों में है। कुमार दिलीप सिंह जूदेव के निधन के बाद राज्य सभा सांसद रणविजय सिंह जूदेव, भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, युद्ववीर सिंह जूदेव, नगर पालिका जशपुर की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियम्वदा सिंह जूदेव का प्रभाव अब भी इस क्षेत्र में पूरी तरह से हावी है। भाजपा की जीत में इस परिवार की भूमिका अहम रहेगी, वहीं कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को इनके प्रभाव से निपटने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

टिकट का गणित

जशपुर विधानसभा सीट के वर्तमान विधायक राजशरण भगत के अलावा पूर्व विधायक जगेश्वर राम भगत, सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष राजकपूर भगत, राज्य महिला आयोग की सदस्य व जिला पंचायत जशपुर की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती रायमुनि भगत, जनपद पंचायत जशपुर की अध्यक्ष श्रीमती शारदा प्रधान शामिल है। पार्टी से निष्कासित चल रहे पूर्व मंत्री गणेश राम भगत की पार्टी वापसी की स्थिति में टिकट का एक और मजबूत दावेदार, भाजपा के रणनीतिकारों के लिये सिरदर्द साबित हो सकता है। इसी प्रकार कांग्रेस से नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष पद को भाजपा के मुंह से छीनने वाले हीरू राम निकुंज के साथ विनय भगत, श्रीमती फूलकेरिया भगत, नगर पंचायत बगीचा की अध्यक्ष श्रीमती ललिता कोरवा टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वहीं सरपंच संजय लकड़ा और कोरवा समाज के अध्यक्ष रामप्रसाद कोरवा भी इस दौड़ में शामिल हैं। छजकां डीडीसी कृपा शंकर भगत को पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।

2008 समीकरण: कांग्रेस का अपना परम्परागत वोट गंवाना, राजपरिवार का दबदबा

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

जागेश्वर राम भगत भाजपा 64553 अंतर

विनय कुमार भगत कांग्रेस 48783 15770

12.2% वोट से भाजपा जीती

सड़क पर गाड़ी चलाना मुश्किल

कटनी गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग, इन दिनों कीचड़ और गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। पत्थलगांव से लेकर जशपुर तक और जशपुर से लेकर झारखण्ड की सीमा शंख तक इस सड़क में गाड़ी चलाना किसी बाजीगरी से कम जोखिम भरा काम नहीं है।

2013 समीकरण: दिलीप सिंह जूदेव के निधन पर सहानुभूति की अांधी में उड़ गई कांग्रेस

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

राजशरण भगत भाजपा 79419 अंतर

सरहुल राम भगत कांग्रेस 45070 34349

21.9% वोट से भाजपा जीती

जशपुर विधानसभा में शुरू से राजघराने का दबदबा

अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित जशपुर विधानसभा में शुरू से राजघराने का दबदबा रहा है। स्व. दिलीप सिंह जूदेव व उनके परिवार के प्रभाव के देखते हुए भाजपा ने हमेशा राजपरिवार की पसंद का ही प्रत्याशी ही उतारा।

पिछले 5 विधानसभा चुनाव में भाजपा को ही जीत मिली है। 1998 का चुनाव जीतने के बाद भी 2003 में भाजपा ने विक्रम भगत को टिकट न देकर राजशरण भगत को प्रत्याशी बनाया।

इससे नाराज विक्रम भगत ने भाजपा से नाता तोड़ लिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। 2003 के चुनाव में कांग्रेस ने विक्रम को ही मैदान में उतारा। भितरघात और राजपरिवार के दबदबे के चलते कांग्रेस को बुरी तरह मात खानी पड़ी।

इसके बाद 2008 के चुनाव में भाजपा ने जागेश्वर राम भगत को उम्मीदवार बनाया। वहीं कांग्रेस ने भी अपना प्रत्याशी बदलकर विनय कुमार भगत को मैदान में उतारा। परिणाम फिर भाजपा के पक्ष में आया।

जागेश्वरराम ने यह चुनाव 15 हजार से भी अधिक वोटों से जीता। 2013 के चुनाव में भाजपा ने राजशरण भगत को उम्मीदवार बनाया। वहीं कांग्रेस ने भी नया उम्मीदवार शारुहल भगत को मौका दिया।

इस चुनाव के पहले ही दिलीप सिंह जूदेव का निधन हो गया। दिलीप सिंह जूदेव के निधन से सहानुभूति का फायदा राजशरण भगत को मिला। उन्होंने सरहुल भगत को 34 हजार से भी ज्यादा मतों के अंतर परास्त किया।

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