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CG Elections 2018: ''मस्तूरी'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में पलायन सबसे बड़ी समस्या है। जिले के इसी क्षेत्र से ही सबसे ज्यादा लोग पलायन करके कमाने-खाने दूसरे प्रांतों में जाते हैं।

CG Elections 2018:

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में पलायन सबसे बड़ी समस्या है। जिले के इसी क्षेत्र से ही सबसे ज्यादा लोग पलायन करके कमाने-खाने दूसरे प्रांतों में जाते हैं।

तमाम प्रयासों के बाद भी यहां के लोग पलायन करना नहीं छोड़ रहे हैं। इसी तरह अवैध माइनिंग से भी क्षेत्र के लोग त्रस्त हैं। मस्तूरी-जयरामनगर, खैरा, पुरूभाठा आदि एरिया में अवैध उत्खनन की अत्यधिक शिकायत है। इन क्षेत्रों में ज्यादतर गिट्टी खदान, क्रशर भी हैं। इस क्षेत्र में नदी से रेत का अवैध उत्त्खनन एवं अवैध ईंट भट्ठें भी चल रहे हैं।

मस्तूरी के अलग मुद्दे

शहरी और ग्रामीण क्षेत्र से मिलकर बने मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी की समस्याओं के अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी जनता को निबटना पड़ रहा है।

पूरा क्षेत्र कृषि पर निर्भर है, लेकिन खूंटाघाट से नहर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण यहां की खेती संकट में पड़ जाती है। नहर में पानी को लेकर ग्रामीण लगातार आंदोलन करते रहे हैं। मस्तूरी में बने मुख्य सड़क के दोनों ओर बसे गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है या है बेहद खस्ताहाल है।

हमेशा जनता की आवाज बुलंद किया

10 साल तक क्षेत्र में भाजपा के विधायक कृष्णमूर्ति रहे, जो सरकार में मंत्री होने के बाद भी मस्तूरी का विकास नहीं कर सके और ग्रामीण सड़कों को गड्ढांे से छुटकारा नहीं मिल पाया था।

मैं विपक्षी विधायक होने के बाद भी हमेशा क्षेत्र की जनता के समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करता रहा हूं। मेरे ही प्रयास से कहरौदा, दर्रीघाट लिमतरा सड़क स्वीकृत हुआ है। गतौरा, खोखर, केंवटाडीह में बिजली का सब स्टेशन खुलवाया। क्षेत्र में सड़क, पानी टंकी, एनीकट, पुल-पुलिया आदि का निर्माण कराया।

दिलीप लहरिया (विधायक)

बहानेबाज हैं वर्तमान विधायक

वर्तमान विधायक बहानेबाज हैं। उनको मौका मिला पर वह मस्तूरी क्षेत्र का भला नहीं कर सके, जबकि मेरे कार्यकाल में मस्तूरी विधानसभा में एसडीएम कार्यालय खुला।

किसानों की सिंचाई समस्या को दूर करने लीलागर, अरपा नदी में करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपए के एनीकट एवं कई नहर भी बनवाए गए, हायर सेकेंडरी स्कूल खोले गए और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया। बिजली की समस्या दूर करने सब स्टेशन बनवाए गए। युवा वर्ग के लिए खैरा-जयरामनगर स्टेडियम का निर्माण कराया गया।

कृष्णमूर्ति बांधी (पूर्व विधायक)

2008 समीकरण: परिसीमिन का फायदा मिला, कांग्रेस का क्षेत्र में कमजोर प्रदर्शन

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

डॉ कृष्णमूर्ति बांधी भाजपा 54002 अंतर

मदनसिंह डहरिया कांग्रेस 44794 9208

6.4% वोट से भाजपा जीती

2013 समीकरण: विकास कार्यों ने नाखुश जनता ने बदलाव किया और कांग्रेस को अवसर मिला

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

दिलीप लहरिया कांग्रेस 86509 अंतर

डॉ कृष्णमूर्ति बांधी भाजपा 62363 24146

13.7% वोट से कांग्रेस जीती

खोंदरा से जौंधरा तक

  • चुनावी दावे अधिक हुए पर उसे अमल मंे नहीं लाया गया
  • खोंदरा से जौंधरा के बीच का करीब 120 किमी का इलाका इस विधानसभा क्षेत्र में आता है।
  • सड़क,पानी बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं

जनप्रतिनिधि व जनता जनार्दन की बात

निष्क्रिय रहा विधायक

विधायक के रूप में दिलीप लहरिया निष्कि्रय साबित हुए हैं। कभी भी उन्होंने क्षेत्र के जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन के सामने नहीं रखा। आज भी ग्रामीणों को राशन कार्ड में अपना नाम जोड़वाने बार-बार चक्कर काटना पड़ रहा है।

पेंशन के लंबित भुगतान की समस्या रही है तथा फसल क्षतिपूर्ति एवं फसल बीमा राशि नहीं मिलने की शिकायत है। क्षेत्र में पेयजल और बिजली की भी समस्या बनी हुई है।

चांदनी भारद्वाज, जनपद पंचायत अध्यक्ष

विधायक प्रति लोगों में आक्रोश

कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने लोगों के हितों के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, जिसके कारण लोगों में उनके प्रति आक्रोश है। क्षेत्र में पेयजल एवं सिंचाई के लिए पानी की समस्या है और खारंग जलाशय के टेल एरिया में पानी किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

भ्रष्टाचार के लिए क्षेत्र में बनाए गए एनीकट सफेद हाथी साबित हो रहा है और आज एनीकट का नहर नहीं बना है। पाराघाट व्यपवर्तन, भरारी व्यपवर्तन मतलब का नहीं है।

संतोष दुबे, मस्तूरी निवासी

कई घोटाले सामने आए

सामाजिक सुरक्षा, वृद्धा पेंशन योजना तहत मिलने वाला पेंशन ग्रामीणों को कई महीनों तक नहीं मिली। जब मामले ने जोर पकड़ा तो बड़ा घोटाला सामने आया।

इसी तरह मनरेगा के तहत कार्यों के लंबित भुगतान की भी समस्या से क्षेत्र के मजदूर आर्थिक तंगी झेलते रहे। सरकार की शौचालय निर्माण योजना में भी इस क्षेत्र में गड़बड़ियां सामने आती रही हैं।

छजकां बिगाड़ेगा समीकरण

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय संघर्ष होगा। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस की उपस्थित यहां के चुनावी समीकरण को बिगाड़ने जा रही है। छजकां यहां पर मजबूत होती जा रही है, क्योंकि छजकां के जिलाध्यक्ष ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी एवं कार्यकारी अध्यक्ष संतोष दुबे इसी विधानसभा के हैं। इसके अलावा जोगी परिवार की बहू ऋचा जोगी भी यहां सक्रियता दिखा रही हैं।

भाजपा में दावेदारों की सूची लंबी

भाजपा से पूर्व विधायक कृष्णमूर्ति बांधी सबसे प्रबल दावेदार हैं। इनके अलावा जनपद अध्यक्ष चांदनी भारद्वाज, रामशरण भारद्वाज प्रमुख हैं। कांग्रेस से सिटिंग विधायक दिलीप लहरिया की दावेदारी है। वहीं जोगी कांग्रेस से ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी, संतोष दुबे क्षेत्र में सक्रिय हैं। इनके अलावा ऋचा जोगी का नाम भी सामने आ सकता है।

दोनों प्रमुख पार्टियों को मिला मौका, दोनों से जनता नाराज

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट है। जिले की इस महत्वपूर्ण सीट पर 2003 व 2008 के चुनाव में भाजपा ने डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी को प्रत्याशी बनाया था।

2003 का चुनाव यहां काफी रोचक था, क्योंकि भाजपा के सिटिंग विधायक मदन सिंह डहरिया ने जोगी शासनकाल में भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लिया, फिर वे कांग्रेस से चुनाव लड़े थे।

इस चुनाव में श्री डहरिया को हराकर श्री बांधी विधायक और फिर स्वास्थ्य मंत्री भी बने। 2008 के विधानसभा चुनाव में पुन: इनके बीच मुकाबला हुआ। जिसमें भाजपा के डॉ. बांधी दूसरी बार मस्तूरी विधानसभा से चुनाव जीत गए।

दूसरी पारी में उन्हें राज्य अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया, किन्तु उनके 10 साल के कार्यकाल में मस्तूरी क्षेत्र में विकास की गंगा नहीं बह पाई। क्षेत्र के मतदाता इस कदर नाराज हुए कि 2013 के चुनाव में मस्तूरी विधानसभा सीट भाजपा से छीनकर कांग्रेस की झोली में चली गई।

कांग्रेस ने क्षेत्र के लोक कलाकार दिलीप लहरिया को चुनाव लड़ाया, जिसमें श्री लहरिया निर्वाचित हुए, लेकिन भाजपा से कांग्रेस को यह सीट मिलने के बाद भी मस्तूरी क्षेत्र के जनता को समस्याओं से छुटकारा नहीं मिला।

जातीय समीकरण

जांजगीर में बसपा का अपना अलग जनाधार है। यह अनुसूचित जाति बाहुल्य विधानसभा है, साथ ही निषाद, रजक, कुर्मी, साहू, यादव, ब्राह्मण, ठाकुर समाज के वोटर भी रहते हैं। ये चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभाते हैं।

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