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CG Elections 2018: ''बेलतरा'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए बेलतरा विधानसभा में शुरू से भाजपा की सत्ता है। पिछले पन्द्रह सालों से बद्रीधर दीवान ही जीतते आए हैं।

CG Elections 2018:

साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए बेलतरा विधानसभा में शुरू से भाजपा की सत्ता है। पिछले पन्द्रह सालों से बद्रीधर दीवान ही जीतते आए हैं।

इसके बावजूद क्षेत्र का वैसा विकास नहीं हुआ जैसा वादों-दावों में कहा जाता है। लोगों को आज भी हर काम के लिए ब्लाक मुख्यालय बिल्हा जाना पड़ता है।

विकास नहीं होने से जनता नाखुश भी है। इस विधानसभा का आधा क्षेत्र ग्रामीण और आधा शहरी है, इसलिए शहर के ज्यादतर नेताओं की नजर बेलतरा पर लगी हुई है।

हर काम के लिए 50 किमी दूर ब्लाक मुख्यालय की दौड़

15 सालों में विधानसभा क्षेत्र का विकास हुआ है। आज भी बेलतरावासियों को किसी भी काम के लिए 50 किमी दूर ब्लाक मुख्यालय बिल्हा जाना पड़ता है।

ब्लाक मुख्यालय के लिए सीधे कोई साधन नहीं होने के कारण ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों को समय पर पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। उन्हें पहले बेलतरा विधानसभा से शहर बिलासपुर आना पड़ता है और यहां से बिल्हा ब्लाक मुख्यालय जाना पड़ता है।

क्षेत्र में अवैध कोल डिपो के संचालन से ग्रामीण परेशान

बेलतरा क्षेत्र के अनेक ग्रामीण इलाकों की सड़कें खस्ताहाल हैं। इसी तरह क्षेत्र में संचालित अवैध कोल डिपो के डस्ट से फसल प्रभावित होने की समस्या है।

शहर से लगे हुए एरिया में बहुत तेजी से भू माफिया अपना पैर पसारते जा रहे हैं। क्षेत्र में एक भी पुुलिस थाना नहीं होना भी बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा सिंचाई साधनों की कमी किसानों के लिए बड़ी समस्या है। शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की शिकायतें भी हैं।

पन्द्रह सालों में हुआ बेलतरा का विकास

हसाल 2003 से लेकर 2018 तक इन 15 सालों में बेलतरा क्षेत्र का विकास हुआ है और पूरे विधानसभा में सड़कों का जाल फैला है। पहले जिन मार्गों पर सायकल में जाना मुश्किल था वहां चारपहिया वाहन चल रहे हैं।

गांव-गांव में सड़क, नाली, सामुदायिक भवन एवं सिंचाई के साधन बन गए हैं। खारून नदी में 10 एनीकट बनवाए गए और उनके प्रयास से ही 90 करोड़ राशि से खूंटाघाट जलाशय के टेल एरिया सीपत, बेलतरा से मस्तूरी तक नहर लाइनिंग का काम कराया गया। एक समय खेतों में पानी के लिए ग्रामीण झगड़ा करते थे, सिंचाई के साधन उपलब्ध होने से अब वह स्थिति नहीं है।

बद्रीधन दीवान (विधायक, विधानसभा उपाध्यक्ष)

भितरघात की वजह से पिछला चुनाव हारे

पिछले चुनाव में भी बेलतरा से 45 उम्मीदवार मैदान में थे। उम्मीदवारों की भीड़ के अलावा पार्टी के ही कुछ लोगों ने भितरघात किया, जिसके चलते कई जगहों के वोट भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चले गए।

हम भले ही हारे पर 2008 के चुनाव के मुकाबले 2013 चुनाव में हमारा वोटिंग प्रतिशत बड़ा है। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के नेवसा, गिधौरी, भिल्मी, टेकर में सिंचाई की सुविधा नहीं है।

किसानों को फसल बीमा और क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिली है। जिन किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई उनको मुआवजा नहीं मिला। क्षेत्र के कामों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और पेंशन योजना, शौचालय निर्माण में भुगतान जैसे समस्या बनी हुई है।

भुवनेश्वर यादव कांग्रेस, उम्मीदवार

भाजपा विकास का सिर्फ ढोल पीट रही

बेलतरा में विकास का ढोल पीटा जा रहा है, जबकि यहां राजस्व तहसील से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सुविधाओं की कमी है। सुरक्षा के लिए पुलिस थाना तक नहीं है।

15 सालों से यहां भाजपा शासन करती आई और केवल कागजी विकास हुआ है। पेंशन भुगतान, किसानों के साथ अत्याचार, केनाल निर्माण में लिमहा, बसहा, लखराम आदि के किसानों की जमीन अधिग्रहण कर मुआवजा तक नहीं दिया गया।

किसानों को न पानी मिला और न मुआवजा, उन्हें भूमिहीन कर दिया गया। हमने घोषणा या संकल्प पत्र नहीं दिया है, बल्कि शपथ पत्र दिया है जिसमें किए गए वादों को पूरा करेंगे।।

अनिल टाह (छजकां, उम्मीदवार)

चुनाव से पहले टिकट की जंग

शहरी क्षेत्र से जुड़े होने की वजह से बेलतरा विधानसभा क्षेत्र पॉलिटिक्स का प्लेग्राउंड बना हुआ है। यहां भाजपा और कांग्रेस से टिकट के दावेदारों की लंबी लिस्ट है। भाजपा नेता नए प्रत्याशी की उम्मीद कर रहे हैं।

इस पार्टी से बद्रीधर दीवान के बेटे विजयधर दीवान, भाजपा के जिलाध्यक्ष रजनीश सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष राजा पाण्डेय, माशिमं सदस्य प्रफुल्ल शर्मा, द्वारिकेश पाण्डेय, सुशांत शुक्ला, विक्रम सिंह, मंडल अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल, तिलक साहू आदि कतार में हैं।

इसी तरह कांग्रेस से भुवनेश्वर यादव, रामशरण यादव, अजय सिंह, राजू यादव, पिनाल उपवेजा, त्रिलोक श्रीवास, अशोक शुक्ला, वीरेन्द्र शर्मा, रमेश कौशिक, बसंत शर्मा, राजेन्द्र साहू, विनोद साहू आदि का नाम दावेदाराें में शामिल हैं। वहीं छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी पार्टी बेलतरा से अपना प्रत्याशी अनिल टाह को घोषित कर चुकी है।

2008 समीकरण: क्षेत्र में भाजपा की अच्छी पकड़, सीपत के जुड़ने का फायदा

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

बद्रीधर दीवान भाजपा 38867 अंतर

भुवनेश्वर प्रसाद कांग्रेस 33891 4976

5 % से वोट से जीती भाजपा

2013 समीकरण: क्षेत्र में भाजपा का जनाधार मजबूत, स्थानीय समर्थन भी मिला

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

बद्रीधर दीवान भाजपा 50890 अंतर

भुवनेश्वर प्रसाद कांग्रेस 45162 5728

4.6% से वोट से जीती भाजपा

शहर से लगे 7 वार्ड व 5 पंचायतें इसमें शामिल

  • बिलासपुर निगम सीमान्तर्गत अरपा पार सरकंडा क्षेत्र के सात वार्ड भी आते हैं।
  • बेलतरा विधानसभा शहर से लगा है, इसमें नगर निगम सीमा के सात वार्ड व पांच ग्राम पंचायतें भी शामिल हैं।
  • पांच ग्राम पंचायतों में मंगला, कोनी, मोपका, लिंगियाडीह, खमतराई हैं।

परिसीमन से विलुप्त हुआ सीपत बना बेलतरा विधानसभा

पहले सीपत विधानसभा हुआ करता था, जो परिसीमन में विलुप्त हो गया और उसकी जगह नई विधानसभा सीट बेलतरा का गठन हुआ। सीपत विधानसभा पर बसपा का कब्जा था, बसपा के रामेश्वर खरे विधायक थे।

उसके पहले यह कांग्रेस का गढ़ था। यहां से राधेश्याम शुक्ला, चन्द्रप्रकाश बाजपेयी, अरूण तिवारी विधायक बने थे, लेकिन 2003 के बाद से बेलतरा विधानसभा भाजपा के कब्जे में है। बद्रीधर दीवान चुनाव जीतते आए हैं। 2003 के चुनाव में बेलतरा में चतुष्कोणीय मुकाबला हुआ।

कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार को प्राथमिकता देते हुए रमेश कौशिक को चुनाव लड़ाया और बसपा से सिटिंग विधायक रामेश्वर खरे मैदान में थे। भाजपा ने ब्राम्हण वर्ग से बद्रीधर दीवान को चुनावी जंग में उतारा। इसका बड़ा कारण अविभाजित मध्यप्रदेश के समय 1990 के चुनाव में सीपत से श्री दीवान एक बार पहले भी जीत चुके थे। चौथे प्रत्याशी के रूप में राजेन्द्र चावला एनसीपी से चुनाव लड़े थे।

इस चतुष्कोणीय मुकाबले में हार-जीत का अंतर कम रहा, भाजपा के बद्रीधन दीवान ने जीत दर्ज की। साल 2008 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पुन: बद्रीधन दीवान को टिकट देकर चुनाव में उतारा, जबकि कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग से जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहे भुवनेश्वर यादव को मौका दिया। कांटे की लड़ाई में भाजपा के श्री दीवान शहरी वोटों के अंतर से अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।

2013 के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी ने अपने इन्हीं दोनों उम्मीदवारों को रिपीट करते हुए फिर से चुनाव लड़ाया, जिसमें बेलतरा विधानसभा का शहरी इलाका है, वहां के शहरी वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में हुआ।

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