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CG Elections 2018: ''लुण्ड्रा'' में ये बनेगा मुख्य मुद्दा

अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र की 90 फीसदी से अधिक आबादी कृषि पर आश्रित है लेकिन क्षेत्र में सिंचाई का बुरा हाल है। ब्लॉक मुख्यालय व ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाली सभी सड़के गड्ढों में तब्दील हो गई हैं।

CG Elections 2018:

अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र की 90 फीसदी से अधिक आबादी कृषि पर आश्रित है लेकिन क्षेत्र में सिंचाई का बुरा हाल है। ब्लॉक मुख्यालय व ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाली सभी सड़के गड्ढों में तब्दील हो गई हैं।

विधायक विपक्ष का होने पर सरकार से सहयोग नहीं मिलने का ढोल पीट रहे हैं वहीं दूसरी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधा नहीं मिलने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। कांग्रेस के कब्जे वाले इस विधानसभा क्षेत्र में हाथी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

खस्ताहाल सड़कों से परेशान जनता नाराज

लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र का बड़ा इलाका पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है। विधानसभा क्षेत्र की सभी सड़कें खस्ताहाल हैं। विकासखण्ड को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली बरियों-धौरपुर-रघुनाथपुर की हालत यह है कि सड़क पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलने में भी परेशानी हो रही है।
दो साल पहले 41 किमी लंबी इस सड़क को बनाने बजट में शामिल किया गया था लेकिन अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। क्षेत्रवासियों द्वारा कई बार आंदोलन करने पर मरम्मत कराने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अभी तक मरम्मत का कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है।
पूर्व बनी पीएमजीवएसवाई व सीएमजीएसवाई की सभी सड़के जर्जर हो गई हैं। खस्ताहाल सड़कों को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है।

आदर्श सब्जी मंडी बनाने की मांग भी लंबित

क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरी मिर्च, टमाटर, खीरा, गन्ना व अन्य सब्जियों की खेती होती है लेकिन विपणन की व्यवस्था नहीं होने से किसानों को उनके उपज की बाजिब कीमत नहीं मिल पाती। सब्जी उत्पादक कृषकों के लिए शीतगृहयुक्त आदर्श सब्जी मण्डी स्थापित करने की मांग की गई थी लेकिन शासन से इसकी स्वीकृति नहीं मिल पाई।

सरकार पीट रही विकास का झूठा ढोल

मुख्यमंत्री घूम-घूम कर विकास का झूठा ढोल पीट रहे हैं। लुण्ड्रा क्षेत्र में एक भी सड़क चलने लायक नहीं है न ही सिंचाई योजनाओं का कोई लाभ मिल रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल सभी को मालूम है। बिना सड़क व सिंचाई सुविधा के कभी विकास संभव नहीं है। जनता ने मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे पूरा करने मैंने हर कोशिश की।
चिंतामणि महाराज (विधायक)

क्षेत्र के चारों ओर समस्या ही समस्या

विधायक ने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के निराकरण के लिए कोई पहल नहीं की जिससे क्षेत्र में कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका। क्षेत्र में सिर्फ केन्द्र व राज्य सरकारी की योजनाओं के तहत कार्य हो रहे हैं। विधायक की पहल से एक काम भी नहीं हो सका। सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत से संबंधित शिकायतें वैसी ही हैं।
विजयनाथ सिंह (पूर्व विधायक )
क्षेत्र में छोटी-बड़ी 27 सिंचाई परियोजनाएं है लेकिन बमुश्किल 3-4 का ही संचालन हो रहा है। नहरों के क्षतिग्रस्त होने के कारण शेष परियोजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मांगों पर अमल नहीं
शक्कर कारखाना, कॉलेज, सड़क निर्माण व सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की मांगों को पूरा करने में सरकार ने कोई दिलचस्पी नहीं ली।

अनदेखी

विकासखण्ड की मुख्य सड़क बरियो-धौरपुर-रघुनाथनगर को दो साल पहले बजट में शामिल किया गया था लेकिन अभी तक इसकी प्रशासकीय स्वीकृति नहीं दी गई है।

गड्ढों से रोज घायल हो रहे लोग

क्षेत्र की कोई भी सड़क चलने लायक नहीं है तथा रोज बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे है। सड़क निर्माण के लिए चक्काजाम आंदोलन करने के साथ ही कई बार विधायक को समस्या से अवगत कराया गया तथा लगातार तीन सालों से लोक सुराज अभियान में मांग की जा रही है लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई।
सीमा सिंह, ग्राम कुदर

पानी के लिए दूसरे गांव का सफर

क्षेत्र में विद्युत विस्तार का कार्य हुआ है साथ ही मजदूरी के लिए मनरेगा का काम चल रहा है लेकिन गर्मी में हैण्डपंप व कुंए सूख जाने से पानी के लिए दूसरे गांव का सफर करना पड़ रहा है। क्षेत्र में पेयजल समस्या के निराकरण हेतु कोई पहल नहीं हुइ है। सड़कों के जर्जर होने कारण सायकल चलाना भी मुश्किल हो जाता है।
मतेश्वर सिंह, ग्राम सरईडीह

सिर्फ आश्वासन दे रहे

क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य सिंचाई सहित अन्य कई बड़ी समस्याएं हैं जिनके निराकरण के लिए कोई पहल नहीं की गई है। समस्याओं की बात रखने पर सिर्फ आश्वासन देकर काम चलाया जा रहा है।
बरियो-धौरपुर सड़क के लिए कई बार आंदोलन हो चुका है। अन्य सड़कें भी बदहाल है लेकिन इनके निर्माण के लिए कोई पहल नहीं की गई है। गर्मी में पेयजल समस्या विकराल बनती जा रही है। हैण्डपंप व बोर सूख गए हैं। सिंचाई सुविधाओं का भी कोई लाभ नही मिल रहा है।
शैलेश सिंह, जनपद अध्यक्ष

सबके दुख-सुख में सहभागी

विधायक चिंतामणि महाराज ने बेहद सक्रियता से अपने क्षेत्र के लोगों के हर दुख-सुख में सहभागी रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए हर संभव कोशिश की लेकिन विपक्ष का विधायक होने के नाते सरकार ने उनकी मांगों को दरकिनार कर दी जाती हैं।

सालों से जर्जर सड़कों के माध्यम से आने-जाने में क्षेत्रवासियों को किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है इससे सरकार का कोई लेना देना नहीं है। उन्हें विकास यात्रा निकाल कर सिर्फ झूठी वाहवाही लूटने से मतलब है।

मार्तण्ड प्रताप सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष,कांग्रेस

2008 समीकरण: क्षेत्र में हुए विकास को जनता का समर्थन मिला

प्रत्याशी पार्टी मत जीत का

रामदेव राम कांग्रेस 51636 अंतर
काेमलभान सिंह भाजपा 43438 8198
6.7% से वोट से जीती कांग्रेस

2013 समीकरण: नए प्रत्याशी और संगठन

का क्षेत्र में कमजोर प्रदर्शन
प्रत्याशी पार्टी मत जीत का
चिंतामणी महराज कांग्रेस 64771 अंतर
विजयनाथ सिंह भाजपा 54825 9946
7.1% से वोट से जीती कांग्रेस

विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा शुरू से बना रहा

कांग्रेस के प्रभाव वाली इस सीट पर चार बार गैर कांग्रेसी दलों को सफलता मिली है। 1962 के विधानसभा चुनाव में जनसंघ के आत्माराम इंगोले ने जीत हासिल की थी जबकि 1977 में जनता पार्टी के आसन राम को जीत मिली थी।
कांग्रेस के भोला सिंह क्षेत्र का तीन बार जबकि रामदेवराम एक बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 1990 में भाजपा के राम किसुन सिंह और 2003 में विजयनाथ सिंह ने जीत हासिल की थी।

टिकट के दावेदार

भाजपा : विजयनाथ सिंह, प्रबोध मिंज, फूलेश्वरी सिंह
कांग्रेस : चिंतामणि महाराज, गंगाराम, रामदेवराम
जोगी इफेक्ट : छजकां भी चुनाव में अपनी भागीदारी निभाएंगी।

विकास ही होगा

लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र स्वास्थ्य व सिंचाई योजनाओं का विकास प्रमुख मुद्दा है। सड़कों की बदहाली को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है तथा इसके लिए लोग कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं।

जातिगत समीकरण

लुण्ड्रा अनुसूचित जनजाति वर्ग के गोड़, उरांव, कंवर एवं पहाड़ी कोरवा समुदाय एवं पिछड़ा वर्ग में यादव, कुर्मी, सोनी व मुस्लिम समाज अच्छी खासी जनसंख्या है। नगेशिया, किसान समाज चुनाव में प्रभावी भूमिका निभाता है।
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